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UPI का नया रिकॉर्ड, रोजाना 1 लाख करोड़ का लेनदेन

Rajeshwari Nishad
1 Nov 2026 2:41 PM IST
UPI का नया रिकॉर्ड, रोजाना 1 लाख करोड़ का लेनदेन
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बिज़नेस : भारत में डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। छोटी दुकानों से लेकर बड़े शोरूम, ऑनलाइन खरीदारी, होटल और रेस्टोरेंट तक अब लोग भुगतान के लिए यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) का जमकर इस्तेमाल कर रहे हैं। इसका असर अक्टूबर 2026 के आंकड़ों में भी दिखाई दिया है। त्योहारी सीजन के दौरान यूपीआई ने लेनदेन के मामले में अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड बना दिया है। अक्टूबर में पहली बार यूपीआई के जरिए औसतन प्रतिदिन 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक का लेनदेन हुआ। पूरे महीने में कुल लेनदेन का मूल्य बढ़कर 31.53 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया।

नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर में यूपीआई के जरिए कुल 25.47 अरब यानी 2,547 करोड़ लेनदेन किए गए। यह पिछले साल अक्टूबर की तुलना में करीब 23 प्रतिशत अधिक है। वहीं, लेनदेन की कुल रकम में सालाना आधार पर लगभग 16 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। खास बात यह है कि यूपीआई ने पहली बार एक महीने में 30 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को भी पार कर लिया है।
रोजाना 1.01 लाख करोड़ रुपये का हुआ लेनदेन
अक्टूबर के दौरान यूपीआई का औसत दैनिक ट्रांजेक्शन मूल्य लगभग 1,01,707 करोड़ रुपये रहा। यानी देश में हर दिन यूपीआई के जरिए एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का भुगतान किया गया। इससे पहले सितंबर 2026 में औसत दैनिक लेनदेन मूल्य लगभग 97,913 करोड़ रुपये था।
इस तरह अक्टूबर में डिजिटल भुगतान के दैनिक मूल्य में भी नया रिकॉर्ड बना। दूसरी तरफ औसतन रोजाना करीब 82.2 करोड़ यूपीआई ट्रांजेक्शन किए गए। सितंबर में यह आंकड़ा लगभग 80.2 करोड़ प्रतिदिन था। इससे पता चलता है कि केवल बड़े भुगतानों में ही नहीं, बल्कि रोजमर्रा के छोटे-बड़े डिजिटल लेनदेन में भी यूपीआई का इस्तेमाल बढ़ रहा है।
अक्टूबर में यूपीआई के जरिए कुल 31.53 लाख करोड़ रुपये का भुगतान हुआ, जबकि सितंबर में यह आंकड़ा 29.37 लाख करोड़ रुपये था। यानी एक महीने के भीतर कुल लेनदेन मूल्य में लगभग 7.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।
त्योहारी खरीदारी ने बढ़ाया डिजिटल भुगतान
अक्टूबर में नवरात्रि, दुर्गा पूजा और दशहरा जैसे त्योहारों के कारण बाजारों में खरीदारी की गतिविधियां तेज रहीं। इसके अलावा ऑनलाइन शॉपिंग कंपनियों की फेस्टिव सेल और दिवाली की तैयारियों ने भी बाजार में लेनदेन बढ़ाया। लोगों ने कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल फोन, घरेलू सामान, मिठाइयां और अन्य जरूरी वस्तुओं की खरीदारी के लिए डिजिटल भुगतान का इस्तेमाल किया।
त्योहारी सीजन में बाजारों में भीड़ बढ़ने के साथ यूपीआई के जरिए भुगतान करना लोगों की पसंद बना रहा। छोटी दुकानों पर लगे क्यूआर कोड से लेकर बड़े शोरूम के डिजिटल पेमेंट काउंटर तक यूपीआई की सुविधा उपलब्ध रही। इससे नकदी रखने और छुट्टे पैसे की परेशानी भी कम हुई।
हालांकि, अक्टूबर में लेनदेन बढ़ने का पूरा श्रेय केवल त्योहारी खरीदारी को नहीं दिया जा सकता। रोजमर्रा के भुगतानों, ऑनलाइन सेवाओं और डिजिटल बैंकिंग के बढ़ते इस्तेमाल ने भी इसमें योगदान दिया।
UPI शुल्क लागू करने का फैसला दिवाली तक टला
अक्टूबर में डिजिटल पेमेंट का रिकॉर्ड ऐसे समय में बना, जब यूपीआई लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने को लेकर चर्चा चल रही थी। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत कुछ निर्धारित श्रेणी के बड़े मर्चेंट ट्रांजेक्शन पर शुल्क लगाने की योजना थी।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, पहले इस व्यवस्था को 15 अक्टूबर से लागू करने की तैयारी थी, लेकिन NPCI ने इसका कार्यान्वयन दिवाली के बाद तक टाल दिया। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया, जब बाजार में त्योहारी खरीदारी अपने चरम पर थी।
व्यापारी संगठनों और पेमेंट कंपनियों की ओर से भी इस व्यवस्था को लागू करने के समय और शुल्क की दरों को लेकर चिंता जाहिर की गई थी। उनका मानना था कि त्योहारों के बीच नई व्यवस्था लागू होने से व्यापारियों और पेमेंट सिस्टम से जुड़े कारोबार पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
हालांकि, यहां यह समझना जरूरी है कि प्रस्तावित MDR शुल्क का संबंध निर्धारित श्रेणी के मर्चेंट भुगतानों से है। इसका मतलब यह नहीं है कि आम ग्राहकों से हर यूपीआई भुगतान पर शुल्क वसूला जाने लगा है। सरकार ने भी स्पष्ट किया है कि सामान्य उपभोक्ताओं के यूपीआई भुगतान और व्यक्ति से व्यक्ति के बीच होने वाले ट्रांजेक्शन पर शुल्क नहीं लगाया जाएगा।
सितंबर और अक्टूबर के आंकड़ों में कितना अंतर?
