
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में आई जोरदार गिरावट के बाद सेंसेक्स और निफ्टी ने निचले स्तरों से शानदार रिकवरी दर्ज की। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल (ब्रेंट क्रूड) की कीमतों में आई गिरावट और निचले स्तरों पर निवेशकों द्वारा की गई वैल्यू बाइंग (कम कीमत पर खरीदारी) से भारतीय बाजार को बड़ी राहत मिली, जिससे बाजार अपनी शुरुआती अधिकांश गिरावट को घटाने में सफल रहा।
कारोबार की शुरुआत में बाजार पर भारी दबाव देखा गया। सेंसेक्स एक समय 916.96 अंक यानी 1.2 प्रतिशत टूटकर 75,474.43 के निचले स्तर पर चला गया था। वहीं दूसरी ओर, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 263.3 अंक या 1.1 प्रतिशत फिसलकर 23,606.30 के स्तर पर पहुंच गया था। हालांकि, जैसे ही बाजार निचले स्तरों पर पहुंचा, घरेलू और संस्थागत निवेशकों ने चुनिंदा शेयरों में खरीदारी शुरू कर दी। दोपहर के सत्र तक सेंसेक्स अपने दिन के निचले स्तर से 600 अंक से अधिक संभलकर 76,099.16 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया, जबकि निफ्टी भी रिकवर होकर 23,783.90 के स्तर पर पहुंच गया।
बाजार में आई इस अचानक रिकवरी के पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े कारण रहे। पहला बड़ा कारण कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी रहा। शुरुआती कारोबार में अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई थीं, जो बाद में 2 प्रतिशत से अधिक गिरकर 98.58 डॉलर प्रति बैरल पर आ गईं। क्रूड में आई इस राहत से भारतीय बाजार का सेंटीमेंट सुधरा। दूसरा बड़ा कारण भारतीय रुपये में आई मजबूती रहा। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 22 पैसे मजबूत होकर 96.51 के स्तर पर आ गया। माना जा रहा है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के संभावित हस्तक्षेप और कमजोर अमेरिकी डॉलर से रुपये को सहारा मिला।
तीसरा कारण निचले स्तरों पर हुई लिवाली रहा। हाल के कारोबारी सत्रों में बाजार में लगातार गिरावट देखी जा रही थी। इस हफ्ते सेंसेक्स और निफ्टी में करीब 3 प्रतिशत तक की बड़ी गिरावट आ चुकी थी, जिससे कई गुणवत्ता वाले शेयर बेहद आकर्षक कीमतों पर उपलब्ध थे। ऐसे में निवेशकों ने इसका फायदा उठाते हुए जमकर खरीदारी की। विशेष रूप से बैंकिंग शेयरों में अच्छी लिवाली दर्ज की गई, जिससे बैंक निफ्टी का प्रदर्शन व्यापक बाजार की तुलना में बेहतर रहा।
बाजार के जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में मार्केट का सेंटीमेंट थोड़ा दबाव में रह सकता है। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के रिसर्च प्रमुख विनोद नायर के अनुसार, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और अमेरिका में 10-साल के बॉन्ड यील्ड का 52 हफ्ते के उच्चतम स्तर पर पहुंचना चिंता का विषय है। इससे अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा आगामी बैठकों में ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना मजबूत हुई है। इसके अलावा अमेरिकी टैरिफ नीतियों और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली से उभरते बाजारों पर दबाव बना हुआ है। हालांकि, भारतीय बैंकिंग क्षेत्र की मजबूत क्रेडिट ग्रोथ और बेहतर वैल्यूएशन से बाजार को लंबी अवधि में समर्थन मिलने की उम्मीद है।





