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₹5 करोड़ तक के मामलों में नहीं होगी गिरफ्तारी GST पर बड़ा अपडेट

Alisha
4 Oct 2026 9:55 PM IST
₹5 करोड़ तक के मामलों में नहीं होगी गिरफ्तारी GST पर बड़ा अपडेट
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नई दिल्ली। वस्तु एवं सेवा कर (GST) व्यवस्था में एक और बड़े बदलाव की तैयारी की जा रही है। GST अधिकारियों को टैक्स मामलों में सीधे गिरफ्तारी का अधिकार देने वाले प्रावधान को हटाने और गिरफ्तारी के लिए अदालत की मंजूरी अनिवार्य करने के प्रस्ताव पर विचार किया जा सकता है। इसके साथ ही आपराधिक अभियोजन शुरू करने की सीमा को ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹5 करोड़ करने का प्रस्ताव भी चर्चा में है। इन मुद्दों पर 7 अक्टूबर को होने वाली GST काउंसिल की बैठक में विचार होने की संभावना है।प्रस्ताव को मंजूरी मिलने पर GST कानून के तहत प्रवर्तन की मौजूदा व्यवस्था में बड़ा बदलाव आएगा। अभी केंद्रीय GST अधिनियम की धारा 69 के तहत निर्धारित शर्तें पूरी होने पर कमिश्नर किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी का अधिकार अधिकारी को दे सकता है। नई व्यवस्था में इस अधिकार को GST अधिकारियों से हटाकर गिरफ्तारी को न्यायिक मंजूरी से जोड़ने पर विचार किया जा रहा है। यानी टैक्स अधिकारी स्वयं गिरफ्तारी का आदेश नहीं दे सकेंगे और इसके लिए अदालत की अनुमति की जरूरत होगी।
हालांकि यह स्पष्ट करना जरूरी है कि अभी ये बदलाव **प्रस्ताव के स्तर पर हैं**। GST काउंसिल की बैठक में इन पर अंतिम निर्णय लिया जाना बाकी है। यदि काउंसिल इन्हें स्वीकार करती है तो संबंधित कानूनी प्रावधानों में संशोधन की प्रक्रिया भी पूरी करनी होगी। इसलिए इसे अभी लागू नियम नहीं माना जाना चाहिए।प्रस्तावित बदलावों का मुख्य उद्देश्य GST व्यवस्था में सामान्य टैक्स विवाद और गंभीर धोखाधड़ी के मामलों के बीच स्पष्ट अंतर करना बताया जा रहा है। टैक्स की दर, वस्तुओं या सेवाओं के वर्गीकरण, मूल्यांकन या इनपुट टैक्स क्रेडिट यानी ITC से जुड़े व्याख्यात्मक विवादों को आपराधिक मामलों की श्रेणी में लाने के बजाय टैक्स रिकवरी और वित्तीय दंड के जरिए निपटाने पर जोर दिया जा सकता है। गंभीर और जानबूझकर की गई टैक्स चोरी या धोखाधड़ी के मामलों में आपराधिक कार्रवाई जारी रह सकती है।
प्रस्ताव में आपराधिक अभियोजन की मौद्रिक सीमा को ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹5 करोड़ करने की बात भी सामने आई है। इसका मकसद आपराधिक प्रक्रिया को अपेक्षाकृत बड़े और गंभीर मामलों तक सीमित करना है। कम राशि वाले मामलों में सरकार का जोर बकाया टैक्स की वसूली, ब्याज और जुर्माने जैसी कार्रवाई पर रह सकता है।गिरफ्तारी का अधिकार हटाए जाने का मतलब यह नहीं होगा कि टैक्स चोरी या गलत तरीके से ITC लेने वाले लोगों पर कोई कार्रवाई नहीं होगी। सरकार के पास बकाया टैक्स की वसूली करने, ब्याज लगाने और जुर्माना लगाने की शक्तियां बनी रहेंगी। इसी तरह जानबूझकर बड़े स्तर पर धोखाधड़ी करने वाले मामलों में कानून के तहत अभियोजन की प्रक्रिया भी जारी रह सकती है। प्रस्ताव का फोकस सामान्य टैक्स विवादों में आपराधिक कार्रवाई का दायरा सीमित करने पर है।
GST कानून में अपराध और अभियोजन से जुड़े दूसरे प्रावधानों में भी बदलाव पर विचार किया जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, वर्तमान अभियोजन प्रावधानों के तहत आने वाले 24 अपराधों में से नौ को हटाने का प्रस्ताव है, जबकि 11 को मौजूदा स्वरूप में बरकरार रखा जा सकता है। कुछ मामलों में न्यूनतम सजा की अनिवार्यता समाप्त करने और अदालत को जुर्माना लगाने का विकल्प देने पर भी विचार किया जा सकता है। मध्य श्रेणी के मामलों में अधिकतम सजा को तीन वर्ष से घटाकर दो वर्ष करने का प्रस्ताव भी सामने आया है।सरकार की अगली पीढ़ी के GST सुधारों में टेक्नोलॉजी आधारित निगरानी को ज्यादा महत्व दिए जाने की संभावना है। GST नेटवर्क के पास अब इनवॉइस और ITC से जुड़ा बड़ा डिजिटल डेटा उपलब्ध है। इसके जरिए संदिग्ध लेनदेन, फर्जी इनवॉइस और गलत ITC दावों की पहचान पहले के मुकाबले अधिक प्रभावी तरीके से की जा सकती है। इसी वजह से प्रवर्तन व्यवस्था को गिरफ्तारी केंद्रित रखने के बजाय डेटा आधारित जांच और वित्तीय रिकवरी की दिशा में ले जाने पर जोर दिया जा रहा है।
GST काउंसिल की बैठक में केवल गिरफ्तारी और अभियोजन से जुड़े बदलाव ही नहीं, बल्कि छोटे कारोबारियों और करदाताओं के लिए अनुपालन आसान बनाने वाले दूसरे प्रस्ताव भी सामने आ सकते हैं। इनमें GST रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया सरल करने, रिफंड जल्दी जारी करने, ITC से जुड़ी प्रक्रियाओं को आसान बनाने तथा शो-कॉज नोटिस और जुर्माने की व्यवस्था में बदलाव जैसे विषय शामिल हो सकते हैं। छोटे करदाताओं को लेट फीस में राहत देने पर भी विचार होने की संभावना बताई गई है।
अगर गिरफ्तारी की शक्ति हटाने और अभियोजन की सीमा बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो यह GST लागू होने के बाद प्रवर्तन व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलावों में से एक होगा। इसका असर खासतौर पर उन कारोबारियों पर पड़ेगा जो टैक्स की व्याख्या, वर्गीकरण, मूल्यांकन या ITC जैसे मामलों में विभाग के साथ विवाद का सामना करते हैं।अब सभी की नजर 7 अक्टूबर की GST काउंसिल बैठक पर रहेगी। बैठक में प्रस्तावों को मंजूरी मिलने के बाद भी उन्हें प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक कानूनी संशोधन करने होंगे। इसलिए कारोबारियों और करदाताओं के लिए अंतिम फैसले और आधिकारिक अधिसूचना का इंतजार करना जरूरी होगा।
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