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Gold ETF में निवेशकों की बढ़ी दिलचस्पी, 3 साल में 2.6 गुना बढ़े फोलियो

Rajeshwari Nishad
6 Nov 2026 10:25 PM IST
Gold ETF में निवेशकों की बढ़ी दिलचस्पी, 3 साल में 2.6 गुना बढ़े फोलियो
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बिजनेस। देश में सोने की बढ़ती कीमतों के बीच निवेशकों का रुझान अब केवल सोने के आभूषण, सिक्के और बिस्कुट खरीदने तक सीमित नहीं रह गया है। भारतीय निवेशक तेजी से गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड यानी गोल्ड ETF की ओर आकर्षित हो रहे हैं। पिछले तीन वर्षों में गोल्ड ETF में निवेश और इसके प्रबंधन के तहत आने वाली संपत्तियों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिली है। सोने की कीमतों में तेजी, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और निवेश पोर्टफोलियो में विविधता लाने की बढ़ती जरूरत ने गोल्ड ETF को लोकप्रिय निवेश विकल्प बना दिया है। इस दौरान गोल्ड ETF की संपत्ति का आकार कई स्थापित लार्ज-कैप इक्विटी फंडों से भी आगे निकलने की चर्चा है।
सोना भारतीय परिवारों के लिए हमेशा से बचत और संपत्ति सुरक्षित रखने का प्रमुख माध्यम रहा है। शादी-विवाह, त्योहारों और विशेष अवसरों पर सोना खरीदने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। हालांकि, निवेश के तौर पर सोना खरीदने का तरीका अब बदल रहा है। नई पीढ़ी के निवेशक भौतिक सोना खरीदने के बजाय डिजिटल और बाजार आधारित विकल्पों को प्राथमिकता देने लगे हैं। गोल्ड ETF इसी बदलाव का महत्वपूर्ण उदाहरण है।
गोल्ड ETF एक ऐसा एक्सचेंज ट्रेडेड फंड है, जिसका उद्देश्य घरेलू सोने की कीमतों के अनुरूप निवेश प्रदर्शन देना होता है। इसमें निवेशक शेयर बाजार के माध्यम से यूनिट खरीद और बेच सकते हैं। इन यूनिटों का मूल्य सोने की कीमतों से जुड़ा होता है। हालांकि, फंड के खर्च, बाजार में मांग और आपूर्ति तथा ट्रैकिंग अंतर के कारण इसका प्रदर्शन वास्तविक सोने की कीमतों से थोड़ा अलग हो सकता है।गोल्ड ETF में निवेश करने का एक बड़ा फायदा यह है कि निवेशकों को सोना खरीदकर घर में रखने की जरूरत नहीं पड़ती। भौतिक सोने की सुरक्षा, लॉकर और चोरी जैसी चिंताओं से बचा जा सकता है। इसके अलावा निवेशक अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार अपेक्षाकृत छोटी राशि से भी निवेश की शुरुआत कर सकते हैं।
पिछले तीन वर्षों में गोल्ड ETF की लोकप्रियता बढ़ने के पीछे सोने की कीमतों में आई तेजी को एक प्रमुख कारण माना जा रहा है। वैश्विक बाजारों में आर्थिक अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव और केंद्रीय बैंकों की सोना खरीदने की गतिविधियों ने भी सोने को निवेशकों के लिए आकर्षक बनाया है। जब शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ता है, तो कुछ निवेशक अपने पोर्टफोलियो का एक हिस्सा सोने में लगाना पसंद करते हैं।
भारत में म्यूचुअल फंड उद्योग के विस्तार और निवेश के प्रति बढ़ती जागरूकता ने भी गोल्ड ETF की मांग को समर्थन दिया है। ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म और मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से निवेश करना पहले की तुलना में आसान हुआ है। इससे युवा और नए निवेशकों के लिए गोल्ड ETF तक पहुंच बढ़ी है।लार्ज-कैप इक्विटी फंड और गोल्ड ETF के बीच तुलना भी निवेशकों के लिए दिलचस्प विषय बन गई है। लार्ज-कैप फंड मुख्य रूप से बड़ी और स्थापित कंपनियों के शेयरों में निवेश करते हैं। इनका उद्देश्य लंबी अवधि में कंपनियों की वृद्धि और शेयर बाजार के प्रदर्शन से लाभ प्राप्त करना होता है। दूसरी ओर गोल्ड ETF का प्रदर्शन मुख्य रूप से सोने की कीमतों पर निर्भर करता है।
