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पेट्रोल एक्सपोर्ट टैक्स जीरो डीजल पर राहत 15 अगस्त को सरकार ने लिया अहम फैसला
नई दिल्ली : स्वतंत्रता दिवस के मौके पर पेट्रोल और डीजल को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स को पूरी तरह खत्म कर दिया है। वहीं डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात शुल्क में भी कटौती की गई है। नई दरें 15 अगस्त से लागू हो गई हैं।
सरकार की ओर से जारी आदेश के अनुसार, पेट्रोल एक्सपोर्ट पर लगने वाला टैक्स अब 0 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। इससे पहले पेट्रोल निर्यात पर 3.5 रुपये प्रति लीटर का शुल्क लागू था। वहीं डीजल निर्यात शुल्क को 25.5 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 24 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है।
पेट्रोल एक्सपोर्ट टैक्स हुआ खत्म
केंद्र सरकार ने पेट्रोल निर्यात पर लगने वाले अतिरिक्त शुल्क को समाप्त कर दिया है। इसका मतलब है कि अब विदेशों में पेट्रोल भेजने वाली कंपनियों पर पेट्रोल निर्यात के लिए कोई विंडफॉल टैक्स नहीं लगेगा। सरकार समय-समय पर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों के आधार पर इन निर्यात शुल्कों की समीक्षा करती है।
डीजल पर भी मिली राहत
डीजल निर्यात पर लगने वाले टैक्स में भी कटौती की गई है। पहले यह शुल्क 25.5 रुपये प्रति लीटर था, जिसे घटाकर 24 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। इसके अलावा एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात शुल्क को भी 22 रुपये से घटाकर 19.5 रुपये प्रति लीटर किया गया है।
घरेलू पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर सीधा असर नहीं
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह बदलाव केवल निर्यात किए जाने वाले पेट्रोलियम उत्पादों पर लागू है। घरेलू बाजार में बिकने वाले पेट्रोल और डीजल पर लगने वाले टैक्स में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसलिए आम उपभोक्ताओं के लिए पेट्रोल-डीजल की मौजूदा खुदरा कीमतों पर इसका सीधा असर नहीं पड़ेगा।
क्यों लगाया गया था विंडफॉल टैक्स?
भारत सरकार ने पहली बार जुलाई 2022 में विंडफॉल टैक्स लगाया था। इसका उद्देश्य तेल कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़े हुए दामों से होने वाले असाधारण मुनाफे पर अतिरिक्त कर लगाना था। बाद में इसे हटाया गया था, लेकिन वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बाद इसे दोबारा लागू किया गया। सरकार हर पखवाड़े इसकी समीक्षा करती है।
तेल कंपनियों को मिलेगी राहत
पेट्रोल निर्यात शुल्क खत्म होने और डीजल शुल्क घटने से तेल कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में निर्यात करने में राहत मिल सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला वैश्विक तेल बाजार की मौजूदा परिस्थितियों और रिफाइनरी मार्जिन को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
हालांकि, घरेलू वाहन चालकों को पेट्रोल-डीजल के दामों में तुरंत किसी बदलाव की उम्मीद नहीं करनी चाहिए, क्योंकि यह फैसला निर्यात शुल्क से जुड़ा है।
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