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नई दिल्ली। घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए आधार आधारित बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन यानी e-KYC को लेकर महत्वपूर्ण बदलाव सामने आया है। जिन उपभोक्ताओं ने अब तक अपना बायोमेट्रिक आधार ऑथेंटिकेशन (BAA) पूरा नहीं किया है, उनके लिए सिलेंडर और सब्सिडी की सुविधा प्रभावित हो सकती है। 19 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक तेल विपणन कंपनियों ने वितरकों को ऐसे घरेलू कनेक्शनों पर आगे रिफिल रोकने के निर्देश दिए हैं, जिनका बायोमेट्रिक सत्यापन लंबित है। ऑथेंटिकेशन पूरा होने के बाद कनेक्शन दोबारा सक्रिय किया जा सकेगा।
हालांकि इसे अक्टूबर से सभी एलपीजी ग्राहकों पर लागू होने वाला बिल्कुल नया नियम समझना सही नहीं होगा। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने मार्च 2026 में स्पष्ट किया था कि बायोमेट्रिक आधार ऑथेंटिकेशन की व्यवस्था पहले से चल रही है और जिन गैर-PMUY ग्राहकों ने इसे पहले ही पूरा कर लिया है, उन्हें दोबारा e-KYC कराने की जरूरत नहीं है। उस समय मंत्रालय ने यह भी कहा था कि यह कोई नया निर्देश नहीं है।
अब सितंबर में सामने आई जानकारी के मुताबिक सरकार सत्यापन पूरा नहीं करने वाले ग्राहकों को लेकर व्यवस्था और सख्त कर रही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 14 सितंबर तक करीब **3.16 करोड़ घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं** का बायोमेट्रिक आधार ऑथेंटिकेशन पूरा नहीं हुआ था। इससे पहले 1 सितंबर को जारी पत्र में 14 सितंबर तक प्रक्रिया पूरी करने की समयसीमा दी गई थी।
क्यों जरूरी किया गया बायोमेट्रिक सत्यापन
सरकार का कहना है कि आधार आधारित प्रमाणीकरण का उद्देश्य सरकारी सब्सिडी सही और पात्र लाभार्थी तक पहुंचाना है। इससे डुप्लीकेट या फर्जी कनेक्शनों की पहचान करने और घरेलू एलपीजी के गलत इस्तेमाल को रोकने में मदद मिलती है।
पेट्रोलियम मंत्रालय पहले भी बता चुका है कि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर यानी DBT योजनाओं में आधार प्रमाणीकरण से लाभार्थी की पहचान और डुप्लीकेट रिकॉर्ड हटाने में मदद मिलती है। सरकार ने अक्टूबर 2023 में ही सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों को PMUY और PAHAL लाभार्थियों का बायोमेट्रिक आधार ऑथेंटिकेशन पूरा करने के निर्देश दिए थे।
इसका मतलब है कि बायोमेट्रिक e-KYC की प्रक्रिया 2026 में अचानक शुरू नहीं हुई है। पिछले कुछ वर्षों से इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी तेल विपणन कंपनियां अपने एलपीजी ग्राहकों का आधार आधारित प्रमाणीकरण कर रही हैं।
किन लोगों को कराना होगा e-KYC
सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि आखिर किन उपभोक्ताओं को अब बायोमेट्रिक आधार ऑथेंटिकेशन पूरा करना होगा। सरकार के मार्च 2026 के स्पष्टीकरण के मुताबिक यह आवश्यकता उन एलपीजी ग्राहकों के लिए है, जिनका ऑथेंटिकेशन अभी तक पूरा नहीं हुआ है।
