
नई दिल्ली। आदित्य बिड़ला ग्रुप ने रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। ग्रुप की कंपनी ग्रासिम इंडस्ट्रीज की इकाई आदित्य बिड़ला रिन्यूएबल्स लिमिटेड (ABREN) ने शेल ओवरसीज इन्वेस्टमेंट B.V. से स्प्रिंग एनर्जी (Sprng Energy) के अधिग्रहण के लिए समझौता किया है। यह सौदा करीब 1.8 अरब डॉलर यानी लगभग 17,200 करोड़ रुपये में होने जा रहा है।
इस अधिग्रहण के बाद ABREN की अक्षय ऊर्जा क्षमता में बड़ा इजाफा होगा। कंपनी के अनुसार, डील पूरी होने के बाद उसकी कुल रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता बढ़कर लगभग 9.3 गीगावाट-पीक (GWp) तक पहुंच जाएगी। इससे भारत में एक बड़े ग्रीन एनर्जी प्लेटफॉर्म के निर्माण की दिशा में कंपनी को मजबूती मिलेगी।
आदित्य बिड़ला ग्रुप ने बताया कि इस अधिग्रहण में स्प्रिंग एनर्जी के मौजूदा प्रोजेक्ट शामिल होंगे। इनमें लगभग 3.3 GWp क्षमता वाले चालू प्रोजेक्ट और करीब 1.7 GWp क्षमता वाले निर्माणाधीन प्रोजेक्ट शामिल हैं। इसके अलावा कंपनी के पास भविष्य की विस्तार योजनाओं के लिए भी महत्वपूर्ण अवसर उपलब्ध होंगे।
रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है और बड़ी कंपनियां इस क्षेत्र में निवेश बढ़ा रही हैं। बिड़ला ग्रुप का यह कदम इसी बढ़ते बाजार को देखते हुए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कंपनी का लक्ष्य स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देना और देश के ऊर्जा परिवर्तन अभियान में बड़ी भूमिका निभाना है।
स्प्रिंग एनर्जी भारत में सोलर और विंड एनर्जी परियोजनाओं के क्षेत्र में काम करने वाली प्रमुख कंपनियों में शामिल है। इसके पास कई राज्यों में अक्षय ऊर्जा परियोजनाएं हैं। इस अधिग्रहण से ABREN को न केवल अपनी क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी, बल्कि रिन्यूएबल एनर्जी पोर्टफोलियो को मजबूत करने का अवसर भी मिलेगा।
इस डील के तहत शेल ओवरसीज को मिलने वाली इक्विटी राशि कर्ज, नकदी और अन्य समायोजन के बाद तय की जाएगी। दोनों कंपनियों के बीच हुए समझौते के बाद नियामकीय मंजूरियां और अन्य जरूरी प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी।
भारत में ग्रीन एनर्जी का बाजार लगातार तेजी से बढ़ रहा है। सरकार भी सौर और पवन ऊर्जा जैसे क्षेत्रों को बढ़ावा दे रही है। ऐसे में बड़े कारोबारी समूह इस क्षेत्र में अपनी मौजूदगी मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।
रिलायंस इंडस्ट्रीज, अदाणी ग्रुप और अन्य बड़ी कंपनियां पहले से ही ऊर्जा क्षेत्र में बड़े निवेश कर रही हैं। अब आदित्य बिड़ला ग्रुप की इस डील से रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में प्रतिस्पर्धा और बढ़ने की उम्मीद है।
कंपनी का मानना है कि स्प्रिंग एनर्जी के अधिग्रहण से उसे तकनीकी क्षमता, परियोजनाओं के विस्तार और बाजार में मजबूत स्थिति बनाने में मदद मिलेगी। यह सौदा भारत के ग्रीन एनर्जी लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी को भी दर्शाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले वर्षों में स्वच्छ ऊर्जा की मांग तेजी से बढ़ेगी। ऐसे में रिन्यूएबल एनर्जी क्षेत्र में निवेश करने वाली कंपनियों को लंबी अवधि में फायदा मिल सकता है। बिड़ला ग्रुप का यह अधिग्रहण इसी भविष्य की संभावनाओं को देखते हुए एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है।





