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5 हफ्तों की गिरावट के बाद निफ्टी की परीक्षा
मुंबई : भारतीय शेयर बाजार में लगातार पांच हफ्तों की गिरावट के बाद अब निवेशकों की नजर अगले सप्ताह आने वाले बड़े वैश्विक संकेतों पर टिकी है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों से जुड़े फैसले और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक माने जा रहे हैं। निफ्टी लगातार दबाव में रहने के बाद अब एक अहम सपोर्ट लेवल के करीब पहुंच गया है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में फेड का रुख, वैश्विक बाजारों की चाल और कच्चे तेल की कीमतें निवेशकों की धारणा को प्रभावित करेंगी।
फेड के फैसले का इंतजार
अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक पर दुनियाभर के बाजारों की नजर है। निवेशक यह जानना चाहते हैं कि ब्याज दरों को लेकर फेड का अगला कदम क्या होगा। अगर फेड नरम रुख अपनाता है तो वैश्विक बाजारों को राहत मिल सकती है और जोखिम वाले एसेट्स में निवेश बढ़ सकता है। वहीं, सख्त रुख से बाजारों में दबाव बढ़ने की संभावना रहती है।
104 डॉलर के करीब पहुंचा कच्चा तेल
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भी बाजार के लिए चिंता का कारण बनी हुई है। क्रूड ऑयल के करीब 104 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंचने से भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश पर दबाव बढ़ सकता है। महंगे कच्चे तेल का असर महंगाई, कंपनियों की लागत और रुपये की स्थिति पर पड़ सकता है। यही वजह है कि निवेशक ऊर्जा बाजार की गतिविधियों पर भी नजर बनाए हुए हैं।
पांच हफ्तों की गिरावट के बाद निफ्टी
भारतीय शेयर बाजार में पिछले पांच हफ्तों से कमजोरी देखने को मिली है। विदेशी निवेशकों की बिकवाली, वैश्विक अनिश्चितता और महंगे तेल जैसे कारणों ने बाजार पर दबाव बनाया है। अब निफ्टी एक महत्वपूर्ण तकनीकी स्तर के पास कारोबार कर रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस स्तर पर बाजार को मजबूती मिलती है या नहीं, यह आगे की दिशा के लिए अहम होगा।
निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा स्थिति में निवेशकों को जल्दबाजी से बचना चाहिए। वैश्विक संकेतों के साफ होने तक सतर्क रणनीति अपनाना बेहतर हो सकता है।आने वाले सप्ताह में फेड का फैसला, कच्चे तेल की कीमतें, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और घरेलू आर्थिक आंकड़े बाजार की चाल को प्रभावित करेंगे।
आगे कैसी रह सकती है बाजार की चाल?
अगर वैश्विक संकेत सकारात्मक रहते हैं और क्रूड की कीमतों में स्थिरता आती है तो बाजार में रिकवरी देखने को मिल सकती है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय तनाव बढ़ने या तेल कीमतों में और तेजी आने पर दबाव जारी रह सकता है। फिलहाल निवेशकों की नजर निफ्टी के सपोर्ट लेवल और वैश्विक घटनाक्रमों पर बनी हुई है। आने वाला सप्ताह शेयर बाजार के लिए काफी महत्वपूर्ण रहने वाला है।
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