
x
जनवरी तक टल सकता है UPI पर MDR शुल्क
नई दिल्ली: डिजिटल भुगतान क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों पेटीएम और मोबिक्विक के शेयरों में शुक्रवार, 9 अक्टूबर को शुरुआती कारोबार में तेजी देखने को मिली। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) की ओर से यूपीआई लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने की समयसीमा आगे बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। इसी बीच निवेशकों की नजर डिजिटल भुगतान कंपनियों के शेयरों पर बनी हुई है।
शुक्रवार सुबह करीब 9:36 बजे पेटीएम की मूल कंपनी वन97 कम्युनिकेशंस का शेयर 2.10 प्रतिशत बढ़कर 1,676 रुपये पर पहुंच गया। वहीं, मोबिक्विक का शेयर 2.40 प्रतिशत की तेजी के साथ 250.40 रुपये पर कारोबार करता दिखाई दिया। हालांकि, पाइन लैब्स के शेयर में गिरावट दर्ज की गई। उपलब्ध शुरुआती कारोबारी आंकड़ों में दोनों कंपनियों के शेयरों में 8 प्रतिशत की बढ़ोतरी की पुष्टि नहीं हुई है।
दरअसल, यूपीआई के माध्यम से व्यापारियों को किए जाने वाले 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा भुगतान पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर शुल्क लगाने का प्रस्ताव है। पहले इसे 15 अक्टूबर 2026 से लागू करने की योजना थी, लेकिन अब इसकी शुरुआत 1 जनवरी 2027 तक टाली जा सकती है। इस संबंध में अंतिम निर्णय का इंतजार किया जा रहा है। एमडीआर वह शुल्क होता है, जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने वाले व्यापारियों से लिया जाता है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत पात्र लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत शुल्क निर्धारित किया गया है। उदाहरण के लिए, 10,000 रुपये के पात्र भुगतान पर 40 रुपये का शुल्क बनेगा। प्रस्ताव में सामान्य ग्राहकों से सीधे एमडीआर वसूलने की व्यवस्था नहीं है।
त्योहारी सीजन को देखते हुए व्यापारिक संगठनों ने इस शुल्क को लागू करने के समय पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि त्योहारों के दौरान कारोबार बढ़ता है और ऐसे समय में अतिरिक्त भुगतान शुल्क लागू होने से व्यापारियों का खर्च बढ़ सकता है। इसी वजह से इसकी समयसीमा आगे बढ़ाने पर चर्चा हो रही है। गौरतलब है कि गुरुवार, 8 अक्टूबर को शुल्क लागू होने में संभावित देरी की खबरों से फिनटेक कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट आई थी। पेटीएम के शेयर में कारोबार के दौरान 10 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज हुई थी, जबकि मोबिक्विक के शेयर भी 8 प्रतिशत से अधिक टूटे थे। इसके बाद शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में दोनों शेयरों में कुछ सुधार देखने को मिला।
बाजार में इस उतार-चढ़ाव की एक प्रमुख वजह एमडीआर से जुड़ी संभावित आय है। शुल्क लागू होने पर भुगतान सेवाएं देने वाली कंपनियों और बैंकों के लिए राजस्व के नए अवसर बन सकते हैं। वहीं, इसे जनवरी तक टालने से संभावित आय शुरू होने में देरी होगी। एनपीसीआई की संचालन समिति छोटे व्यापारियों को राहत देने के विकल्पों पर भी विचार कर रही है। चर्चा में एक प्रस्ताव यह है कि सालाना 40 लाख रुपये तक कारोबार करने वाले व्यापारियों को एमडीआर से छूट दी जाए। हालांकि, इस प्रस्ताव पर भी अंतिम निर्णय होना बाकी है।
भारत में यूपीआई डिजिटल भुगतान का प्रमुख माध्यम बन चुका है। सितंबर 2026 में यूपीआई के माध्यम से लगभग 2,407 करोड़ लेनदेन दर्ज किए गए, जिनकी कुल कीमत करीब 29.37 लाख करोड़ रुपये रही। इतने बड़े स्तर पर होने वाले डिजिटल भुगतान को देखते हुए शुल्क संबंधी किसी भी बदलाव का महत्व बढ़ जाता है। फिलहाल निवेशकों और व्यापारियों की नजर एनपीसीआई के अंतिम फैसले पर टिकी हुई है। यदि एमडीआर शुल्क जनवरी 2027 तक टाल दिया जाता है, तो व्यापारियों को त्योहारी सीजन में मौजूदा व्यवस्था के तहत भुगतान स्वीकार करने का अतिरिक्त समय मिलेगा। वहीं, डिजिटल भुगतान कंपनियों को अपनी कारोबारी रणनीति और तकनीकी तैयारियों में बदलाव करने का अवसर मिल सकता है।
Next Story





