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शेयर बाजार में हाहाकार!
मुंबई: भारतीय शेयर बाजार में दो नवरात्रियों के बीच निफ्टी में करीब 11 प्रतिशत की गिरावट की खबर ने निवेशकों का ध्यान खींचा है। वैश्विक बाजारों से जुड़े दबाव के बीच शेयरों में कमजोरी देखने को मिली है। बाजार में गिरावट का असर केवल प्रमुख सूचकांक तक सीमित नहीं रहा, बल्कि 31 शेयरों में भारी गिरावट का दावा भी सामने आया है।
शेयर बाजार में इस तरह की गिरावट निवेशकों के लिए चिंता का विषय बन सकती है। विशेष रूप से उन निवेशकों पर इसका असर पड़ता है, जिन्होंने ऊंचे स्तर पर शेयर खरीदे हैं। हालांकि, किसी शेयर में गिरावट होने का मतलब यह नहीं है कि सभी निवेशकों को समान नुकसान हुआ है। वास्तविक लाभ या नुकसान शेयर के खरीद मूल्य और बिक्री के समय पर निर्भर करता है।
ग्लोबल दबाव ने बढ़ाई बाजार की मुश्किलें
नवरात्रि 2025 से नवरात्रि 2026 के बीच भारतीय शेयर बाजार के प्रदर्शन पर वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों का गहरा असर पड़ा। अमेरिका-ईरान संघर्ष, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और रुपये की कमजोरी ने बाजार पर दबाव बनाया। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की लगातार बिकवाली भी गिरावट का प्रमुख कारण रही। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, विदेशी निवेशकों ने 2026 में अब तक भारतीय शेयर बाजार से लगभग 3.04 लाख करोड़ रुपये निकाले हैं। इससे पहले 2025 में भी करीब 1.66 लाख करोड़ रुपये की निकासी हुई थी।
आईटीसी, इंफोसिस और टीसीएस में बड़ी गिरावट
निफ्टी के 50 शेयरों में से 31 ने इस अवधि में नकारात्मक रिटर्न दिया। आईटीसी, टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स, इंफोसिस, जियो फाइनेंशियल सर्विसेज और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज के शेयरों में 30 प्रतिशत से अधिक गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा एचडीएफसी लाइफ, मारुति सुजुकी, एचडीएफसी बैंक, हिंदुस्तान यूनिलीवर, मैक्स हेल्थकेयर और महिंद्रा एंड महिंद्रा के शेयरों में 22 से 29 प्रतिशत तक कमजोरी रही। निफ्टी के लगभग 20 शेयरों में 12 प्रतिशत से अधिक गिरावट दर्ज की गई। इससे स्पष्ट होता है कि बाजार की कमजोरी कई प्रमुख कंपनियों तक फैली रही।
गिरते बाजार में भी कुछ शेयरों ने दिया अच्छा रिटर्न
बाजार में व्यापक गिरावट के बावजूद कुछ कंपनियों के शेयरों ने सकारात्मक प्रदर्शन किया। श्रीराम फाइनेंस के शेयरों में लगभग 49 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। टाइटन कंपनी, अदाणी पोर्ट्स और हिंडाल्को इंडस्ट्रीज के शेयरों में 21 से 27 प्रतिशत तक तेजी देखने को मिली। वहीं नेस्ले इंडिया, भारतीय स्टेट बैंक और एक्सिस बैंक के शेयरों ने भी 10 प्रतिशत से अधिक बढ़त दर्ज की। इससे पता चलता है कि कमजोर बाजार में भी अलग-अलग कंपनियों के शेयरों का प्रदर्शन एक जैसा नहीं रहा।
घरेलू निवेशकों की खरीदारी से मिला सहारा
विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली के बीच घरेलू संस्थागत निवेशकों ने भारतीय बाजार में खरीदारी जारी रखी। सितंबर 2026 में विदेशी संस्थागत निवेशकों ने करीब 39,660 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने लगभग 76,030 करोड़ रुपये की खरीदारी की। घरेलू खरीदारी के बावजूद वैश्विक परिस्थितियों का दबाव इतना अधिक रहा कि निफ्टी सितंबर में लगभग 6.1 प्रतिशत गिर गया।
आगे कैसी रहेगी शेयर बाजार की चाल?
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले समय में कच्चे तेल की कीमतें, वैश्विक बॉन्ड यील्ड, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और कंपनियों के तिमाही नतीजे महत्वपूर्ण रहेंगे।सितंबर तिमाही में निफ्टी 50 कंपनियों के मुनाफे में सालाना आधार पर लगभग 20 प्रतिशत बढ़ोतरी का अनुमान लगाया गया है। हालांकि, कंपनियों का प्रदर्शन अलग-अलग क्षेत्रों में भिन्न रह सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि निकट भविष्य में बाजार सीमित दायरे में कारोबार कर सकता है। वैश्विक अनिश्चितता बनी रहने पर उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। नवरात्रि 2025 से नवरात्रि 2026 के बीच निफ्टी की लगभग 11 प्रतिशत गिरावट यह दिखाती है कि घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूती के बावजूद वैश्विक घटनाक्रम भारतीय शेयर बाजार को प्रभावित कर सकते हैं।
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