LPG आयात में नया कदम, 2027 से अमेरिका बनेगा बड़ा सप्लायर

नई दिल्ली : भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रहा है। केंद्र सरकार देश की रसोई गैस यानी LPG सप्लाई को अधिक सुरक्षित और स्थिर बनाने के लिए आयात स्रोतों में बदलाव की योजना पर काम कर रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत साल 2027 से अपनी कुल LPG आयात जरूरत का करीब 25 प्रतिशत हिस्सा अमेरिका से खरीदने की योजना बना रहा है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य मिडिल ईस्ट के देशों पर निर्भरता कम करना, गैस आपूर्ति को सुरक्षित बनाना और अमेरिका के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौते को आगे बढ़ाना है।
भारत दुनिया के सबसे बड़े LPG उपभोक्ताओं में शामिल है और देश में करोड़ों परिवार खाना पकाने के लिए रसोई गैस सिलेंडर का इस्तेमाल करते हैं। बढ़ती आबादी, शहरीकरण और उज्ज्वला योजना जैसी योजनाओं के विस्तार के कारण देश में LPG की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में सरकार लंबे समय से ऊर्जा आयात के लिए नए विकल्प तलाश रही है, ताकि किसी भी अंतरराष्ट्रीय संकट की स्थिति में घरेलू उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना न करना पड़े।
दरअसल, हाल के महीनों में मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ईरान से जुड़े संघर्षों के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दबाव बढ़ा है। होर्मुज जलडमरूमध्य में सप्लाई बाधित होने की आशंका ने भारत समेत कई देशों की चिंता बढ़ा दी थी। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में तेल और गैस की आवाजाही होती है। किसी भी तरह की रुकावट का सीधा असर ऊर्जा कीमतों और सप्लाई पर पड़ सकता है।
इस साल ईरान युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य में संभावित सप्लाई बाधाओं के कारण भारत को LPG आपूर्ति को लेकर चुनौतियों का सामना करना पड़ा था। स्थिति को संभालने के लिए सरकार को घरेलू उपभोक्ताओं की जरूरतों को प्राथमिकता देनी पड़ी। इसके लिए उद्योगों में इस्तेमाल होने वाले कुछ पेट्रोकेमिकल फीडस्टॉक को भी घरेलू गैस सप्लाई की ओर मोड़ना पड़ा, ताकि आम लोगों को रसोई गैस की कमी न हो।
भारत वर्तमान में LPG आयात के लिए मुख्य रूप से मिडिल ईस्ट के देशों पर निर्भर है। सऊदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात और अन्य खाड़ी देशों से बड़ी मात्रा में LPG की खरीद की जाती है। हालांकि, किसी एक क्षेत्र पर अधिक निर्भरता को ऊर्जा विशेषज्ञ जोखिम भरा मानते हैं। इसी वजह से सरकार अब अमेरिका जैसे वैकल्पिक सप्लायर के साथ अपने संबंध मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
अमेरिका में शेल गैस उत्पादन बढ़ने के बाद वहां LPG और प्राकृतिक गैस की उपलब्धता में काफी वृद्धि हुई है। भारत और अमेरिका के बीच ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग लगातार बढ़ रहा है। यदि भारत अमेरिका से LPG आयात बढ़ाता है तो इससे दोनों देशों के बीच व्यापार संतुलन को भी बेहतर करने में मदद मिल सकती है।
सरकार की इस योजना को भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की बातचीत से भी जोड़कर देखा जा रहा है। अमेरिका लंबे समय से भारत के साथ व्यापार घाटे को कम करने की बात करता रहा है। ऐसे में ऊर्जा क्षेत्र में खरीद बढ़ाने से दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
हालांकि, अमेरिका से LPG आयात बढ़ाने के लिए भारत को लॉजिस्टिक और बुनियादी ढांचे से जुड़ी चुनौतियों का भी सामना करना पड़ सकता है। लंबी दूरी से गैस परिवहन, जहाजों की उपलब्धता, बंदरगाहों की क्षमता और लागत जैसे मुद्दों पर भी ध्यान देना होगा। इसके अलावा वैश्विक बाजार में LPG की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर भी उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि LPG आयात के स्रोतों में विविधता लाना भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण कदम है। इससे किसी एक क्षेत्र में संकट आने पर देश के पास वैकल्पिक सप्लाई व्यवस्था उपलब्ध रहेगी। आने वाले वर्षों में अमेरिका के साथ ऊर्जा सहयोग बढ़ने से भारत की ऊर्जा सुरक्षा को नई दिशा मिल सकती है।
कुल मिलाकर, 2027 से अमेरिका से LPG आयात बढ़ाने की योजना भारत की लंबी अवधि की ऊर्जा रणनीति का हिस्सा है। इसका उद्देश्य केवल गैस की खरीद बढ़ाना नहीं, बल्कि भविष्य में किसी भी अंतरराष्ट्रीय संकट के दौरान देश की रसोई गैस आपूर्ति को सुरक्षित और स्थिर बनाए रखना है।





