
Business बिजनेस: इस सप्ताह मंथली एक्सपायरी से पहले शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक और घरेलू आर्थिक संकेतकों के चलते निवेशकों की धारणा सतर्क बनी हुई है, जिससे निकट अवधि में अस्थिरता की स्थिति रह सकती है।
विश्लेषकों का कहना है कि अगर कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में नरमी आती है, भारतीय रुपया 95–96 प्रति डॉलर के दायरे में स्थिर रहता है और अमेरिका-ईरान के बीच चल रही बातचीत में सकारात्मक प्रगति होती है, तो बाजार में धीरे-धीरे मजबूती देखने को मिल सकती है। इन परिस्थितियों में निवेशकों का भरोसा बढ़ सकता है और इक्विटी बाजार में रिकवरी की संभावना बन सकती है।
हालांकि, दूसरी ओर बाजार के लिए कुछ जोखिम भी बने हुए हैं। अमेरिका-ईरान वार्ता से मिल रहे मिले-जुले संकेत, ब्रेंट क्रूड ऑयल की ऊंची कीमतें और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) के अस्थिर निवेश प्रवाह से बाजार पर दबाव बना रह सकता है। इन कारकों के कारण निवेशकों की रणनीति सतर्क रहने की संभावना है।
इसके साथ ही बाजार की नजर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) के लिए सरकार को किए जाने वाले रिकॉर्ड सरप्लस ट्रांसफर पर भी बनी हुई है। अनुमान है कि यह राशि 2.9 से 3.2 लाख करोड़ रुपये के बीच हो सकती है। यह सरप्लस मुख्य रूप से रुपये को स्थिर करने के लिए आरबीआई के हस्तक्षेप के दौरान हुए मुनाफे, खासकर अमेरिकी डॉलर की बिक्री से प्राप्त लाभ से समर्थित है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बड़ा ट्रांसफर सरकार को अतिरिक्त वित्तीय स्थान (फिस्कल स्पेस) दे सकता है, जिससे बिना तेज उधारी बढ़ाए सरकारी खर्च को समर्थन मिलेगा। इससे विकास और कल्याणकारी योजनाओं को भी सहारा मिल सकता है।
हालांकि, इसके बावजूद आर्थिक दबाव पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, रुपये की कमजोरी और भू-राजनीतिक जोखिम भारत की वित्तीय स्थिति पर दबाव डाल सकते हैं। इन परिस्थितियों में अचानक मिलने वाला यह फिस्कल लाभ भी बाजार और अर्थव्यवस्था के लिए पूरी तरह संतुलन नहीं ला पाएगा।
कुल मिलाकर, निवेशकों के लिए यह सप्ताह वैश्विक संकेतों, क्रूड ऑयल की चाल और मुद्रा बाजार के उतार-चढ़ाव पर निर्भर रहने वाला है, जिससे बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है।