ताजा आंकड़ों से गोल्ड ETF की बढ़ती लोकप्रियता की तस्वीर और स्पष्ट होती है। एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) के अनुसार, मई 2023 में गोल्ड ETF का कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) लगभग 23,128 करोड़ रुपये था, जो मई 2026 में बढ़कर 1,84,571 करोड़ रुपये पहुंच गया। यानी तीन वर्षों में इसमें करीब 698 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। हालांकि, इस बढ़ोतरी में नए निवेश के साथ सोने की कीमतों में तेजी का भी योगदान रहा है।सितंबर 2026 तक गोल्ड ETF की कुल संपत्ति लगभग 1.86 लाख करोड़ रुपये पहुंच गई थी। ICRA Analytics के अनुसार, देश में 26 गोल्ड ETF योजनाएं संचालित थीं। इनमें सबसे बड़ी पांच योजनाओं के पास कुल संपत्ति का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा था। निप्पॉन इंडिया ETF गोल्ड BeES लगभग 56,982 करोड़ रुपये के AUM के साथ सबसे आगे रहा। इसके बाद ICICI प्रूडेंशियल, SBI, HDFC और कोटक गोल्ड ETF प्रमुख योजनाओं में शामिल रहे।
गोल्ड ETF की बढ़ती मांग का अंदाजा निवेशकों के खातों की संख्या से भी लगाया जा सकता है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार, सितंबर 2026 में गोल्ड ETF से जुड़े लगभग 1.40 लाख नए फोलियो जुड़े। इसके बाद कुल फोलियो की संख्या करीब 1.27 करोड़ पहुंच गई। सितंबर में गोल्ड ETF में लगभग 4,450 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश भी दर्ज किया गया।हालांकि, गोल्ड ETF की बढ़ती संपत्ति का मतलब यह नहीं है कि उसने पूरे लार्ज-कैप इक्विटी फंड वर्ग को पीछे छोड़ दिया है। अलग-अलग योजनाओं के AUM की तुलना में कुछ गोल्ड ETF बड़े इक्विटी फंडों से आगे हो सकते हैं, लेकिन दोनों निवेश श्रेणियों के उद्देश्य और जोखिम अलग हैं।निवेशकों को यह भी समझना चाहिए कि सोने की कीमतों में हमेशा तेजी नहीं रहती। सितंबर 2026 में गोल्ड ETF श्रेणी के औसत मासिक रिटर्न में लगभग 4.78 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी। इससे स्पष्ट है कि गोल्ड ETF भी बाजार के उतार-चढ़ाव से प्रभावित होते हैं।
गोल्ड ETF में निवेश करने से पहले निवेशकों को फंड का एक्सपेंस रेशियो, ट्रैकिंग एरर, बाजार में उपलब्ध तरलता और अपनी जोखिम उठाने की क्षमता का आकलन करना चाहिए। सोना पोर्टफोलियो में विविधता लाने का माध्यम हो सकता है, लेकिन केवल पिछले रिटर्न के आधार पर बड़ी रकम निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है।कुल मिलाकर, पिछले तीन वर्षों में गोल्ड ETF ने भारतीय निवेश बाजार में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। सोने की कीमतों में तेजी और निवेश के बदलते तरीकों ने इसे लोकप्रिय बनाया है। आने वाले समय में इसकी मांग सोने की वैश्विक कीमतों, आर्थिक परिस्थितियों और निवेशकों की जोखिम संबंधी प्राथमिकताओं पर निर्भर करेगी।
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