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Zee मामले में बड़ा अपडेट SAT के फैसले से कंपनी को मिली राहत

nidhi
28 Aug 2026 11:33 AM IST
Zee मामले में बड़ा अपडेट SAT के फैसले से कंपनी को मिली राहत
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जी एंटरटेनमेंट को बड़ी राहत
Zee Entertainment Enterprises (ZEEL) को सिक्योरिटीज अपीलेट ट्रिब्यूनल (SAT) से बड़ी राहत मिली है। कंपनी को प्रमोटर ग्रुप की ओर से वारंट सब्सक्रिप्शन पूरा करने के लिए एक दिन की अतिरिक्त मोहलत दी गई है। कंपनी ने करीब 76 करोड़ रुपये की राशि समय पर ट्रांसफर होने लेकिन देर से क्रेडिट होने का हवाला देते हुए SAT का रुख किया था।
इस फैसले से Zee Entertainment को फंड जुटाने की प्रक्रिया पूरी करने में मदद मिलेगी। इससे पहले SAT ने कंपनी को प्रमोटर इकाई से फंड जुटाने और वारंट इश्यू प्रक्रिया आगे बढ़ाने की अनुमति दी थी।
3144 करोड़ रुपये के वारंट इश्यू से जुड़ा मामला
Zee Entertainment ने प्रमोटर ग्रुप कंपनी Sunbright Mauritius Investments Limited को वारंट जारी किए हैं। इस प्रक्रिया के तहत कंपनी में प्रमोटर हिस्सेदारी बढ़ाने की योजना है।
रिपोर्ट के अनुसार, वारंट सब्सक्रिप्शन के लिए तय राशि में से करीब 76 करोड़ रुपये समय सीमा के बाद क्रेडिट हुए, जिसके चलते कंपनी ने SAT से अतिरिक्त समय मांगा था।
SEBI के आदेश के बाद शुरू हुआ विवाद
यह मामला SEBI के उस आदेश के बाद सामने आया जिसमें Zee Entertainment, सीईओ पुनीत गोयनका और प्रमोटर सुभाष चंद्रा से जुड़े कुछ प्रतिबंध लगाए गए थे। कंपनी ने इस आदेश को SAT में चुनौती दी थी।
SAT ने कंपनी को कुछ शर्तों के साथ राहत देते हुए फंड जुटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की अनुमति दी थी।
22 हजार करोड़ रुपये के कर्ज मामले से भी चर्चा में Zee
इसी बीच Zee ग्रुप के संस्थापक सुभाष चंद्रा से जुड़े करीब 22,006 करोड़ रुपये के कर्ज मामले ने भी सुर्खियां बटोरी हैं। NCLT ने एक समाधान योजना को मंजूरी दी है, जिसमें करीब 6.5 करोड़ रुपये भुगतान का प्रस्ताव है। इस पर कुछ वित्तीय संस्थानों ने आपत्ति जताई है और कानूनी विकल्प तलाशने की बात कही है।
कंपनी के लिए क्यों अहम है यह राहत
वारंट सब्सक्रिप्शन से Zee Entertainment को पूंजी जुटाने में मदद मिलेगी। कंपनी का कहना है कि अतिरिक्त फंड का इस्तेमाल कारोबार की जरूरतों और वित्तीय मजबूती के लिए किया जाएगा।
SAT के फैसले के बाद अब कंपनी को अपनी वित्तीय योजनाओं को आगे बढ़ाने का मौका मिला है। हालांकि, कर्ज और नियामकीय मामलों से जुड़ी चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं।
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