
मुंबई। देश की प्रमुख आईटी सर्विस कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने सोमवार को अपने सिस्टम और कस्टमर एनवायरनमेंट में साइबर सेंध की आशंका को लेकर स्थिति स्पष्ट की। कंपनी ने कहा कि कुछ कर्मचारियों की जानकारी लीक होने की आशंका से जुड़े थ्रेट-इंटेलिजेंस अलर्ट मिलने के बाद मामले की जांच की गई, लेकिन जांच में उसके सिस्टम या किसी ग्राहक के एनवायरनमेंट में सेंध लगने का कोई ठोस सबूत नहीं मिला है।
TCS ने बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) को दी जानकारी में कहा कि कंपनी ने मामले की जांच की है और उसे ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला, जिससे यह पुष्टि हो कि उसके ऑपरेशनल सिस्टम या ग्राहकों के सिस्टम से समझौता हुआ है। कंपनी के मुताबिक, जिस जानकारी के लीक होने का दावा किया जा रहा है, वह चार साल से ज्यादा पुरानी प्रतीत होती है और उसमें केवल कर्मचारियों की बुनियादी जानकारी शामिल है।
थ्रेट इंटेलिजेंस अलर्ट के बाद हुई जांच
कंपनी को कुछ कर्मचारियों की जानकारी संभावित रूप से लीक होने को लेकर थ्रेट-इंटेलिजेंस अलर्ट प्राप्त हुए थे। इसके बाद TCS ने मामले की जांच शुरू की। साइबर सुरक्षा से जुड़े मामलों में ऐसे अलर्ट को गंभीरता से लिया जाता है, क्योंकि इनके जरिए संभावित डेटा लीक या किसी संगठन के सिस्टम को निशाना बनाए जाने की जानकारी मिल सकती है।
TCS ने जांच के बाद कहा कि उसे अपने सिस्टम या कस्टमर एनवायरनमेंट में सेंध का कोई ठोस सबूत नहीं मिला। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि जिस जानकारी का उल्लेख किया गया है, वह काफी पुरानी है।
इससे संकेत मिलता है कि कथित तौर पर सामने आई जानकारी किसी हालिया साइबर हमले में हासिल की गई हो, ऐसा साबित करने वाला कोई ठोस प्रमाण कंपनी को नहीं मिला है।
केवल कर्मचारियों की बेसिक जानकारी का दावा
TCS के अनुसार, जिस डेटा का उल्लेख किया जा रहा है, उसमें केवल कर्मचारियों की बेसिक जानकारी शामिल है। कंपनी ने कहा कि यह जानकारी चार साल से ज्यादा पुरानी लगती है।
कंपनी के लिए यह स्पष्टीकरण महत्वपूर्ण है, क्योंकि किसी आईटी कंपनी से जुड़े डेटा में कर्मचारियों की सामान्य जानकारी के अलावा ग्राहकों से संबंधित संवेदनशील डेटा और कंपनी के आंतरिक सिस्टम की जानकारी भी हो सकती है।
TCS ने स्पष्ट किया कि जांच में ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है कि ग्राहक डेटा प्रभावित हुआ है। इसी तरह ग्राहकों के सिस्टम या कंपनी के ऑपरेशनल सिस्टम पर भी असर पड़ने का कोई प्रमाण नहीं मिला।
कस्टमर डेटा पर असर नहीं
TCS ने अपने बयान में सबसे महत्वपूर्ण बात यह कही कि ग्राहक डेटा, कस्टमर सिस्टम और ऑपरेशनल सिस्टम पर किसी तरह के असर का कोई संकेत नहीं मिला है।
एक वैश्विक आईटी सर्विस कंपनी के लिए यह पहलू बेहद महत्वपूर्ण है। TCS दुनिया के विभिन्न हिस्सों में बड़ी संख्या में ग्राहकों को आईटी और डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराती है। ऐसे में उसके सिस्टम से जुड़ी किसी भी साइबर सुरक्षा घटना का असर व्यापक हो सकता है।
कंपनी के बयान से फिलहाल यह स्पष्ट है कि जांच के दौरान ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला, जिससे ग्राहकों से संबंधित सिस्टम या डेटा के प्रभावित होने की पुष्टि हो।
हमलावर ने बताए ये तरीके
कंपनी के मुताबिक, हमलावर ने दावा किया है कि उसने कथित हमले के लिए ‘पासवर्ड स्प्रे’ और ‘मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (MFA) फटीग’ जैसे तरीकों का इस्तेमाल किया।
