
Business: अगर आपने आयकर रिटर्न (ITR) भरते समय जल्दबाजी में गलत फॉर्म चुन लिया है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। आयकर नियमों के अनुसार, ऐसी गलती को बाद में रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करके सुधारा जा सकता है। हालांकि, इसे नजरअंदाज करने पर आपका रिटर्न डिफेक्टिव या अमान्य भी माना जा सकता है, जिससे टैक्स रिफंड और अन्य लाभ प्रभावित हो सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, गलत ITR फॉर्म भरने पर रिटर्न पर गंभीर असर पड़ सकता है। इससे रिफंड में देरी, आयकर विभाग का नोटिस और कुछ मामलों में रिटर्न को अमान्य मानने जैसी स्थिति भी बन सकती है। इसलिए जैसे ही गलती का पता चले, उसे तुरंत ठीक करना जरूरी है।
आयकर अधिनियम की धारा 139(5) के तहत करदाता रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल कर सकते हैं। इस प्रक्रिया के जरिए पहले भरे गए रिटर्न को बदलकर सही ITR फॉर्म चुना जा सकता है। उदाहरण के तौर पर, अगर किसी ने गलत तरीके से ITR-1 भर दिया है जबकि उसे ITR-2 भरना चाहिए था, तो वह रिवाइज्ड रिटर्न से इसे सुधार सकता है। हालांकि, यदि आयकर विभाग धारा 139(9) के तहत डिफेक्टिव रिटर्न का नोटिस जारी करता है, तो पहले उस नोटिस का जवाब देना जरूरी होता है। इसके बाद ही सुधार की प्रक्रिया आगे बढ़ती है।
रिवाइज्ड रिटर्न भरने की संख्या पर कोई सीमा नहीं है, यानी तय समय के भीतर इसे कई बार सुधारा जा सकता है। लेकिन विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि बार-बार बदलाव से बचें और सभी गलतियों को एक साथ सुधारें। सरकार ने बजट 2026 में रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करने की समय सीमा बढ़ाकर 31 मार्च 2027 कर दी है। हालांकि, इसके साथ शुल्क भी लागू किया गया है। 31 दिसंबर 2026 तक रिवाइज्ड रिटर्न फ्री में भरा जा सकता है, जबकि इसके बाद ₹5,000 तक शुल्क देना पड़ सकता है।
गलत फॉर्म को ठीक न करने पर रिटर्न अमान्य हो सकता है, टैक्स रिफंड रुक सकता है, नोटिस आ सकता है और जुर्माना भी लग सकता है। इसके अलावा टैक्स से जुड़े कई लाभ भी खत्म हो सकते हैं। यदि रिवाइज्ड रिटर्न की समय सीमा भी निकल जाती है, तो अंतिम विकल्प के रूप में ITR-U (Updated Return) का सहारा लेना पड़ता है, जिसमें अतिरिक्त टैक्स और ब्याज देना होता है। इसलिए समय रहते सुधार करना ही सबसे बेहतर विकल्प माना जाता है।





