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KPMG रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता, 56% बिजनेस लीडर्स को बड़े संकट का डर

Ratna Netam
8 Nov 2026 3:40 PM IST
KPMG रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता, 56% बिजनेस लीडर्स को बड़े संकट का डर
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नई दिल्ली। वैश्विक अर्थव्यवस्था में लगातार बदलते हालात और कारोबार के सामने उभरती नई चुनौतियों के बीच KPMG की एक रिपोर्ट ने बिजनेस जगत की चिंताओं को सामने रखा है। रिपोर्ट के अनुसार, 56 प्रतिशत बिजनेस लीडर्स को आशंका है कि अगले पांच वर्षों में बाहरी झटके उनके कारोबारी संचालन को गंभीर रूप से बाधित कर सकते हैं। यह आंकड़ा बताता है कि दुनिया भर में कंपनियों के शीर्ष प्रबंधन के सामने भविष्य की अनिश्चितताओं से निपटना एक महत्वपूर्ण चुनौती बनता जा रहा है। बदलते आर्थिक माहौल, तकनीकी बदलाव, आपूर्ति श्रृंखला की समस्याओं और वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए कारोबारियों के लिए जोखिम प्रबंधन पहले से अधिक जरूरी हो गया है।KPMG की रिपोर्ट में सामने आया यह आंकड़ा कारोबारी जगत के उस दृष्टिकोण को दर्शाता है, जिसमें भविष्य के अवसरों के साथ संभावित संकटों को लेकर भी चिंता बनी हुई है। कंपनियों के सामने केवल अपने उत्पादों और सेवाओं की मांग बनाए रखने की चुनौती नहीं है, बल्कि ऐसी परिस्थितियों के लिए तैयार रहने की जरूरत भी है, जो उनके नियंत्रण से बाहर हो सकती हैं।
बाहरी झटकों से कारोबार प्रभावित होने की आशंका
रिपोर्ट के अनुसार, 56 प्रतिशत बिजनेस लीडर्स मानते हैं कि अगले पांच वर्षों में बाहरी परिस्थितियां उनके कारोबार को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती हैं। बाहरी झटकों से आशय ऐसी घटनाओं से है, जिन पर किसी कंपनी का सीधा नियंत्रण नहीं होता, लेकिन जिनका प्रभाव उसके संचालन, वित्तीय स्थिति और व्यावसायिक योजनाओं पर पड़ सकता है।इनमें वैश्विक आर्थिक मंदी, अंतरराष्ट्रीय व्यापार में बाधाएं, भू-राजनीतिक तनाव, प्राकृतिक आपदाएं और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान जैसी परिस्थितियां शामिल हो सकती हैं। हालांकि, उपलब्ध आंकड़े से यह स्पष्ट नहीं होता कि सर्वेक्षण में शामिल नेताओं ने इनमें से किस जोखिम को सबसे गंभीर माना है।कारोबारी विशेषज्ञों के दृष्टिकोण से ऐसी अनिश्चितताओं के बीच कंपनियों के लिए अपनी कार्यप्रणाली को अधिक लचीला बनाना आवश्यक होता है। किसी एक बाजार, आपूर्तिकर्ता या संसाधन पर अत्यधिक निर्भरता संकट के समय कारोबार के लिए परेशानी पैदा कर सकती है।
अगले पांच वर्षों को लेकर बढ़ी चिंता
KPMG की रिपोर्ट में पांच वर्षों की अवधि का उल्लेख विशेष महत्व रखता है। यह संकेत देता है कि कारोबारी नेतृत्व केवल तत्काल चुनौतियों को लेकर ही चिंतित नहीं है, बल्कि मध्यम अवधि की व्यावसायिक योजनाओं में भी जोखिमों को ध्यान में रख रहा है।आमतौर पर कंपनियां अपने विस्तार, निवेश, उत्पादन क्षमता और तकनीकी विकास से जुड़ी योजनाएं कई वर्षों को ध्यान में रखकर तैयार करती हैं। ऐसे में यदि अचानक कोई बाहरी संकट उत्पन्न होता है, तो इन योजनाओं को बदलना पड़ सकता है।उदाहरण के लिए, अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे माल की कीमतों में अचानक वृद्धि होने से उत्पादन लागत बढ़ सकती है। इसी तरह परिवहन व्यवस्था प्रभावित होने पर सामान की आपूर्ति में देरी हो सकती है। ऐसी परिस्थितियां कंपनी के मुनाफे, ग्राहकों और कर्मचारियों पर भी असर डाल सकती हैं।
