
New Delhi नई दिल्ली : नीति आयोग ने मंगलवार को जारी अपनी ‘ट्रेड वॉच क्वार्टरली’ की आठवीं रिपोर्ट में भारत की फार्मास्युटिकल सप्लाई चेन को लेकर महत्वपूर्ण खुलासा किया है। रिपोर्ट के अनुसार, देश की दवा निर्माण व्यवस्था महत्वपूर्ण एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स (APIs), मुख्य शुरुआती मटीरियल (KSMs) और इंटरमीडिएट्स के लिए बड़ी हद तक चीन से आयात पर निर्भर है। आयोग ने बताया कि यह निर्भरता लगभग 65 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है, जो भारत की फार्मा इंडस्ट्री के लिए एक बड़ी चुनौती मानी जा रही है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि विशेष रूप से फर्मेंटेशन-आधारित उत्पादों के लिए भारत चीन पर अत्यधिक निर्भर है। यह स्थिति न केवल सप्लाई चेन को प्रभावित करती है, बल्कि वैश्विक स्तर पर किसी भी व्यवधान की स्थिति में भारत की दवा उपलब्धता पर भी असर डाल सकती है। नीति आयोग ने इसे सप्लाई चेन और सस्टेनेबिलिटी से जुड़ी एक गंभीर चुनौती बताया है।
आयोग ने अपनी रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया है कि भारत में पर्यावरण से जुड़े नियमों का पालन करने की बढ़ती आवश्यकताओं के कारण मैन्युफैक्चरिंग और रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) की लागत में लगातार वृद्धि हुई है। इसके चलते घरेलू फार्मा कंपनियों पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव बढ़ा है, जिससे उनकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता प्रभावित हो रही है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत का इनोवेशन और कमर्शियलाइजेशन इकोसिस्टम अभी कमजोर स्थिति में है। इसके कारण नए इनोवेटर्स और लंबे समय के निवेशकों के लिए अनिश्चितता बनी रहती है। नीति आयोग ने इस स्थिति को देश के फार्मा सेक्टर के विकास में एक बड़ी बाधा के रूप में चिन्हित किया है।
आयोग के अनुसार, भारत को अब उच्च मूल्य वाले फार्मास्युटिकल सेगमेंट्स में विविधता लाने की दिशा में काम करना होगा। रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि देश को केवल जेनेरिक दवाओं तक सीमित न रहकर नवाचार आधारित उत्पादों की ओर भी ध्यान केंद्रित करना चाहिए, जिससे वैश्विक बाजार में भारत की स्थिति और मजबूत हो सके।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पेटेंट कमर्शियलाइजेशन, रिसर्च सहयोग और स्टार्टअप इनक्यूबेशन को तेज करने के लिए लाइफ-साइंसेस क्लस्टर्स में नियामकीय पारदर्शिता बढ़ाना जरूरी है। साथ ही, उद्योग और अकादमिक संस्थानों के बीच टेक्नोलॉजी ट्रांसफर को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया है।
नीति आयोग ने यह भी संकेत दिया कि यदि भारत को फार्मा सेक्टर में आत्मनिर्भरता बढ़ानी है, तो सप्लाई चेन में विविधता लाने के साथ-साथ घरेलू उत्पादन क्षमता को भी मजबूत करना होगा। इसके लिए नीति स्तर पर सुधार और निवेश को प्रोत्साहित करने की जरूरत है।
विशेषज्ञों का मानना है कि चीन पर अत्यधिक निर्भरता भारत की दवा उद्योग के लिए रणनीतिक जोखिम पैदा करती है, खासकर वैश्विक आपूर्ति बाधाओं या भू-राजनीतिक तनाव के समय। ऐसे में घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना और वैकल्पिक सप्लाई स्रोत विकसित करना बेहद आवश्यक है।
रिपोर्ट के निष्कर्षों ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया है कि भारत को फार्मा सेक्टर में दीर्घकालिक रणनीति के तहत काम करने की जरूरत है, जिसमें अनुसंधान, नवाचार और उत्पादन क्षमता तीनों पर समान रूप से ध्यान दिया जाए।
फिलहाल, नीति आयोग की इस रिपोर्ट ने दवा उद्योग से जुड़े नीति निर्माताओं और उद्योग जगत के बीच नई बहस को जन्म दे दिया है, जिसमें आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने के लिए ठोस कदमों की मांग की जा रही है।