अगर कोई सामान्य घरेलू यानी गैर-PMUY उपभोक्ता पहले ही अपना बायोमेट्रिक e-KYC करा चुका है तो उसे वही प्रक्रिया दोबारा करने की जरूरत नहीं है।
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना यानी PMUY के लाभार्थियों के लिए नियम अलग हैं। सरकार के स्पष्टीकरण के अनुसार PMUY ग्राहकों को प्रत्येक वित्त वर्ष में एक बार प्रमाणीकरण करना होता है और इसका संबंध सात रिफिल के बाद आठवें और नौवें रिफिल पर मिलने वाली लक्षित DBT सब्सिडी से है।
नए PMUY कनेक्शन के लिए भी बायोमेट्रिक आधार ऑथेंटिकेशन जरूरी है। उज्ज्वला योजना की आधिकारिक वेबसाइट के FAQ में स्पष्ट किया गया है कि PMUY के तहत कनेक्शन के लिए बायोमेट्रिक आधार प्रमाणीकरण अनिवार्य है और इसे तेल विपणन कंपनी का एलपीजी वितरक पूरा करता है।
e-KYC नहीं कराने पर क्या होगा
सितंबर में सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक बायोमेट्रिक आधार ऑथेंटिकेशन पूरा नहीं करने वाले ग्राहकों के लिए अब नियम कड़े किए जा रहे हैं। तेल कंपनियों को भेजे गए निर्देश में ऐसे ग्राहकों के आगे के एलपीजी रिफिल ब्लॉक करने की बात कही गई है। ग्राहक जैसे ही प्रमाणीकरण पूरा करेगा, उसका कनेक्शन फिर सक्रिय किया जा सकेगा और वह लागू नियमों के मुताबिक सिलेंडर तथा पात्र सब्सिडी प्राप्त कर सकेगा।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बिना BAA वाले ग्राहकों के स्पष्ट सब्सिडी लाभ, जिनमें DBTL और लक्षित सब्सिडी शामिल हैं, 1 जुलाई से रोक दिए गए थे। इसके बावजूद वे नियंत्रित खुदरा मूल्य पर सिलेंडर ले पा रहे थे। अब सरकार ने 100 प्रतिशत बायोमेट्रिक अनुपालन की दिशा में आगे कदम बढ़ाया है।
यह स्थिति सरकार के पुराने रुख से आगे का कदम है। जुलाई 2024 में मंत्रालय ने कहा था कि जिन ग्राहकों का बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन पूरा नहीं हुआ था, उनकी कोई सेवा या लाभ उस समय बंद नहीं किया गया था।
इसलिए पुराने और नए निर्देशों में अंतर समझना जरूरी है। उपभोक्ताओं को अपने कनेक्शन की मौजूदा स्थिति अपनी तेल कंपनी या वितरक से जांच लेनी चाहिए।
घर बैठे भी हो सकता है आधार ऑथेंटिकेशन
उपभोक्ताओं को e-KYC कराने के लिए हर स्थिति में गैस एजेंसी के कार्यालय जाने की जरूरत नहीं है। सरकार ने इसके लिए कई विकल्प उपलब्ध कराए हैं।
एलपीजी सिलेंडर की डिलीवरी के दौरान डिलीवरी कर्मचारी के माध्यम से बायोमेट्रिक आधार ऑथेंटिकेशन कराया जा सकता है। दूसरा विकल्प अपने एलपीजी वितरक के शोरूम पर जाकर प्रक्रिया पूरी करने का है। इसके अलावा संबंधित तेल विपणन कंपनी के मोबाइल ऐप के जरिए भी प्रमाणीकरण की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।
मार्च 2026 में मंत्रालय ने उपभोक्ताओं को बताया था कि वे अपनी ऑयल मार्केटिंग कंपनी के मोबाइल ऐप और Aadhaar FaceRD ऐप के जरिए घर बैठे भी सत्यापन कर सकते हैं। इस सुविधा का उद्देश्य गैस एजेंसियों पर भीड़ कम करना और ग्राहकों को आसानी से e-KYC पूरी करने का विकल्प देना है।
सब्सिडी के लिए आधार क्यों महत्वपूर्ण
