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ईरान को मिला गैस का खजाना 7.5 ट्रिलियन क्यूबिक फीट का भंडार
तेहरान: अमेरिका के बढ़ते आर्थिक दबाव और ऊर्जा क्षेत्र पर संकट के बीच ईरान ने प्राकृतिक गैस का एक विशाल भंडार मिलने का दावा किया है। ईरान के तेल मंत्री मोहसिन पाकनेजाद के मुताबिक देश के दक्षिणी फार्स प्रांत में खोजे गए गैस क्षेत्र में 7.5 ट्रिलियन क्यूबिक फीट से अधिक प्राकृतिक गैस मौजूद है। इसमें से करीब 5.7 ट्रिलियन क्यूबिक फीट गैस व्यावसायिक रूप से निकाली जा सकती है।
ईरान के लिए यह खोज ऐसे समय सामने आई है, जब उसका ऊर्जा क्षेत्र युद्ध, अमेरिकी प्रतिबंधों और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक दबाव से जूझ रहा है। हाल के संघर्ष में ऊर्जा बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचने से देश की गैस उत्पादन क्षमता भी प्रभावित हुई है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि नई खोज देश की ऊर्जा सुरक्षा और अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। ईरान के तेल मंत्री ने सरकारी टेलीविजन को बताया कि नए क्षेत्र में गैस की रिकवरी दर करीब 72 से 73 प्रतिशत रहने का अनुमान है। इस आधार पर कुल भंडार में से लगभग 5.7 ट्रिलियन क्यूबिक फीट गैस निकाली जा सकती है। इसके अलावा यहां गैस कंडेनसेट का भी भंडार मिला है, जिसकी कीमत ईरानी मंत्री ने अरबों डॉलर में होने की बात कही है। सबसे खास बात यह है कि ईरान ने इस गैस को 'स्वीट गैस' बताया है। इसका मतलब है कि इसमें सल्फर जैसे अशुद्ध तत्व अपेक्षाकृत कम होते हैं। ऐसी गैस को प्रोसेस करना आसान और तुलनात्मक रूप से कम खर्चीला हो सकता है। इससे नए गैस क्षेत्र के विकास और संचालन की लागत कम रखने में मदद मिल सकती है। ईरानी तेल मंत्री के मुताबिक नया निकाला जा सकने वाला गैस भंडार दुनिया के सबसे बड़े गैस क्षेत्रों में शामिल साउथ पार्स के एक चरण के लगभग 15 वर्षों के उत्पादन के बराबर है। साउथ पार्स क्षेत्र को ईरान कतर के साथ साझा करता है और यह ईरान की गैस आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
ईरान पहले से ही प्राकृतिक गैस के मामले में दुनिया के सबसे समृद्ध देशों में शामिल है। उपलब्ध अंतरराष्ट्रीय आंकड़ों के मुताबिक उसके पास करीब 34 ट्रिलियन क्यूबिक मीटर प्रमाणित प्राकृतिक गैस भंडार हैं और इस मामले में वह रूस के बाद दुनिया में दूसरे स्थान पर है। हालांकि विशाल भंडार के बावजूद ईरान अपनी गैस का बड़ा हिस्सा घरेलू स्तर पर इस्तेमाल करता है। ईरान की मुश्किल केवल गैस खोजने की नहीं, बल्कि विशाल भंडार को तेजी से उत्पादन में बदलने की भी है। लंबे समय से जारी प्रतिबंधों के कारण उसे विदेशी निवेश, आधुनिक ऊर्जा तकनीक और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था तक पहुंच में समस्याओं का सामना करना पड़ा है। यही वजह है कि विशाल ऊर्जा भंडार होने के बावजूद देश में समय-समय पर गैस और बिजली की कमी देखी गई है।
नई खोज से पहले अक्टूबर 2025 में भी ईरान ने दक्षिणी हिस्से में स्थित पजान गैस क्षेत्र में बड़ी खोज की घोषणा की थी। वहां लगभग 10 ट्रिलियन क्यूबिक फीट गैस और कम से कम 20 करोड़ बैरल कच्चा तेल मिलने का अनुमान लगाया गया था। उस गैस में से करीब 7 ट्रिलियन क्यूबिक फीट निकालने योग्य बताई गई थी। ताजा खोज का महत्व इसलिए और बढ़ जाता है क्योंकि अमेरिका ईरान पर आर्थिक दबाव तेज कर रहा है। 24 अगस्त को अमेरिका ने ईरान के खिलाफ और कठोर आर्थिक कदमों की तैयारी का संकेत दिया, जिनमें ईरान के साथ कारोबार करने वाले साझेदारों को भी निशाना बनाने की बात कही गई है।
भारत और ईरान के संबंध लंबे समय से रणनीतिक और ऐतिहासिक महत्व के रहे हैं, खासकर ऊर्जा और चाबहार बंदरगाह जैसे क्षेत्रों में। हालांकि ईरान की नई गैस खोज का भारत को कोई सीधा लाभ मिलेगा या नहीं, यह अभी कहना जल्दबाजी होगी। इसके लिए प्रतिबंधों, निवेश, उत्पादन क्षमता और भविष्य के निर्यात समझौतों जैसे कई कारक महत्वपूर्ण होंगे। फिलहाल ईरान के लिए 7.5 ट्रिलियन क्यूबिक फीट से अधिक गैस की यह खोज एक बड़ी ऊर्जा उपलब्धि है। लेकिन असली परीक्षा इस विशाल भंडार को जमीन से निकालकर व्यावसायिक उत्पादन में बदलने की होगी। अमेरिकी आर्थिक दबाव और निवेश की चुनौतियों के बीच ईरान इस नए ऊर्जा खजाने का कितना फायदा उठा पाता है, इस पर दुनिया की नजर रहेगी।
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