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नई दिल्ली। शेयर बाजार में आईपीओ को लेकर निवेशकों का उत्साह लगातार बढ़ता जा रहा है। हाल ही में आए एक आईपीओ को निवेशकों का जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला है। इस इश्यू को करीब **449 गुना से ज्यादा सब्सक्रिप्शन** मिला, जिसके बाद ग्रे मार्केट में भी इसकी मांग बढ़ गई है। आईपीओ का **ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) करीब 65 रुपये** तक पहुंचने की खबरों ने निवेशकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
आईपीओ में भारी सब्सक्रिप्शन और मजबूत GMP को देखते हुए निवेशक अब इसके शेयरों की लिस्टिंग को लेकर उत्साहित हैं। हालांकि बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ GMP और सब्सक्रिप्शन देखकर निवेश का फैसला नहीं करना चाहिए, बल्कि कंपनी के कारोबार, वित्तीय स्थिति और भविष्य की संभावनाओं को भी समझना जरूरी है।
निवेशकों ने जमकर लगाया पैसा
आईपीओ में सबसे ज्यादा उत्साह गैर-संस्थागत निवेशकों और रिटेल निवेशकों की ओर से देखने को मिला। कई गुना ज्यादा सब्सक्रिप्शन का मतलब है कि उपलब्ध शेयरों की तुलना में कई गुना अधिक आवेदन प्राप्त हुए। इससे बाजार में कंपनी को लेकर सकारात्मक धारणा का संकेत मिलता है।
आईपीओ बाजार में जब किसी इश्यू को इतना अधिक सब्सक्रिप्शन मिलता है तो निवेशकों में लिस्टिंग गेन की उम्मीद बढ़ जाती है। यही वजह है कि कई लोग आईपीओ में आवेदन करने के बाद लिस्टिंग वाले दिन तक शेयर की स्थिति पर नजर बनाए रखते हैं।
क्या होता है GMP?
ग्रे मार्केट प्रीमियम यानी GMP वह अतिरिक्त कीमत होती है, जिस पर आईपीओ के शेयर अनौपचारिक बाजार में खरीदे-बेचे जाते हैं। यह शेयर की संभावित लिस्टिंग कीमत को लेकर बाजार की धारणा बताता है।
उदाहरण के तौर पर अगर किसी आईपीओ का इश्यू प्राइस 200 रुपये है और GMP 65 रुपये चल रहा है, तो बाजार में अनुमान लगाया जाता है कि शेयर करीब 265 रुपये के आसपास लिस्ट हो सकता है। हालांकि यह केवल अनुमान होता है और इसकी कोई गारंटी नहीं होती।
क्या GMP से तय होती है कमाई?
कई नए निवेशक GMP को देखकर आईपीओ में निवेश का फैसला कर लेते हैं, लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक यह पूरी तस्वीर नहीं दिखाता। कई बार मजबूत GMP वाले आईपीओ भी कमजोर लिस्टिंग दे सकते हैं, जबकि कम GMP वाले शेयर अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं।
लिस्टिंग पर असर डालने वाले कई कारक होते हैं—
* कंपनी की वित्तीय स्थिति
* बाजार का माहौल
* सेक्टर की स्थिति
* निवेशकों की मांग
* शेयर बाजार की चाल
इसलिए निवेशकों को केवल ग्रे मार्केट के भरोसे फैसला नहीं लेना चाहिए।
449 गुना सब्सक्रिप्शन का क्या मतलब?
किसी आईपीओ का 449 गुना सब्सक्राइब होना बताता है कि निवेशकों ने कंपनी के शेयरों के लिए उपलब्ध संख्या से कई गुना ज्यादा आवेदन किए हैं। यह कंपनी के प्रति बाजार में मजबूत रुचि को दर्शाता है।
हालांकि ज्यादा सब्सक्रिप्शन का मतलब यह नहीं होता कि शेयर निश्चित रूप से फायदा देगा। कई बार भारी मांग के बावजूद लिस्टिंग के बाद शेयरों में गिरावट भी देखी जाती है।
निवेशकों के लिए क्या है सलाह?
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि आईपीओ में निवेश करने से पहले कंपनी की पूरी जानकारी लेना जरूरी है। निवेशकों को कंपनी का बिजनेस मॉडल, कमाई, कर्ज, भविष्य की योजनाएं और वैल्यूएशन जरूर देखना चाहिए।
अगर कोई निवेशक सिर्फ लिस्टिंग गेन के लिए पैसा लगा रहा है तो उसे बाजार की परिस्थितियों को ध्यान में रखना चाहिए। वहीं लंबी अवधि के निवेशकों के लिए कंपनी की मजबूत नींव ज्यादा महत्वपूर्ण होती है।
अब लिस्टिंग पर टिकी नजर
आईपीओ को मिले जबरदस्त रिस्पॉन्स और GMP में तेजी के बाद अब निवेशकों की नजर शेयर बाजार में इसकी लिस्टिंग पर है। अगर बाजार का माहौल सकारात्मक रहा तो निवेशकों को अच्छा फायदा मिलने की उम्मीद हो सकती है।
हालांकि शेयर बाजार में जोखिम हमेशा बना रहता है। इसलिए निवेशकों को उत्साह के साथ-साथ सावधानी भी बरतनी होगी।
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