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विशाखापत्तनम में चिप प्लांट की शुरुआत, भारत की सेमीकंडक्टर यात्रा को नई गति

Kavita2
1 Aug 2026 4:24 PM IST
विशाखापत्तनम में चिप प्लांट की शुरुआत, भारत की सेमीकंडक्टर यात्रा को नई गति
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विशाखापत्तनम: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम स्थित तारलुवाड़ा में ASIP टेक्नोलॉजीज की सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग यूनिट की आधारशिला रखी। यह परियोजना भारत में सेमीकंडक्टर निर्माण क्षमता बढ़ाने और देश को वैश्विक चिप सप्लाई चेन में मजबूत स्थान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

₹2,500 करोड़ की लागत वाली यह परियोजना आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्ट (OSAT) यूनिट के रूप में विकसित की जाएगी। इसे ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन’ (ISM 1.0) के तहत मंजूरी मिली है और यह आंध्र प्रदेश तथा दक्षिण भारत में स्वीकृत पहली सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग यूनिट बताई जा रही है।

शिलान्यास कार्यक्रम में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान राज्य और केंद्र सरकार के कई अधिकारी भी मौजूद रहे।

भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को मजबूती

सेमीकंडक्टर आज के डिजिटल युग की सबसे महत्वपूर्ण तकनीकों में से एक है। मोबाइल फोन, इलेक्ट्रिक वाहन, रक्षा उपकरण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), दूरसंचार और इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों में चिप्स की अहम भूमिका होती है।

भारत लंबे समय से सेमीकंडक्टर निर्माण क्षेत्र में अपनी क्षमता बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। सरकार का लक्ष्य देश में चिप निर्माण का मजबूत इकोसिस्टम तैयार करना और आयात पर निर्भरता कम करना है।

ASIP टेक्नोलॉजीज की यह यूनिट इसी प्रयास का हिस्सा है। इससे देश में सेमीकंडक्टर असेंबली, टेस्टिंग और पैकेजिंग क्षमता को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

OSAT यूनिट की क्या होगी भूमिका

OSAT यानी आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली एंड टेस्ट यूनिट चिप निर्माण प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। इसमें तैयार किए गए सेमीकंडक्टर डिवाइस की पैकेजिंग, असेंबली और गुणवत्ता जांच की जाती है।

सेमीकंडक्टर उद्योग में केवल चिप डिजाइन और निर्माण ही नहीं, बल्कि पैकेजिंग और टेस्टिंग की क्षमता भी बेहद जरूरी होती है। इस क्षेत्र में मजबूत आधार बनने से भारत वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन में अपनी भूमिका बढ़ा सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की परियोजनाएं देश में तकनीकी विशेषज्ञता, रोजगार और निवेश के नए अवसर पैदा कर सकती हैं।

आंध्र प्रदेश के लिए बड़ा निवेश

यह परियोजना आंध्र प्रदेश के औद्योगिक विकास के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विशाखापत्तनम पहले से ही आईटी, मैन्युफैक्चरिंग और समुद्री उद्योगों के लिए एक प्रमुख केंद्र है।

सेमीकंडक्टर यूनिट के आने से राज्य में इलेक्ट्रॉनिक्स और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे और सहायक उद्योगों को भी फायदा मिल सकता है।

राज्य सरकार लंबे समय से इलेक्ट्रॉनिक्स और तकनीकी उद्योगों में निवेश आकर्षित करने की कोशिश कर रही है। यह परियोजना उस दिशा में एक अहम उपलब्धि मानी जा रही है।

इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन पर जोर

केंद्र सरकार ने भारत को सेमीकंडक्टर निर्माण का प्रमुख केंद्र बनाने के उद्देश्य से इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन शुरू किया है। इसके तहत चिप निर्माण, पैकेजिंग, डिजाइन और अनुसंधान के क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

दुनिया भर में सेमीकंडक्टर की मांग तेजी से बढ़ रही है। खासकर AI, इलेक्ट्रिक वाहन और डिजिटल सेवाओं के विस्तार के कारण चिप्स की जरूरत लगातार बढ़ रही है।

सरकार का मानना है कि भारत में मजबूत सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम बनने से न केवल घरेलू जरूरतें पूरी होंगी, बल्कि देश वैश्विक बाजार में भी प्रतिस्पर्धा कर सकेगा।

रोजगार और तकनीकी विकास की उम्मीद

ASIP टेक्नोलॉजीज की यूनिट से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है। इसके साथ ही इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स और तकनीकी क्षेत्र में काम करने वाले युवाओं के लिए नए अवसर खुल सकते हैं।

सेमीकंडक्टर उद्योग के विकास के लिए कुशल कर्मचारियों की जरूरत होती है। ऐसे में इस तरह की परियोजनाएं प्रशिक्षण और कौशल विकास को भी बढ़ावा दे सकती हैं।

भारत की चिप निर्माण यात्रा में नया अध्याय

विशाखापत्तनम में इस यूनिट की शुरुआत भारत की सेमीकंडक्टर यात्रा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव मानी जा रही है। वैश्विक स्तर पर चिप निर्माण में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच भारत अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर ध्यान दे रहा है।

ASIP टेक्नोलॉजीज की यह परियोजना देश में हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने, निवेश आकर्षित करने और आत्मनिर्भर इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र के निर्माण में योगदान दे सकती है।

सरकार और उद्योग जगत को उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में ऐसी और परियोजनाएं भारत को सेमीकंडक्टर क्षेत्र में एक मजबूत खिलाड़ी बनाने में मदद करेंगी।

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