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KIMS का पहली तिमाही का मुनाफा 47% घटा

Kavita2
4 Aug 2026 9:25 AM IST
KIMS का पहली तिमाही का मुनाफा 47% घटा
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नई दिल्ली। देश की प्रमुख मल्टी-स्पेशियलिटी हॉस्पिटल चेन कृष्णा इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (KIMS) ने वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) की पहली तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी के वित्तीय परिणामों के अनुसार, 30 जून 2026 को समाप्त तिमाही में उसका कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 47.2 प्रतिशत घटकर 41.5 करोड़ रुपये रह गया। हालांकि, मुनाफे में तेज गिरावट के बावजूद कंपनी ने अपने परिचालन कारोबार में मजबूत प्रदर्शन किया और राजस्व (रेवेन्यू) के साथ-साथ ऑपरेटिंग प्रॉफिट में भी उल्लेखनीय दोहरे अंकों (डबल-डिजिट) की वृद्धि दर्ज की।

स्टॉक एक्सचेंज को दी गई जानकारी के अनुसार, पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही यानी Q1 FY26 में कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट 78.6 करोड़ रुपये था, जो चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में घटकर 41.5 करोड़ रुपये पर आ गया। इस प्रकार कंपनी के शुद्ध लाभ में 47.2 प्रतिशत की सालाना गिरावट दर्ज की गई। हालांकि कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि उसके परिचालन प्रदर्शन में मजबूती बनी हुई है और अस्पताल नेटवर्क के विस्तार का सकारात्मक असर कारोबार पर दिखाई दे रहा है।

कंपनी का परिचालन से होने वाला राजस्व (Revenue from Operations) पहली तिमाही में 35.3 प्रतिशत की प्रभावशाली वृद्धि के साथ 1,179.5 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। पिछले वर्ष की इसी अवधि में यह आंकड़ा 871.6 करोड़ रुपये था। इस बढ़ोतरी का प्रमुख कारण अस्पतालों में आउटपेशेंट (ओपीडी) और इनपेशेंट (आईपीडी) मरीजों की संख्या में वृद्धि तथा नए अस्पतालों और चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार को माना जा रहा है।

कंपनी के अनुसार, स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती मांग और विभिन्न शहरों में अपने नेटवर्क को मजबूत करने की रणनीति का सीधा लाभ पहली तिमाही के कारोबार में देखने को मिला। नए अस्पतालों के संचालन और मौजूदा केंद्रों में मरीजों की संख्या बढ़ने से राजस्व में लगातार सुधार हुआ है। कंपनी का मानना है कि आने वाली तिमाहियों में भी यह वृद्धि जारी रहने की संभावना है।

विश्लेषकों का कहना है कि स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में विस्तार कर रही कंपनियों के लिए शुरुआती दौर में पूंजीगत निवेश और परिचालन खर्च बढ़ना सामान्य बात है। ऐसे में कई बार राजस्व में वृद्धि होने के बावजूद शुद्ध लाभ पर दबाव दिखाई देता है। KIMS के मामले में भी यही स्थिति देखने को मिली, जहां कारोबार का आकार तेजी से बढ़ा, लेकिन नेट प्रॉफिट में गिरावट दर्ज की गई।

हालांकि, कंपनी के ऑपरेटिंग प्रदर्शन ने निवेशकों को सकारात्मक संकेत दिए हैं। परिचालन स्तर पर मजबूत प्रदर्शन यह दर्शाता है कि अस्पतालों में सेवाओं की मांग लगातार बढ़ रही है और कंपनी अपने नेटवर्क का प्रभावी ढंग से उपयोग कर रही है। मरीजों की बढ़ती संख्या से अस्पतालों की बेड ऑक्यूपेंसी, चिकित्सा सेवाओं की मांग और अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं से होने वाली आय में भी सुधार हुआ है।

स्वास्थ्य क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि भारत में बेहतर चिकित्सा सुविधाओं की बढ़ती जरूरत और निजी अस्पतालों की ओर लोगों का बढ़ता रुझान आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र को मजबूत आधार प्रदान करेगा। ऐसे में जिन कंपनियों का अस्पताल नेटवर्क तेजी से विस्तार कर रहा है, उन्हें लंबी अवधि में इसका लाभ मिल सकता है।

KIMS ने पिछले कुछ वर्षों में दक्षिण भारत सहित अन्य क्षेत्रों में अपने अस्पताल नेटवर्क का लगातार विस्तार किया है। कंपनी आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं, विशेषज्ञ डॉक्टरों और उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से अपनी उपस्थिति मजबूत करने पर ध्यान दे रही है। इसी रणनीति का असर पहली तिमाही के राजस्व में स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशक केवल नेट प्रॉफिट ही नहीं, बल्कि कंपनी की परिचालन क्षमता, राजस्व वृद्धि और भविष्य की विस्तार योजनाओं पर भी नजर रखते हैं। KIMS के तिमाही नतीजों में मुनाफा भले ही कम हुआ हो, लेकिन मजबूत राजस्व वृद्धि यह संकेत देती है कि कंपनी का मूल कारोबार अभी भी विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

कंपनी ने भविष्य को लेकर सकारात्मक रुख बनाए रखा है। प्रबंधन का कहना है कि अस्पतालों की क्षमता बढ़ाने, नई चिकित्सा सेवाएं शुरू करने और मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने पर लगातार निवेश किया जाएगा। इसके साथ ही परिचालन दक्षता बढ़ाने और लागत पर नियंत्रण के जरिए लाभप्रदता में सुधार लाने की दिशा में भी प्रयास जारी रहेंगे।

कुल मिलाकर, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही KIMS के लिए मिश्रित रही। एक ओर जहां शुद्ध लाभ में लगभग आधी गिरावट दर्ज की गई, वहीं दूसरी ओर कंपनी ने राजस्व और परिचालन प्रदर्शन में मजबूत दोहरे अंकों की वृद्धि हासिल कर यह संकेत दिया कि उसका मुख्य व्यवसाय लगातार विस्तार कर रहा है। आने वाली तिमाहियों में निवेशकों और बाजार की नजर इस बात पर रहेगी कि कंपनी बढ़ते कारोबार को बेहतर लाभप्रदता में किस तरह बदल पाती है।

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