
Mumbai मुंबई : लार्सन एंड टूब्रो (L&T) ने 31 मार्च 2026 को समाप्त हुई चौथी तिमाही के लिए अपने वित्तीय परिणाम जारी किए हैं, जिसमें कंपनी ने मजबूत राजस्व वृद्धि दर्ज की है। कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 82,762 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही के 74,392 करोड़ रुपये की तुलना में 11 प्रतिशत अधिक है। यह वृद्धि कंपनी के इंफ्रास्ट्रक्चर और अंतरराष्ट्रीय परियोजनाओं में बेहतर निष्पादन को दर्शाती है।
हालांकि मुनाफे के मोर्चे पर तस्वीर मिश्रित रही। टैक्स के बाद रिकरिंग प्रॉफिट (Recurring PAT) साल-दर-साल 5 प्रतिशत बढ़कर 5,289 करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि पिछले वर्ष यह 5,022 करोड़ रुपये था। वहीं कुल कंसोलिडेटेड PAT 3 प्रतिशत घटकर 5,326 करोड़ रुपये पर आ गया, जो पिछले वर्ष की समान तिमाही में 5,497 करोड़ रुपये था। कंपनी ने बताया कि पिछले वर्ष की तुलना में बेस इफेक्ट और कुछ विशेष लाभों की अनुपस्थिति के कारण यह गिरावट दर्ज हुई।
तिमाही के दौरान L&T के अंतरराष्ट्रीय कारोबार ने मजबूत प्रदर्शन किया। कंपनी का ओवरसीज रेवेन्यू 43,747 करोड़ रुपये रहा, जो कुल रेवेन्यू का 53 प्रतिशत हिस्सा है। यह दर्शाता है कि कंपनी की वैश्विक परियोजनाओं और मैन्युफैक्चरिंग ऑपरेशंस में लगातार विस्तार हो रहा है और विदेशों में उसकी पकड़ मजबूत हो रही है।
ऑपरेटिंग स्तर पर कंपनी का EBITDA 5 प्रतिशत बढ़कर 8,610 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। हालांकि, बढ़ते खर्चों के दबाव के कारण EBITDA मार्जिन में गिरावट देखने को मिली। मार्जिन पिछले वर्ष के 11 प्रतिशत से घटकर 10.4 प्रतिशत पर आ गया। यह गिरावट मुख्य रूप से बढ़ते ऑपरेशनल खर्चों के कारण हुई, जो साल-दर-साल 12 प्रतिशत बढ़कर 74,152 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
विश्लेषकों का मानना है कि L&T का प्रदर्शन स्थिर विकास की दिशा में है, खासकर तब जब कंपनी बड़े अंतरराष्ट्रीय और घरेलू इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में सक्रिय भूमिका निभा रही है। हालांकि बढ़ते खर्च और मार्जिन पर दबाव निकट भविष्य में चुनौती बने रह सकते हैं।
कंपनी के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट्स एक मजबूत ग्रोथ इंजन के रूप में उभर रहे हैं, जहां कुल राजस्व का आधे से अधिक हिस्सा विदेशों से आ रहा है। यह वैश्विक बाजारों में L&T की प्रतिस्पर्धी क्षमता और इंजीनियरिंग दक्षता को दर्शाता है।
कुल मिलाकर, L&T के Q4 नतीजे बताते हैं कि कंपनी मजबूत राजस्व वृद्धि बनाए रखने में सफल रही है, लेकिन लाभप्रदता पर लागत दबाव का असर दिखाई दे रहा है। आने वाले समय में कंपनी की रणनीति का फोकस लागत नियंत्रण और मार्जिन सुधार पर रह सकता है।





