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Delhi दिल्ली: अमेरिकी बैंकिंग दिग्गज जेपी मॉर्गन चेस एंड कंपनी करीब 10 साल बाद भारत में अपनी एक नई ब्रांच खोलने की तैयारी में है। यह कदम भारत जैसी तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था में उसकी गहरी रुचि को दर्शाता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने इसे पुणे में अपनी चौथी शाखा खोलने की मंजूरी दे दी है। यह नई ब्रांच मुख्य रूप से बड़े कॉर्पोरेट ग्राहकों को सेवाएं देने पर ध्यान देगी, जिसमें लेन-देन बैंकिंग सर्विसेज और टर्म लोन देने जैसी कई तरह की बैंकिंग सेवाएं मिलेंगी।
यह कदम ऐसे समय पर उठाया जा रहा है जब दुनिया के बड़े बैंक भारत में अपनी सेवाएं बढ़ाने की सोच रहे हैं, क्योंकि यहां की अर्थव्यवस्था बहुत तेजी से बढ़ रही है, कंपनियों का काम बढ़ रहा है, और लोन की मांग भी ज्यादा है। भारत का आर्थिक माहौल स्थिर होने के कारण यह विदेशी बैंकिंग कंपनियों के लिए एक अच्छे बाजार के रूप में उभर रहा है।
इस महीने की शुरुआत में एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि हाल ही में सरकार ने एक नया बैंकिंग कानून (संशोधन) 2025 लाया है, जो भारतीय बैंकिंग क्षेत्र को और भी बेहतर बनाएगा। इस नए कानून में बैंकों को आरबीआई के सामने एक जैसी रिपोर्टिंग सुनिश्चित करनी होगी, साथ ही सरकारी बैंकों में ऑडिट (जांच) गुणवत्ता में भी सुधार होगा।
साथ ही यह अधिनियम नामांकन सुविधाओं में सुधार के माध्यम से जमाकर्ताओं और निवेशकों की सुरक्षा को बढ़ाता है। इसके अलावा, बैंकों के निदेशकों का कार्यकाल 8 साल से बढ़ाकर 10 साल कर दिया गया है। हालांकि, अन्य बैंकिंग कंपनियों में निदेशकों का कार्यकाल पहले जैसा रहेगा। नए कानून में सहकारी बैंकों को भी 97वें संविधान संशोधन के तहत सुधारने की बात की गई है, ताकि वे भी लोकतांत्रिक तरीके से काम कर सकें और देश के राजनीतिक और आर्थिक ढांचे में अच्छा स्थान पा सकें।
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