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चीनी ऑटो कंपनी Geely की भारत में एंट्री की तैयारी, बड़े निवेश पर सरकार की नजर
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, भारत 'हॉर्स पावरट्रेन' (Horse Powertrain) के लगभग 370 मिलियन डॉलर के निवेश को मंज़ूरी देने की तैयारी कर रहा है। यह हाइब्रिड-इंजन बनाने वाली एक जॉइंट वेंचर कंपनी है, जिसे चीन के झेजियांग गीली होल्डिंग ग्रुप और फ्रांस की कार बनाने वाली कंपनी रेनॉल्ट SA का समर्थन प्राप्त है।
अगर इसे मंज़ूरी मिल जाती है, तो यह हाल के वर्षों में भारत में चीन से जुड़े सबसे बड़े मैन्युफैक्चरिंग निवेशों में से एक होगा।
इस प्रस्तावित मंज़ूरी से हॉर्स पावरट्रेन को भारत में रेनॉल्ट की मैन्युफैक्चरिंग सुविधाओं में निवेश करने की अनुमति मिल जाएगी। कंपनी देश में एडवांस्ड हाइब्रिड पावरट्रेन और इंजन सिस्टम के प्रोडक्शन की क्षमताएं स्थापित करने की योजना बना रही है।
ये हाइब्रिड सिस्टम पारंपरिक इंटरनल कंबशन इंजन को इलेक्ट्रिक मोटर और बैटरी के साथ जोड़ते हैं, जिससे फ्यूल-एफिशिएंट (कम ईंधन खपत वाली) गाड़ियों की बढ़ती मांग को पूरा करने में मदद मिलती है।
उम्मीद है कि यह निवेश चरणों में किया जाएगा, जिसकी शुरुआत चेन्नई में रेनॉल्ट के मैन्युफैक्चरिंग प्लांट से होगी। शुरुआती फोकस भारतीय बाज़ार में बिकने वाले निसान और रेनॉल्ट ब्रांड की गाड़ियों के लिए स्ट्रॉन्ग-हाइब्रिड पावरट्रेन बनाने पर होगा।
रेनॉल्ट, निसान मोटर में एक प्रमुख शेयरहोल्डर है और पहले से ही भारत में इस जापानी कंपनी के लिए गाड़ियां बनाती है।
हॉर्स पावरट्रेन का गठन 2024 में गीली और रेनॉल्ट के बीच 50:50 के जॉइंट वेंचर के तौर पर किया गया था, जिसमें बाद में सऊदी अरामको ने 10% हिस्सेदारी हासिल कर ली।
कंपनी का मुख्यालय लंदन में है और यह दुनिया भर में 18 मैन्युफैक्चरिंग प्लांट चलाती है, जिसमें लगभग 19,000 लोग काम करते हैं।
भारत से सीमा साझा करने वाले देशों की कंपनियों के लिए विदेशी निवेश नियमों में यह पहली बड़ी ढील होगी। भारत ने मार्च में मैन्युफैक्चरिंग निवेश को बढ़ावा देने के लिए मुख्य रूप से चीन पर केंद्रित प्रतिबंधों में ढील दी थी।
2020 में सीमा पर तनाव बढ़ने के बाद से भारत ने बड़े चीनी निवेशों पर काफी हद तक रोक लगा रखी है और हाल के वर्षों में बहुत कम मंज़ूरी दी गई हैं।
भारत में चीन का आखिरी बड़ा ऑटोमोटिव निवेश 2017 में हुआ था, जब SAIC मोटर ने MG मोटर लॉन्च करने के लिए जनरल मोटर्स का प्लांट खरीदा था। अब इस कंपनी में भारतीय हिस्सेदारों (जिनका नेतृत्व JSW ग्रुप कर रहा है) की बहुमत हिस्सेदारी है।
हॉर्स पावरट्रेन ने संकेत दिया है कि भारत एक रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बाज़ार है और उसने रेगुलेटरी मंज़ूरी के लिए अपना आवेदन पहले ही जमा कर दिया है।
कंपनी को जल्द ही औपचारिक फैसले की उम्मीद है और वह भारत में अन्य कार निर्माताओं के साथ सप्लाई के अवसरों पर भी विचार कर रही है। यह कदम भारत की उस बड़ी कोशिश का हिस्सा है जिसके तहत वह खुद को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब के तौर पर स्थापित करना चाहता है। साथ ही, यह हाइब्रिड गाड़ियों की बढ़ती मांग को भी सपोर्ट करता है, क्योंकि पूरी तरह से इलेक्ट्रिक गाड़ियों को अपनाने से पहले ग्राहक ज़्यादा माइलेज देने वाली टेक्नोलॉजी की ओर बढ़ रहे हैं।
रेनो और निसान भी साथ-साथ भारत के लिए अपनी रणनीति में बदलाव कर रहे हैं। वे दुनिया के सबसे तेज़ी से बढ़ते ऑटो मार्केट में अपनी मौजूदगी मज़बूत करने के लिए SUV और लोकल प्रोडक्शन बढ़ाने पर ध्यान दे रहे हैं।
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