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19 अगस्त को बाजार सुस्त, सेंसेक्स-निफ्टी फ्लैट; बड़े शेयरों पर बिकवाली का दबाव

Ashish verma
19 Aug 2026 2:54 PM IST
19 अगस्त को बाजार सुस्त, सेंसेक्स-निफ्टी फ्लैट; बड़े शेयरों पर बिकवाली का दबाव
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Business व्यापर : भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को कारोबार की शुरुआत कमजोर रही। वैश्विक बाजारों से मिले-जुले संकेतों और घरेलू स्तर पर कई प्रमुख सेक्टरों में बिकवाली के कारण सेंसेक्स और निफ्टी सपाट दायरे में खुले। निवेशकों ने कारोबार की शुरुआत में सतर्क रुख अपनाया और ऑटो, मेटल, एनर्जी तथा रियल्टी शेयरों में दबाव देखने को मिला।

बाजार खुलने के समय बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी में ज्यादा तेजी नहीं दिखाई दी। विदेशी बाजारों में कमजोरी, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और वैश्विक आर्थिक चिंताओं ने निवेशकों की धारणा पर असर डाला। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, मौजूदा समय में निवेशक जोखिम लेने से बच रहे हैं और बड़ी खरीदारी के बजाय बाजार की दिशा का इंतजार कर रहे हैं।

शुरुआती कारोबार में ऑटो सेक्टर के शेयरों पर दबाव रहा। इसके अलावा मेटल कंपनियों के शेयरों में भी बिकवाली देखने को मिली। टाटा स्टील, हिंडाल्को जैसे प्रमुख मेटल शेयरों में कमजोरी रही। रियल्टी और एनर्जी सेक्टर के शेयर भी दबाव में नजर आए। वहीं कुछ आईटी और चुनिंदा कंपनियों के शेयरों में खरीदारी का सहारा मिला।

बाजार पर सबसे बड़ा असर वैश्विक संकेतों का रहा। अमेरिका और अन्य विदेशी बाजारों में अनिश्चितता, बढ़ती बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। खासकर कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से भारत जैसे आयात आधारित देश पर महंगाई और आयात बिल का दबाव बढ़ने की आशंका रहती है।

मंगलवार के कारोबार में भी भारतीय बाजार गिरावट के साथ बंद हुआ था। निफ्टी 50 लगातार छठे सत्र में गिरावट के साथ बंद हुआ, जबकि सेंसेक्स में भी कमजोरी दर्ज की गई। लगातार बिकवाली के कारण बाजार में नकारात्मक माहौल बना हुआ है।

इन सेक्टरों पर रही नजर

ऑटो, मेटल, बैंकिंग, रियल्टी और एनर्जी सेक्टर बुधवार के कारोबार में प्रमुख फोकस में रहे। ऑटो कंपनियों पर मांग और लागत से जुड़े मुद्दों का असर दिखा, जबकि मेटल शेयर वैश्विक कमोडिटी बाजार की चाल से प्रभावित हुए। रियल्टी सेक्टर में ऊंची ब्याज दरों और बाजार की सतर्कता के कारण दबाव बना रहा।

एनर्जी सेक्टर पर भी निवेशकों की नजर रही क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में मजबूती बनी हुई है। तेल महंगा होने से कंपनियों की लागत बढ़ सकती है और इसका असर मुनाफे पर पड़ सकता है। यही वजह है कि निवेशक इस समय ऊर्जा और उससे जुड़े शेयरों में सावधानी बरत रहे हैं।

विदेशी निवेश और वैश्विक परिस्थितियों का असर

विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की चाल को प्रभावित कर रही हैं। वैश्विक स्तर पर अनिश्चित माहौल के बीच विदेशी निवेशक भारतीय बाजार में सतर्क नजर आ रहे हैं। अमेरिका की ब्याज दरों को लेकर संकेत, डॉलर की मजबूती और भू-राजनीतिक तनाव बाजार की दिशा तय करने वाले अहम कारक बने हुए हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार में मौजूदा उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों को जल्दबाजी में फैसले लेने से बचना चाहिए। मजबूत कंपनियों के फंडामेंटल और लंबी अवधि के निवेश नजरिए को ध्यान में रखकर ही निवेश की रणनीति बनानी चाहिए।

आगे बाजार की दिशा

आने वाले सत्रों में बाजार की दिशा वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और घरेलू आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करेगी। अगर वैश्विक स्तर पर तनाव कम होता है और तेल की कीमतों में राहत मिलती है तो बाजार में सुधार देखने को मिल सकता है। वहीं मौजूदा दबाव जारी रहने पर बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।

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