सरकार PAHAL यानी प्रत्यक्ष हस्तांतरित लाभ योजना के जरिए पात्र उपभोक्ताओं की एलपीजी सब्सिडी बैंक खाते में भेजती है। आधार आधारित सत्यापन से यह सुनिश्चित करने में मदद मिलती है कि सरकारी लाभ वास्तविक ग्राहक तक ही पहुंचे।
सरकार ने अगस्त 2025 में राज्यसभा में बताया था कि डुप्लीकेट एलपीजी कनेक्शनों की पहचान के लिए आधार नंबर, बैंक खाते, राशन कार्ड, नाम और पते जैसी जानकारियों का इस्तेमाल किया जाता है। उस समय सरकार ने बताया था कि चार करोड़ से ज्यादा डुप्लीकेट एलपीजी कनेक्शन निष्क्रिय किए जा चुके हैं।
इसी व्यवस्था में बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन को एक अतिरिक्त सत्यापन के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। सरकार के मुताबिक इसका उद्देश्य सब्सिडी व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाना और सरकारी धन का दुरुपयोग रोकना है।
उज्ज्वला लाभार्थियों के लिए खास ध्यान जरूरी
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के लिए e-KYC विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि योजना के तहत मिलने वाली लक्षित सब्सिडी पात्रता से जुड़ी होती है। आधिकारिक PMUY वेबसाइट भी बायोमेट्रिक आधार ऑथेंटिकेशन को योजना के लिए अनिवार्य बताती है।
ऐसे में जिन उज्ज्वला लाभार्थियों का सत्यापन लंबित है, उन्हें अपने वितरक या संबंधित तेल कंपनी से इसकी स्थिति जांच लेनी चाहिए। मोबाइल ऐप से प्रक्रिया उपलब्ध होने की स्थिति में घर से भी इसे पूरा किया जा सकता है।
अक्टूबर से नियम बदलने वाली बात कितनी सही?
उपभोक्ताओं के लिए यहां एक जरूरी तथ्य समझना आवश्यक है। ‘अक्टूबर से सभी के लिए पहली बार बायोमेट्रिक आधार अनिवार्य’ कहना पूरी तरह सही नहीं है। सरकार ने बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण की प्रक्रिया अक्टूबर 2023 में ही शुरू कर दी थी और मार्च 2026 में स्पष्ट किया था कि पहले से सत्यापित गैर-PMUY उपभोक्ताओं को दोबारा e-KYC कराने की जरूरत नहीं है।
सितंबर 2026 में सामने आया नया घटनाक्रम यह है कि जिन घरेलू ग्राहकों ने अब तक BAA पूरा नहीं किया है, उनके रिफिल को ब्लॉक करने की दिशा में सख्ती की जा रही है। इसलिए अक्टूबर आने का इंतजार करने के बजाय लंबित e-KYC वाले ग्राहकों के लिए सत्यापन जल्द पूरा करना ज्यादा महत्वपूर्ण है।
कुल मिलाकर घरेलू एलपीजी ग्राहकों को सबसे पहले यह जांचना चाहिए कि उनका बायोमेट्रिक आधार ऑथेंटिकेशन पहले से पूरा है या नहीं। यदि e-KYC हो चुकी है तो सामान्य गैर-PMUY ग्राहक को इसे दोबारा कराने की जरूरत नहीं है। लेकिन जिनका प्रमाणीकरण लंबित है, उनके लिए अब इसे पूरा करना जरूरी हो गया है, क्योंकि सब्सिडी के साथ सिलेंडर रिफिल की सुविधा भी प्रभावित हो सकती है।
ऐसे में किसी वायरल मैसेज या अधूरी जानकारी पर भरोसा करने के बजाय उपभोक्ताओं को अपनी संबंधित तेल कंपनी, एलपीजी वितरक या पेट्रोलियम मंत्रालय की आधिकारिक जानकारी से अपने कनेक्शन की स्थिति सत्यापित करनी चाहिए।
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