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जानिए क्या है सरकार की EV को लेकर नया प्लान, करोड़ों खर्च कर तैयार होगा पूरा सिस्टम

Gulabi
12 May 2021 11:11 AM GMT
जानिए क्या है सरकार की EV को लेकर नया प्लान, करोड़ों खर्च कर तैयार होगा पूरा सिस्टम
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भारत सरकार देश में इलेक्ट्रिक वाहनों को ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल में लाए जाने पर जोर दे रही है

भारत सरकार देश में इलेक्ट्रिक वाहनों को ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल में लाए जाने पर जोर दे रही है. इसके लिए कई केंद्रीय योजनाएं चलाई जा रही हैं. राज्य भी अपने स्तर पर इलेक्ट्रिक वाहनों के परिचालन को बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं. सरकारों की तरफ से ऐसे वाहन खरीद पर सब्सिडी दी जा रही है ताकि इलेक्ट्रिक गाड़ियों को प्रोत्साहन मिल सके. इसी क्रम में केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावडेकर ने बुधवार को एक कैबिनेट मीटिंग में कहा कि पूरे देश में 2800 चार्जिंग स्टेशन बनाए जाएंगे जहां इलेक्ट्रिक गाड़ियां चार्ज हो सकेंगी.


कैबिनेट बैठक में प्रकाश जावडेकर ने एक और बड़े फैसले का ऐलान किया. उन्होंने कहा, उन्नत रसायन सेल बैटरी भंडारण (advanced chemistry cell storage) पर राष्ट्रीय कार्यक्रम से 45,000 करोड़ रुपये का निवेश होने की संभावना है. सरकार इस दिशा में तेजी से बढ़ेगी. बैटरी स्टोरेज के महत्व को देखते हुए सरकार इस काम में करोड़ों रुपये खर्च करने जा रही है.

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश में बैटरी स्टोरेज इक्विपमेंट के आयात पर 20 हजार करोड़ रुपये खर्च होता है. इस दिशा में देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए काम होगा. सरकार इस क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) के तहत 18,100 करोड़ रुपये जारी करेगी.

भारत में बनेगी बैटरी
पीएलआई के जरिये आयात पर निर्भरता कम की जाएगी और जो उपकरण भारत में नहीं बनते हैं, वे अब बनने शुरू हो जाएंगे. इससे इलेक्ट्रिक गाड़ियों के परिचालन और परिवहन को बहुत बढ़ावा मिलेगा. दो पहिया, तीन पहिया और चार पहिया गाड़ियों के अलावा भारी गाड़ियों के बैटरी से परिचालन पर प्रयोग तैयार किया गया है. ऐसी गाड़ियां बैटरी पर चल सकेंगी.

लंबी और देर तक चलने वाली बैटरी, जल्दी चार्ज होने वाली बैटरी आज समय की मांग है. बैटरी स्टोरेज देश में अब तक कम था क्योंकि इसके उपकरण बनते नहीं थे. इसके साथ ही भारत में सोलर पावर प्लांट पर तेजी से काम हो रहा है. कई सोलर पावर प्लांट लगे हैं और अभी 136 गीगावाट (1 लाख 36 हजार मेगावाट) बिजली का उत्पादन हो रहा है.

बैटरी का इस्तेमाल कहां
इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रीकल्स में बैटरी का बहुत उपयोग होता है. रेलवे में बैटरी स्टोरेज की अपार संभावनाएं हैं. बैटरी स्टोरेज आसान होने के बाद शिपिंग के क्षेत्र में एक बड़ी क्रांति होने वाली है. कई जगह बिजली के बैकअप के लिए डीजल जनरेटर्स लगाए जाते हैं. बैटरी स्टोरेज बढ़ने से यह डीजल जनरेटर का विकल्प बनेगा. छत पर लगने वाले सोलर पैनल का इस्तेमाल शाम के बाद नहीं होता. इसलिए घर के दीये जलाने हों या कुछ और रोशनी का काम करना हो, बैटरी स्टोरेज से सोलर पैनल का इस्तेमाल बढ़ जाएगा.

18,100 करोड़ का निवेश
सरकार ने इस काम के लिए पीएलआई के जरिये 18,100 करोड़ रुपये देने का ऐलान किया है. इससे बैटरी स्टोरेज बढ़ेगा और आने वाले कुछ सालों में 50 हजार मेगावाट तक बिजली पैदा होगी. आगे इसका उत्पादन और बढ़ेगा. इस क्षेत्र में देसी और विदेशी निवेश की संभावनाएं बहुत हैं और 45 हजार करोड़ रुपये निवेश आने की उम्मीद है.

पीएलआई कंपनियों को देने के लिए कुछ मापदंड होंगे. कौन सी कंपनी स्थानीय माल का ज्यादा इस्तेमाल करती है, किसी कंपनी की बैटरी ज्यादा बिकती है और उस कंपनी की बैटरी कितनी क्षमतावान है, इन बातों को ध्यान में रखते हुए पीएलआई जारी की जाएगी. बैटरी में लगने वाला कॉपर अभी विदेश से मंगाया जाता है, लेकिन अब उसे देश में बनाया जाएगा. इससे क्वालिटी अच्छी मिलेगी और माल भी सस्ता होगा.

इस योजना से संभावित लाभ और परिणाम
इस कार्यक्रम के तहत भारत में कुल 50 गीगावॉट ऑवर्स की एसीसी निर्माण सुविधा की स्थापना
एसीसी बैटरी भंडारण निर्माण परियोजनाओं में लगभग 45,000 करोड़ रुपये का सीधा निवेश
भारत में बैटरी निर्माण की मांग को पूरा करना
मेक इन इंडिया को बढ़ावा, घरेलू स्तर पर बैटरी बनाने पर जोर और आयात पर निर्भरता कम करना
उम्मीद की जाती है कि योजना के तहत एसीसी बैटरी निर्माण से इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) को प्रोत्साहन मिलेगा और पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता कम होगी
इसके कारण 2,00,000 करोड़ रुपये से 2,50,000 करोड़ रुपये की बचत होगी
बैटरी स्टोरेज के निर्माण से ईवी की मांग बढ़ेगी, जिनसे कम प्रदूषण होता है
बैटरी स्टोरेज से ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन में भारत की हिस्सेदारी में कमी आएगी
भारत इस दिशा में जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए प्रतिबद्ध है
हर वर्ष लगभग 20,000 करोड़ रुपये का आयात बचेगा
नई और अनुकूल बैटरी टेक्नोलॉजी को प्रोत्साहन


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