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तेल बाजार में हलचल कच्चा तेल पहुंच सकता है 100 डॉलर

Ratna Netam
20 Sept 2026 7:18 PM IST
तेल बाजार में हलचल कच्चा तेल पहुंच सकता है 100 डॉलर
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नई दिल्ली। वैश्विक तेल बाजार को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म **मॉर्गन स्टेनली** ने अपनी ताजा रिसर्च रिपोर्ट में कहा है कि आने वाले महीनों में कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी का जोखिम बना हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, जियोपॉलिटिकल तनाव, शिपिंग में बाधाएं, रिफाइनिंग क्षमता में कमी और घटते इन्वेंट्री स्तरों के कारण वैश्विक तेल बाजार में सप्लाई का दबाव बढ़ रहा है।मॉर्गन स्टेनली ने वर्ष 2026 की चौथी तिमाही के लिए **ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत का अनुमान 100 डॉलर प्रति बैरल** पर बरकरार रखा है। हालांकि, ब्रोकरेज ने यह भी कहा है कि औसत कीमत के बावजूद बाजार में अस्थायी रूप से कीमतें इस स्तर से ऊपर जा सकती हैं।
सप्लाई संकट से बढ़ सकता है कीमतों पर दबाव
मॉर्गन स्टेनली के अनुसार, तेल बाजार इस समय कई बड़ी चुनौतियों का सामना कर रहा है। वैश्विक स्तर पर सप्लाई बाधित होने की आशंका और परिवहन मार्गों में परेशानी के कारण बाजार में अनिश्चितता बढ़ी है।रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर नई आपूर्ति बाधाएं सामने आती हैं तो ब्रेंट क्रूड की कीमतों में अनुमान से अधिक तेजी देखने को मिल सकती है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ी चिंता
मॉर्गन स्टेनली ने तेल आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों का भी जिक्र किया है। इनमें **होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz)** प्रमुख है।यह क्षेत्र वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां किसी भी तरह की रुकावट या तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर पड़ सकता है।ब्रोकरेज के अनुसार, इस मार्ग से निर्यात में आने वाली किसी भी बाधा से तेल की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है और कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
बाब अल-मंडेब मार्ग से भी सप्लाई प्रभावित
रिपोर्ट में **बाब अल-मंडेब (Bab el-Mandeb)** क्षेत्र का भी उल्लेख किया गया है। यह समुद्री रास्ता एशिया, यूरोप और मध्य पूर्व के बीच ऊर्जा परिवहन के लिए महत्वपूर्ण है।इस मार्ग पर किसी भी तरह की सुरक्षा चुनौती या बाधा से जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है, जिससे तेल आपूर्ति में देरी और लागत बढ़ने की संभावना रहती है।
सऊदी पाइपलाइन बंद होने का असर
मॉर्गन स्टेनली ने सऊदी अरब की **ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन** को लेकर भी चिंता जताई है। रिपोर्ट के अनुसार, इस पाइपलाइन से जुड़ी समस्या तेल आपूर्ति व्यवस्था को प्रभावित कर सकती है।सऊदी अरब दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादक देशों में शामिल है। ऐसे में वहां की उत्पादन और परिवहन व्यवस्था में किसी भी बदलाव का असर वैश्विक बाजार पर पड़ता है।
इन्वेंट्री में गिरावट बनी चिंता
ब्रोकरेज ने तेल भंडार यानी इन्वेंट्री में कमी को भी कीमतों में तेजी की एक वजह बताया है। जब बाजार में उपलब्ध तेल भंडार कम होते हैं तो अचानक मांग बढ़ने या सप्लाई बाधित होने की स्थिति में कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा परिस्थितियों में बाजार में संतुलन बनाए रखना एक बड़ी चुनौती हो सकती है।
भारत पर पड़ सकता है असर
भारत दुनिया के बड़े तेल आयातक देशों में शामिल है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर घरेलू स्तर पर भी देखने को मिल सकता है।कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव से पेट्रोल-डीजल की कीमतों, परिवहन लागत और महंगाई पर प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि, घरेलू कीमतों पर कई अन्य कारक भी असर डालते हैं।
ऊर्जा बाजार में बढ़ी अनिश्चितता
मॉर्गन स्टेनली का कहना है कि मौजूदा समय में तेल और गैस बाजार कई स्तरों पर दबाव का सामना कर रहा है। जियोपॉलिटिकल घटनाएं, उत्पादन से जुड़े फैसले और परिवहन बाधाएं बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकती हैं।ब्रोकरेज ने कहा कि बाजार में जोखिम अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं और आने वाले समय में नई परिस्थितियों के आधार पर कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
निवेशकों की नजर तेल बाजार पर
तेल की कीमतों में बदलाव का असर ऊर्जा कंपनियों, एयरलाइंस, ऑटो सेक्टर और वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ता है। इसलिए निवेशक और बाजार विशेषज्ञ कच्चे तेल की कीमतों, उत्पादन आंकड़ों और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर नजर बनाए हुए हैं।
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