
नई दिल्ली। आम से बने पेय पदार्थों की गुणवत्ता सुधारने और किसानों को बेहतर मूल्य दिलाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाने की तैयारी की है। केंद्र सरकार की एक विशेषज्ञ समिति ने सुझाव दिया है कि मैंगो शेक, आम रस और अन्य आम आधारित पेय पदार्थों में 22 से 25 प्रतिशत तक प्राकृतिक आम का गूदा (पल्प) अनिवार्य किया जाए। समिति का कहना है कि जिन उत्पादों में तय मात्रा में असली आम का पल्प होगा, उन्हें ही 5 प्रतिशत वाले रियायती जीएसटी स्लैब का लाभ दिया जाना चाहिए।
इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य बाजार में मिलने वाले आम पेय पदार्थों की गुणवत्ता बढ़ाना और आम किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य दिलाना है। समिति ने खासतौर पर तोतापुरी आम के किसानों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए यह सुझाव दिया है। देश के कई हिस्सों में तोतापुरी आम का उत्पादन बड़े स्तर पर होता है, लेकिन इस साल इसकी कीमतों में भारी गिरावट देखने को मिली है।
केंद्र सरकार की विशेषज्ञ समिति ने अपनी रिपोर्ट कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को सौंपी है। इस समिति की अध्यक्षता लखनऊ स्थित आईसीएआर-सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ सबट्रॉपिकल हॉर्टिकल्चर (CISH) के निदेशक टी. दामोदरन ने की। समिति को आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और कर्नाटक जैसे प्रमुख आम उत्पादक राज्यों में तोतापुरी आम की कीमतों में आई गिरावट के कारणों का अध्ययन करने की जिम्मेदारी दी गई थी।
समिति ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि आम की कीमतों में गिरावट के पीछे कई कारण हैं। इनमें प्रसंस्करण उद्योग की सीमित क्षमता, किसानों से खरीद के समय में तालमेल की कमी, आम पेय पदार्थों में कम मात्रा में पल्प का इस्तेमाल और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव प्रमुख हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि बाजार में उपलब्ध कई आम आधारित पेय पदार्थों में वास्तविक आम के गूदे की मात्रा काफी कम होती है। कंपनियां स्वाद और रंग बनाए रखने के लिए अन्य सामग्री का इस्तेमाल करती हैं, जिससे उत्पाद की गुणवत्ता प्रभावित होती है। समिति का मानना है कि यदि पेय पदार्थों में अधिक मात्रा में असली आम का पल्प इस्तेमाल होगा तो उपभोक्ताओं को बेहतर गुणवत्ता वाला उत्पाद मिलेगा और किसानों को भी इसका सीधा लाभ मिलेगा।
समिति ने टैक्स व्यवस्था को भी आम के पल्प की मात्रा से जोड़ने का सुझाव दिया है। इसके तहत जिन उत्पादों में निर्धारित मात्रा से कम आम का गूदा होगा, उन पर अधिक जीएसटी लगाया जा सकता है। वहीं, मानकों को पूरा करने वाले उत्पादों को 5 प्रतिशत के रियायती जीएसटी स्लैब का फायदा मिलेगा।
सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से आम प्रसंस्करण उद्योग को बढ़ावा मिलेगा और किसानों की आय में सुधार हो सकता है। तोतापुरी आम की मांग बढ़ने से उत्पादन करने वाले किसानों को बाजार में बेहतर कीमत मिलने की उम्मीद है।
इस प्रस्ताव को लागू करने के लिए जल्द ही विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के बीच चर्चा की जाएगी। इसमें भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI), जीएसटी परिषद, वित्त मंत्रालय, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय, कृषि मंत्रालय और स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारी शामिल होंगे। बैठक में उत्पादों के मानक और टैक्स ढांचे को अंतिम रूप देने पर विचार किया जाएगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह नियम लागू होता है तो आम पेय पदार्थों के क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। इससे जहां उपभोक्ताओं को बेहतर गुणवत्ता वाले उत्पाद मिलेंगे, वहीं आम किसानों को भी आर्थिक मजबूती मिलेगी। सरकार का लक्ष्य कृषि उत्पादन और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना है, जिससे किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिल सके।





