
व्यापार | सरकार ने तेल और गैस कंपनियों को अप्रत्याशित कर (विंडफॉल टैक्स) से राहत देते हुए नए कानून में इसे शामिल नहीं करने का फैसला किया है। इससे खासतौर पर उन कंपनियों को फायदा होगा जो कच्चे तेल के निर्यात और डीजल-पेट्रोल जैसे उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय बिक्री करती हैं।
क्या है विंडफॉल टैक्स?
जब कच्चे तेल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में अचानक बढ़ जाती हैं और कंपनियों को सामान्य से अधिक लाभ होता है, तो सरकार विंडफॉल टैक्स लगाकर इस अतिरिक्त मुनाफे का एक हिस्सा वसूलती है। 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद सरकार ने इस कर को लागू किया था।
अब क्यों हटाया जा रहा है यह टैक्स?
हाल ही में तेल कीमतों में स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई चेन में सुधार के चलते सरकार ने इस टैक्स को हटाने का फैसला किया है। इससे ओएनजीसी (ONGC), रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) और अन्य पेट्रोलियम कंपनियों को सीधा फायदा मिलेगा।
कंपनियों को क्या मिलेगा फायदा?
- निर्यात में बढ़ोतरी: अब कंपनियां बिना अतिरिक्त टैक्स के अंतरराष्ट्रीय बाजार में पेट्रोल-डीजल बेच सकेंगी।
- लागत में कटौती: विंडफॉल टैक्स हटने से कंपनियों की परिचालन लागत कम होगी।
- निवेश को बढ़ावा: टैक्स हटने से तेल और गैस सेक्टर में नए निवेश आने की संभावना बढ़ेगी।
आगे क्या?
सरकार ने संकेत दिए हैं कि भविष्य में अगर तेल की कीमतों में अप्रत्याशित उछाल आता है तो विंडफॉल टैक्स को दोबारा लागू किया जा सकता है। फिलहाल, यह राहत उद्योग के लिए बड़ा सकारात्मक कदम मानी जा रही है।