यूपीआई के आंकड़ों पर नजर डालें तो सितंबर के मुकाबले अक्टूबर में लेनदेन के मूल्य और संख्या दोनों में बढ़ोतरी हुई है।
अक्टूबर में कुल ट्रांजेक्शन: 25.47 अरब
कुल लेनदेन मूल्य: 31.53 लाख करोड़ रुपये
औसत दैनिक लेनदेन: करीब 82.2 करोड़
औसत दैनिक भुगतान मूल्य: 1,01,707 करोड़ रुपये
सितंबर का कुल लेनदेन मूल्य: 29.37 लाख करोड़ रुपये
सालाना आधार पर ट्रांजेक्शन संख्या में वृद्धि: करीब 23 प्रतिशत
सालाना आधार पर लेनदेन मूल्य में वृद्धि: करीब 16 प्रतिशत
अक्टूबर में 31 दिन होने के कारण कुल मासिक आंकड़ों पर भी इसका प्रभाव पड़ा। हालांकि, प्रतिदिन के औसत लेनदेन में भी वृद्धि दर्ज की गई है।
भारत में डिजिटल पेमेंट की बढ़ती ताकत
भारत में यूपीआई ने पिछले कुछ वर्षों में भुगतान के तरीके को काफी हद तक बदल दिया है। पहले जहां लोग नकदी या कार्ड से भुगतान करना पसंद करते थे, वहीं अब मोबाइल फोन और क्यूआर कोड के माध्यम से कुछ सेकंड में भुगतान कर सकते हैं।
यूपीआई की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इससे बैंक खाते से सीधे दूसरे बैंक खाते में पैसा भेजा जा सकता है। इसके लिए भुगतान करने वाले व्यक्ति को केवल यूपीआई ऐप और इंटरनेट या समर्थित भुगतान सुविधा की जरूरत होती है।
आज सब्जी खरीदने, किराना दुकान पर भुगतान करने, बिजली-पानी का बिल जमा करने, मोबाइल रिचार्ज कराने और ऑनलाइन खरीदारी तक में यूपीआई का इस्तेमाल हो रहा है। छोटे दुकानदारों के लिए भी इसने डिजिटल भुगतान को आसान बनाया है।
आगे भी बढ़ सकती है डिजिटल लेनदेन की रफ्तार
अक्टूबर के आंकड़े बताते हैं कि भारत में डिजिटल भुगतान का दायरा लगातार बढ़ रहा है। त्योहारों के दौरान लोगों ने जिस तरह यूपीआई का इस्तेमाल किया, उससे साफ है कि यह अब केवल ऑनलाइन खरीदारी तक सीमित नहीं रह गया है। आम लोगों के दैनिक जीवन में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका बन चुकी है।
आने वाले महीनों में शादी के सीजन, त्योहारी खरीदारी और ऑनलाइन कारोबार की गतिविधियों से डिजिटल लेनदेन में और वृद्धि की संभावना है। हालांकि, इसके साथ साइबर धोखाधड़ी और फर्जी यूपीआई लिंक जैसी चुनौतियां भी बनी हुई हैं। ऐसे में डिजिटल भुगतान के बढ़ते इस्तेमाल के साथ उपभोक्ताओं को सावधानी बरतना भी जरूरी है।
कुल मिलाकर अक्टूबर 2026 यूपीआई के लिए रिकॉर्ड तोड़ महीना साबित हुआ। 31.53 लाख करोड़ रुपये का कुल लेनदेन और प्रतिदिन एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान भारत की तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था की तस्वीर पेश करता है।
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