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अगले 12 महीनों में निफ्टी 27,958 के स्तर को छू सकता है: रिपोर्ट
jantaserishta.com
25 Feb 2026 5:42 PM IST

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नई दिल्ली: भारतीय शेयर बाजार में रिकवरी के शुरुआती संकेत मिल रहे हैं और बेस केस सिनारियो में निफ्टी अगले 12 महीनों में 27,958 के स्तर को छू सकता है। यह जानकारी बुधवार को जारी हुई एक रिपोर्ट में दी गई।
पीएल कैपिटल की रिपोर्ट में कहा गया है कि 20 गुना फॉरवर्ड अर्निंग्स मल्टीपल का बुलिश सिनारियो निफ्टी के 30,497 के छूने का संकेत देता है, जबकि बेयरिश सिनारियो में निफ्टी 26,486 के स्तर पर रहता है। बेस केस सिनारियो का मतलब बाजार में सामान्य स्थिति, बुलिश सिनारियो का मतलब तेजी और बेयरिश सिनारियो का अर्थ कमजोरी के रुझान से है।
कंपनी ने कहा कि प्रति शेयर आय (ईपीएस) में 3.8 प्रतिशत की वृद्धि की उम्मीद है और वित्त वर्ष 2026-28 के दौरान अनुमानित 16.3 प्रतिशत सीएजीआर के साथ मध्यम अवधि में आय का रुझान मजबूत बना हुआ है।
रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि कंपनियों का प्रदर्शन मजबूत बना हुआ है, जिसमें बिक्री, ईबीआईटीडीए और कर पश्चात लाभ में क्रमशः 9.9 प्रतिशत, 16.4 प्रतिशत और 16.7 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि हुई है।
रिपोर्ट में कहा गया, “नीतिगत स्पष्टता, ऐतिहासिक व्यापार समझौतों और बुनियादी ढांचे के निरंतर विकास के चलते भारत की विकास गाथा निर्णायक दौर में प्रवेश कर रही है, जिससे विस्तार के अगले चरण की नींव रखी जा रही है।”
इसमें आगे कहा गया है कि बाजार में लंबे समय से चल रहे समेकन का दौर अब नए सिरे से आशावाद का द्वार खोलता दिख रहा है और हालिया आय विश्लेषण में बदलाव के बावजूद संरचनात्मक कारक मजबूती से अपनी जगह पर बने हुए हैं।
पीएल कैपिटल के संस्थागत इक्विटी अनुसंधान निदेशक, अम्निश अग्रवाल ने कहा, “भारत चक्रीय सुधार के दौर से निकलकर संरचनात्मक रूप से मजबूत विकास पथ की ओर अग्रसर है।” अग्रवाल ने आगे कहा, “जैसे-जैसे पूंजी निर्माण में तेजी आ रही है और उत्पादकता में सुधार हो रहा है, हमारा मानना है कि भारतीय शेयर बाजार बहुवर्षीय चक्रवृद्धि वृद्धि के प्रारंभिक चरण में प्रवेश कर रहा है।”
रिपोर्ट में भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते पर कहा गया है कि भारत की व्यापार कूटनीति में हुई तीव्र प्रगति अगले विकास चक्र के लिए एक निर्णायक उत्प्रेरक रही है। वस्त्र और परिधान, समुद्री उत्पाद, चमड़ा और जूते, रत्न और आभूषण, रसायन, मशीनरी और विद्युत उपकरण जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को इससे काफी लाभ होने की संभावना है।
फर्म ने कहा कि समुद्री निर्यात, चमड़े के उत्पाद और रत्न - जो रोजगार सृजन के महत्वपूर्ण स्रोत हैं - की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है। फर्म ने आगे कहा कि पूंजीगत वस्तु और इंजीनियरिंग कंपनियां अवसंरचना और रक्षा क्षेत्र में आई तेजी का लाभ उठा सकती हैं।
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