पासवर्ड स्प्रे एक ऐसा साइबर हमला तरीका है, जिसमें हमलावर किसी एक खाते पर बार-बार अलग-अलग पासवर्ड आजमाने के बजाय कई खातों पर आम या अनुमानित पासवर्ड आजमाता है। इसका उद्देश्य किसी एक उपयोगकर्ता का अकाउंट हासिल करना हो सकता है।
वहीं MFA फटीग में हमलावर बार-बार मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन के अनुरोध भेजकर उपयोगकर्ता को परेशान या भ्रमित करने की कोशिश कर सकता है, ताकि वह गलती से किसी अनुरोध को मंजूरी दे दे। ऐसे हमलों में यूजर की सतर्कता और मजबूत सुरक्षा प्रक्रियाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
कंपनी ने सुरक्षा स्थिति स्पष्ट की
TCS ने अपने नियामकीय खुलासे के जरिए यह बताने की कोशिश की है कि कंपनी ने अलर्ट मिलने के बाद मामले को नजरअंदाज नहीं किया, बल्कि जांच की। जांच के बाद उसे अपने सिस्टम या ग्राहकों के वातावरण में सेंध का कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला।
कंपनी का कहना है कि कथित तौर पर लीक जानकारी पुरानी है और उसमें कर्मचारियों की सामान्य जानकारी ही शामिल है। इसके अलावा ग्राहक डेटा और कंपनी के ऑपरेशनल सिस्टम के सुरक्षित होने की बात भी कही गई है।
साइबर सुरक्षा को लेकर बढ़ती चुनौती
आईटी कंपनियां लगातार साइबर हमलों और डेटा चोरी की कोशिशों के निशाने पर रहती हैं। बड़ी संख्या में कर्मचारियों, ग्राहकों और डिजिटल सिस्टम के साथ काम करने वाली कंपनियों के लिए साइबर सुरक्षा एक महत्वपूर्ण चुनौती बन चुकी है।
पासवर्ड आधारित हमलों के साथ-साथ मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन को निशाना बनाने वाले तरीकों ने भी कंपनियों के लिए नई चुनौतियां पैदा की हैं। ऐसे में केवल तकनीकी सुरक्षा व्यवस्था ही नहीं, बल्कि कर्मचारियों को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक रखना भी जरूरी हो गया है।
TCS के मामले में भी हमलावर द्वारा पासवर्ड स्प्रे और MFA फटीग जैसे तरीकों का दावा किया गया है। हालांकि कंपनी ने जांच के बाद किसी वास्तविक सिस्टम सेंध की पुष्टि नहीं की है।
पुराना डेटा होने से बदला मामला
कंपनी द्वारा दी गई जानकारी में डेटा की उम्र को भी प्रमुखता दी गई है। TCS के मुताबिक, जिस जानकारी का उल्लेख किया गया है, वह चार साल से अधिक पुरानी प्रतीत होती है।
किसी पुराने डेटा के सामने आने और किसी ताजा साइबर सेंध के बीच अंतर करना महत्वपूर्ण है। कंपनी की जांच में फिलहाल ऐसा कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला है, जिससे यह साबित हो कि हाल में उसके सिस्टम को हैक किया गया या ग्राहकों की संवेदनशील जानकारी तक अनधिकृत पहुंच बनाई गई।
जांच के बाद कंपनी का रुख
TCS ने अपने बयान के जरिए निवेशकों और ग्राहकों को भरोसा दिलाने की कोशिश की है कि जांच के दौरान उसके सिस्टम और कस्टमर एनवायरनमेंट में सेंध का कोई ठोस सबूत नहीं मिला। कंपनी ने यह भी कहा कि कथित जानकारी में केवल कर्मचारियों की बुनियादी और पुरानी जानकारी शामिल है।
फिलहाल कंपनी के सामने मुख्य चुनौती साइबर सुरक्षा को लेकर सतर्कता बनाए रखने की है। थ्रेट-इंटेलिजेंस अलर्ट मिलने के बाद की गई जांच ने संभावित जोखिम की पहचान और उसकी समीक्षा में मदद की है।
कंपनी के अनुसार, मौजूदा जांच में कस्टमर डेटा, कस्टमर सिस्टम या TCS के ऑपरेशनल सिस्टम पर असर का कोई संकेत नहीं मिला है। ऐसे में फिलहाल मामला संभावित डेटा लीक के दावे और उसकी जांच तक सीमित दिखाई देता है, जबकि कंपनी की ओर से सिस्टम सेंध की पुष्टि नहीं की गई है।





