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कच्चे तेल की चिंता से बाजार दबाव में, सेंसेक्स 331 अंक गिरा

Ratna Netam
24 July 2026 6:36 PM IST
कच्चे तेल की चिंता से बाजार दबाव में, सेंसेक्स 331 अंक गिरा
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मुंबई : पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में जारी दबाव का असर शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार पर देखने को मिला। हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन घरेलू शेयर बाजार लाल निशान में बंद हुआ। बाजार के प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी 50 दोनों में 0.43 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। यह लगातार पांचवां कारोबारी सत्र रहा, जब भारतीय शेयर बाजार में कमजोरी देखने को मिली।

शुक्रवार को कारोबार समाप्त होने के समय बीएसई सेंसेक्स 331.62 अंक यानी 0.43 प्रतिशत की गिरावट के साथ 76,059.77 अंक पर बंद हुआ। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 इंडेक्स 102 अंक यानी 0.43 प्रतिशत गिरकर 23,767.45 अंक के स्तर पर बंद हुआ।

दिन की शुरुआत भी बाजार के लिए कमजोर रही। सेंसेक्स अपने पिछले बंद स्तर 76,391.39 अंक की तुलना में करीब 0.89 प्रतिशत यानी 683.2 अंक की गिरावट के साथ 75,708.19 अंक पर खुला। कारोबार के दौरान बिकवाली का दबाव बढ़ने से सेंसेक्स दिन के निचले स्तर 75,474.43 अंक तक पहुंच गया। यह गिरावट करीब 1.20 प्रतिशत यानी 916.96 अंकों की रही।

शेयर बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव के कारण निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव से कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ी है, जिसका असर दुनियाभर के बाजारों पर पड़ रहा है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आर्थिक मोर्चे पर दबाव बढ़ा सकती है।

बाजार में गिरावट के पीछे विदेशी निवेशकों की सतर्कता भी एक प्रमुख कारण मानी जा रही है। निवेशक वैश्विक घटनाक्रम, अमेरिकी बाजारों की दिशा और आने वाले आर्थिक आंकड़ों पर नजर बनाए हुए हैं। लगातार पांच सत्रों की गिरावट से निवेशकों में सावधानी का माहौल बना हुआ है।

शुक्रवार को बाजार में कई प्रमुख सेक्टरों के शेयरों में कमजोरी देखने को मिली। तेल और गैस से जुड़े शेयरों पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर पड़ा। वहीं, बैंकिंग और आईटी क्षेत्र के कुछ शेयरों में भी दबाव देखने को मिला। हालांकि कुछ चुनिंदा कंपनियों के शेयरों में खरीदारी के कारण बाजार में गिरावट सीमित रही।

विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में शेयर बाजार की दिशा वैश्विक परिस्थितियों, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर निर्भर करेगी। यदि पश्चिम एशिया में तनाव कम होता है और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में स्थिरता आती है तो घरेलू बाजार में फिर से सुधार देखने को मिल सकता है।

निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच जल्दबाजी में फैसले लेने से बचें और मजबूत बुनियादी आधार वाली कंपनियों पर ध्यान केंद्रित करें। लगातार गिरावट के बावजूद बाजार में लंबी अवधि के निवेशकों के लिए अवसर बने रह सकते हैं।

फिलहाल भारतीय शेयर बाजार पर वैश्विक घटनाक्रमों का प्रभाव जारी है। कच्चे तेल की कीमतों, अंतरराष्ट्रीय तनाव और विदेशी बाजारों की चाल आने वाले कारोबारी सत्रों में बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।

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