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नमो भारत ट्रेन बिजली लागत में आएगी कमी
नई दिल्ली: दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ Namo Bharat (RRTS) कॉरिडोर को अब बड़ी मात्रा में सौर ऊर्जा से चलाने की तैयारी की जा रही है। नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (NCRTC) ने 110 मेगावाट (MW) के कैप्टिव सोलर पावर प्लांट से बिजली लेने की योजना बनाई है। इस परियोजना से कॉरिडोर की करीब 60% बिजली जरूरतें पूरी होने की उम्मीद है।
110 MW सोलर प्लांट से मिलेगी बिजली
NCRTC ने NIRL NCRTC Renewables Limited के साथ सौर ऊर्जा खरीद समझौता (PPA) किया है। इस परियोजना को उत्तर प्रदेश में विकसित किया जाएगा और इससे पैदा होने वाली बिजली का इस्तेमाल Namo Bharat कॉरिडोर की संचालन जरूरतों के लिए किया जाएगा।
बिजली खर्च में आएगी कमी
इस सोलर प्रोजेक्ट से NCRTC को बिजली लागत कम करने में मदद मिलेगी। रिपोर्ट्स के अनुसार, इससे कॉरिडोर के वार्षिक बिजली खर्च में करीब 25% तक कमी आने की संभावना है।
ग्रीन ट्रांसपोर्ट को मिलेगा बढ़ावा
Namo Bharat देश की पहली सेमी हाई-स्पीड रीजनल रेल सेवा है, जो दिल्ली, गाजियाबाद और मेरठ को जोड़ती है। यह सेवा 160 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने के लिए डिजाइन की गई है।
सौर ऊर्जा के इस्तेमाल से इस कॉरिडोर का कार्बन उत्सर्जन कम होगा और सार्वजनिक परिवहन को ज्यादा पर्यावरण अनुकूल बनाने में मदद मिलेगी।
25 साल तक चलेगा ऊर्जा समझौता
सोलर परियोजना से मिलने वाली बिजली को कैप्टिव मोड में लंबे समय तक इस्तेमाल किया जाएगा। परियोजना के लिए 25 साल की अवधि का ऊर्जा खरीद समझौता किया गया है।
Namo Bharat कॉरिडोर के लिए बड़ा कदम
दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ कॉरिडोर NCR में तेज और बेहतर कनेक्टिविटी देने के लिए विकसित किया गया है। सौर ऊर्जा से जुड़ने के बाद यह परियोजना न सिर्फ परिवहन बल्कि हरित ऊर्जा के क्षेत्र में भी एक उदाहरण बन सकती है।
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