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नई दिल्ली: टाटा सन्स के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन को पांच साल का नया कार्यकाल मिल गया है। टाटा सन्स लिमिटेड के बोर्ड ने गुरुवार को उनका कार्यकाल 2032 तक बढ़ाने की मंजूरी दे दी। चंद्रशेखरन का मौजूदा कार्यकाल फरवरी 2027 में खत्म होना था, लेकिन अब वे 70 साल की उम्र तक इस पद पर रहेंगे।
नोएल टाटा की आपत्ति की बात सामने आई
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति को चुनौती दे सकते हैं। चंद्रशेखरन इस समय टाटा सन्स के दूसरे कार्यकाल में हैं। वे फरवरी 2027 में रिटायर होने वाले थे। इससे पहले 12 अगस्त 2026 को उन्होंने इस्तीफा दे दिया था। उस समय उनके तीसरे कार्यकाल को लेकर टाटा ट्रस्ट्स के साथ सहमति नहीं बन पाई थी। अब टाटा सन्स के बोर्ड ने उन्हें पांच साल का नया कार्यकाल देने की मंजूरी दे दी है।
पहली बार 65 साल की उम्र के बाद भी चेयरमैन बने रहेंगे
टाटा ग्रुप में पहली बार ऐसा मामला सामने आया है, जब कोई ग्रुप एग्जीक्यूटिव तय रिटायरमेंट उम्र पार करने के बाद भी अपने पद पर बना रहेगा। ग्रुप की पॉलिसी के अनुसार, एग्जीक्यूटिव को सामान्य तौर पर 65 साल की उम्र में रिटायर होना होता है। हालांकि, नॉन-एग्जीक्यूटिव पद पर कोई व्यक्ति 70 साल की उम्र तक रह सकता है। चंद्रशेखरन अभी 63 साल के हैं। उनका मौजूदा कार्यकाल फरवरी 2027 में खत्म होना था, तब उनकी उम्र 65 साल होगी। नए कार्यकाल के बाद वे 2032 में 70 साल की उम्र में रिटायर होंगे।
TCS से शुरू हुआ सफर, 2017 में संभाली टाटा ग्रुप की कमान
चंद्रशेखरन अक्टूबर 2016 में पहली बार टाटा सन्स के बोर्ड में शामिल हुए थे। इसके करीब चार महीने बाद जनवरी 2017 में उन्हें टाटा सन्स का चेयरमैन बनाया गया।
टाटा ग्रुप से उनका जुड़ाव इससे काफी पुराना है। उन्होंने 1987 में TCS में इंटर्न के तौर पर अपने करियर की शुरुआत की थी। चेयरमैन बनने के बाद टाटा ग्रुप ने एविएशन, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, बैटरी और डिजिटल बिजनेस जैसे नए क्षेत्रों में कदम बढ़ाया।
9 साल में ग्रुप के रेवेन्यू और मुनाफे में बढ़ोतरी
2017 में चंद्रशेखरन के टाटा ग्रुप की कमान संभालने के बाद ग्रुप का कारोबार बढ़ा है। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2020 में टाटा ग्रुप का रेवेन्यू ₹7.89 लाख करोड़ था। वित्त वर्ष 2026 में यह बढ़कर ₹16.24 लाख करोड़ हो गया। इसी अवधि में ग्रुप का मुनाफा भी ₹32,000 करोड़ से बढ़कर ₹1.71 लाख करोड़ पहुंच गया। ग्रुप की लिस्टेड कंपनियों के मार्केट कैप में भी बढ़ोतरी हुई। 2020 में यह ₹9.31 लाख करोड़ था, जो 2026 में बढ़कर ₹24.39 लाख करोड़ हो गया।
टाटा ग्रुप, टाटा सन्स और टाटा ट्रस्ट्स क्या हैं?
टाटा ग्रुप के तहत टाटा नाम से चलने वाली अलग-अलग कंपनियां और कारोबार आते हैं। इनमें TCS, टाटा मोटर्स, टाटा स्टील, टाटा पावर और एयर इंडिया जैसे नाम शामिल हैं। टाटा सन्स टाटा ग्रुप की मुख्य कंपनी है। यह ग्रुप की बड़ी कंपनियों में हिस्सेदारी रखती है और बड़े कारोबारी फैसलों में इसकी अहम भूमिका रहती है। टाटा ट्रस्ट्स सामाजिक और परोपकारी काम करने वाले ट्रस्टों का समूह है। टाटा सन्स में इसकी करीब 66% हिस्सेदारी बताई गई है।
RBI और टाटा सन्स का IPO मामला भी चर्चा में
दिए गए टेक्स्ट के मुताबिक, टाटा सन्स को तीन साल के भीतर IPO लाना होगा। मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि RBI ने टाटा सन्स की उस अर्जी को खारिज कर दिया, जिसमें कंपनी ने NBFC यानी नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी का दर्जा खत्म करने की मांग की थी।
टाटा सन्स ने 2024 में ₹21,813 करोड़ का पूरा कर्ज चुका दिया था। कंपनी का कहना था कि अब उस पर कोई कर्ज नहीं है, इसलिए उसे NBFC की कैटेगरी से बाहर किया जाए। हालांकि, RBI ने इस मांग को मंजूरी नहीं दी।
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