
New Delhi नई दिल्ली : भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) को लेकर बातचीत तेज हो गई है। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने सोमवार को जानकारी दी कि इस समझौते की पहली किश्त को अंतिम रूप देने के लिए अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीर अगले सप्ताह नई दिल्ली का दौरा करेंगे।
जानकारी के अनुसार, जैमिसन ग्रीर 22 जून को भारत पहुंचेंगे। इसके बाद 23 और 24 जून को उनकी मुलाकात वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल से होगी। इन बैठकों में दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्तों को और मजबूत करने तथा समझौते के ढांचे को अंतिम रूप देने पर चर्चा होगी।
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच चल रही बातचीत का मुख्य फोकस फ्रेमवर्क डील को अंतिम रूप देने पर होगा। उन्होंने बताया कि दोनों पक्ष इस दिशा में सकारात्मक और रचनात्मक तरीके से आगे बढ़ रहे हैं।
यह प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौता दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को नई दिशा देने की क्षमता रखता है। इसके तहत व्यापार बाधाओं को कम करने, निवेश को बढ़ावा देने और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और अमेरिका के बीच यह समझौता न केवल व्यापारिक संबंधों को मजबूत करेगा, बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की भूमिका को भी और सशक्त बना सकता है।
इससे पहले भी दोनों देशों के बीच व्यापार से जुड़े कई दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन अब पहली किश्त को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया को महत्वपूर्ण प्रगति के रूप में देखा जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, बातचीत के दौरान दोनों पक्ष कृषि, तकनीक, डिजिटल व्यापार और औद्योगिक उत्पादों जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दे सकते हैं। इसके अलावा, आयात-निर्यात नियमों और शुल्क संरचना को सरल बनाने पर भी चर्चा की संभावना है।
भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंध पहले से ही मजबूत रहे हैं, लेकिन हाल के वर्षों में दोनों देशों ने इसे और आगे बढ़ाने की दिशा में कई प्रयास किए हैं। यह प्रस्तावित समझौता उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
आगामी वार्ता से यह उम्मीद जताई जा रही है कि दोनों देश एक ऐसे ढांचे पर सहमत हो सकते हैं, जिससे द्विपक्षीय व्यापार में स्थिरता और पारदर्शिता बढ़ेगी।
फिलहाल सभी की नजरें 22 से 24 जून के बीच होने वाली इन अहम बैठकों पर टिकी हुई हैं, जिनके परिणाम आने वाले समय में भारत-अमेरिका आर्थिक संबंधों को नई दिशा दे सकते हैं।





