
नई दिल्ली: दक्षिण-पश्चिम मानसून ने शुरुआती सुस्ती के बाद अब रफ्तार पकड़ ली है। देश में मानसूनी बारिश की स्थिति में लगातार सुधार देखने को मिल रहा है। 7 जुलाई तक कुल बारिश की कमी घटकर 12 प्रतिशत रह गई है। मौसम विभाग के अनुसार, हाल के दिनों में बारिश की गतिविधियों में तेजी आई है, जिससे खरीफ फसलों की तैयारी को लेकर सकारात्मक संकेत मिले हैं।
प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के अनुसार, मानसून की प्रगति, कृषि क्षेत्र की तैयारियों और बदलते मौसम पैटर्न से जुड़ी चुनौतियों की समीक्षा के लिए एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पीके मिश्रा ने की।
मानसून की स्थिति पर हुई विस्तृत समीक्षा
बैठक में भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अधिकारियों ने मानसून की मौजूदा स्थिति और आने वाले दिनों के पूर्वानुमान को लेकर जानकारी दी।
अधिकारियों ने बताया कि मानसून की शुरुआत में कुछ क्षेत्रों में बारिश सामान्य से कम रही थी, लेकिन पिछले कुछ दिनों में बारिश की गतिविधियों में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
बारिश की गति बढ़ने से देश में मानसून की कुल कमी कम हुई है और अब यह अंतर 12 प्रतिशत तक रह गया है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, यह सुधार कृषि क्षेत्र के लिए राहत भरा संकेत है।
खरीफ सीजन को लेकर बढ़ी उम्मीदें
भारत की कृषि व्यवस्था काफी हद तक मानसून पर निर्भर करती है। धान, मक्का, दालें, कपास और सोयाबीन जैसी खरीफ फसलों के लिए समय पर और पर्याप्त बारिश बेहद महत्वपूर्ण होती है।
बैठक में खरीफ सीजन की तैयारियों की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि मानसून की बेहतर प्रगति से खेती के कामों में तेजी आने की संभावना है।
सरकार का मानना है कि अगर आने वाले हफ्तों में मानसून सामान्य रहता है तो खरीफ उत्पादन पर सकारात्मक असर पड़ सकता है।
एल नीनो के बावजूद सामान्य मानसून की उम्मीद
मौसम वैज्ञानिकों ने इस साल मानसून के दौरान कमजोर से मध्यम स्तर के एल नीनो की संभावना जताई है। हालांकि, सरकार ने कहा है कि एल नीनो का मतलब हमेशा कम बारिश होना नहीं होता।
केंद्र ने पहले भी स्पष्ट किया है कि मानसून पर केवल एल नीनो का ही नहीं बल्कि कई अन्य मौसमी परिस्थितियों का प्रभाव पड़ता है।
मौजूदा स्थिति को देखते हुए सरकार का मानना है कि मानसून की प्रगति संतोषजनक दिशा में आगे बढ़ रही है।
बदलते मौसम पैटर्न पर भी चर्चा
बैठक में बदलते मौसम पैटर्न और उससे पैदा होने वाली संभावित चुनौतियों पर भी चर्चा हुई।
अधिकारियों ने बताया कि मौसम में बदलाव के कारण कई बार बारिश का वितरण असमान हो जाता है। कुछ क्षेत्रों में अत्यधिक बारिश तो कुछ जगहों पर कम बारिश की स्थिति बन सकती है।
ऐसे हालात से निपटने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर तालमेल और समय पर तैयारी पर जोर दिया गया।
किसानों के हितों पर सरकार की नजर
केंद्र सरकार ने कहा कि किसानों की सुविधा और कृषि उत्पादन को बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
कृषि मंत्रालय और संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि वे राज्यों के साथ लगातार संपर्क में रहें और फसलों की स्थिति पर नजर बनाए रखें।
जहां बारिश कम हुई है, वहां किसानों को आवश्यक सलाह और सहायता उपलब्ध कराने की योजना बनाई जा रही है।
मौसम विभाग लगातार कर रहा निगरानी
IMD देशभर में मानसून की गतिविधियों पर लगातार नजर रख रहा है। मौसम विभाग की रिपोर्ट के आधार पर सरकार आगे की रणनीति तैयार कर रही है।
अधिकारियों ने बताया कि आने वाले दिनों में मानसून के और सक्रिय रहने की संभावना है, जिससे बारिश की कमी में और सुधार हो सकता है।
अर्थव्यवस्था के लिए भी अहम है मानसून
मानसून का असर सिर्फ कृषि तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका प्रभाव ग्रामीण अर्थव्यवस्था, खाद्य उत्पादन, महंगाई और बाजार की मांग पर भी पड़ता है।
अच्छी बारिश से किसानों की आय में सुधार होता है और ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ती हैं।
सरकार का कहना है कि मौजूदा मानसून की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर हर संभव कदम उठाए जाएंगे।
कुल मिलाकर, दक्षिण-पश्चिम मानसून की रफ्तार बढ़ने और बारिश की कमी घटकर 12 प्रतिशत तक पहुंचने से खरीफ सीजन को लेकर उम्मीदें मजबूत हुई हैं। हालांकि, आने वाले महीनों में बारिश के वितरण और मौसम की गतिविधियों पर सभी की निगाहें बनी रहेंगी।