जोखिम प्रबंधन को प्राथमिकता देने की जरूरत
रिपोर्ट में सामने आई आशंका कंपनियों के लिए जोखिम प्रबंधन के महत्व को रेखांकित करती है। कारोबार को लंबे समय तक स्थिर बनाए रखने के लिए केवल बिक्री और मुनाफे पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। संभावित संकटों की पहचान करना और उनके प्रभाव को कम करने के लिए पहले से तैयारी करना भी जरूरी है।कंपनियां इसके लिए आपातकालीन योजनाएं तैयार कर सकती हैं। इनमें वैकल्पिक आपूर्तिकर्ताओं की व्यवस्था, वित्तीय संसाधनों का बेहतर प्रबंधन और महत्वपूर्ण सेवाओं को बिना रुकावट जारी रखने की रणनीति शामिल हो सकती है।इसके अलावा कंपनियों के लिए नियमित रूप से अपने जोखिमों की समीक्षा करना भी महत्वपूर्ण है। इससे बदलती परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लेने में सहायता मिल सकती है।
तकनीकी बदलाव भी कारोबार के लिए चुनौती
आज के कारोबारी वातावरण में तकनीक का महत्व लगातार बढ़ रहा है। डिजिटल सेवाओं, ऑटोमेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते उपयोग ने कंपनियों के लिए नए अवसर पैदा किए हैं। हालांकि, तकनीक पर बढ़ती निर्भरता के साथ साइबर सुरक्षा और डिजिटल संचालन से जुड़े जोखिम भी महत्वपूर्ण हो गए हैं।किसी कंपनी के डिजिटल सिस्टम में बड़ी तकनीकी खराबी आने या साइबर हमले की स्थिति में उसकी सेवाएं बाधित हो सकती हैं। इससे ग्राहकों का भरोसा और कंपनी की वित्तीय स्थिति प्रभावित हो सकती है।ऐसे जोखिमों को देखते हुए डिजिटल सुरक्षा, डेटा संरक्षण और तकनीकी ढांचे को मजबूत बनाना कारोबारी निरंतरता के लिए आवश्यक है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि KPMG के सर्वेक्षण में साइबर जोखिम को विशेष रूप से प्रमुख चिंता बताया गया है।
कर्मचारियों और ग्राहकों पर भी पड़ सकता है असर
बाहरी झटकों का प्रभाव केवल कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहता। यदि किसी कारोबार का संचालन गंभीर रूप से बाधित होता है, तो इसका असर कर्मचारियों, ग्राहकों और उससे जुड़े अन्य व्यवसायों पर भी पड़ सकता है।उत्पादन या सेवाओं में रुकावट आने से ग्राहकों को समय पर सामान और सुविधाएं उपलब्ध कराने में कठिनाई हो सकती है। वहीं, लंबे समय तक संकट बने रहने पर कंपनियों को अपनी लागत और निवेश संबंधी योजनाओं की समीक्षा करनी पड़ सकती है।इसलिए किसी भी कारोबारी संकट से निपटने की तैयारी में कर्मचारियों की सुरक्षा, ग्राहकों के हित और आवश्यक सेवाओं की निरंतरता को महत्व देना जरूरी है।
भविष्य के लिए मजबूत रणनीति बनाने पर जोर
KPMG की रिपोर्ट का प्रमुख संकेत यह है कि कारोबारी नेतृत्व भविष्य में संभावित व्यवधानों को गंभीरता से देख रहा है। 56 प्रतिशत नेताओं की ओर से जताई गई आशंका यह दर्शाती है कि अनिश्चित परिस्थितियों के बीच कंपनियों के लिए तैयार रहना महत्वपूर्ण हो गया है।हालांकि, यह आंकड़ा भविष्य में किसी संकट के निश्चित रूप से आने की भविष्यवाणी नहीं है। यह सर्वेक्षण में शामिल कारोबारी नेताओं की अपेक्षाओं और चिंताओं को दर्शाता है।आने वाले पांच वर्षों में कंपनियों की सफलता केवल नए अवसरों का लाभ उठाने पर निर्भर नहीं करेगी, बल्कि इस बात पर भी निर्भर करेगी कि वे अप्रत्याशित परिस्थितियों में अपने संचालन को कितनी प्रभावी तरीके से जारी रख पाती हैं।
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