
Business बिजनेस : भारत की दूसरी सबसे बड़ी आईटी कंपनी इंफोसिस (Infosys) के निवेशकों के लिए यह साल अब तक काफी चुनौतीपूर्ण साबित हुआ है। कभी भारतीय शेयर बाजार की सबसे मजबूत और भरोसेमंद ब्लू-चिप कंपनियों में शामिल इंफोसिस का शेयर अब ₹1,000 के स्तर से नीचे फिसल गया है। यह स्थिति सितंबर 2020 के बाद पहली बार देखने को मिली है।लगातार हो रही गिरावट के चलते कंपनी का बाजार पूंजीकरण (Market Cap) भी घटकर लगभग ₹4 लाख करोड़ के आसपास पहुंच गया है। इस गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि आईटी सेक्टर में पहले से ही दबाव की स्थिति बनी हुई है।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि इस गिरावट के पीछे कई बड़े कारण हैं। इनमें सबसे प्रमुख कारण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से बढ़ते प्रभाव को माना जा रहा है, जिससे पारंपरिक आईटी सेवाओं पर प्रतिस्पर्धा बढ़ी है। इसके अलावा कमजोर बिजनेस ग्रोथ और वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितता, खासकर अमेरिका की अर्थव्यवस्था में उतार-चढ़ाव, भी कंपनी के प्रदर्शन को प्रभावित कर रहे हैं।इंफोसिस समेत अन्य बड़ी आईटी कंपनियों पर भी इन परिस्थितियों का असर देखा जा रहा है। निवेशकों के बीच यह चिंता बढ़ रही है कि आने वाले समय में आईटी सेक्टर की ग्रोथ रफ्तार धीमी रह सकती है। कई विश्लेषकों का मानना है कि जब तक वैश्विक मांग में सुधार नहीं होता और AI आधारित नई रणनीतियों को तेजी से अपनाया नहीं जाता, तब तक दबाव बना रह सकता है।
आईटी सेक्टर लंबे समय से भारतीय शेयर बाजार का मजबूत स्तंभ माना जाता रहा है, लेकिन मौजूदा स्थिति ने इस सेक्टर की स्थिरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इंफोसिस जैसी दिग्गज कंपनी का शेयर स्तर से नीचे जाना निवेशकों के लिए एक बड़ा संकेत माना जा रहा है।कुल मिलाकर, इंफोसिस के शेयरों में आई यह गिरावट न केवल कंपनी के लिए बल्कि पूरे आईटी सेक्टर के लिए एक चेतावनी के रूप में देखी जा रही है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि कंपनी और पूरा सेक्टर इन चुनौतियों से कैसे उबरता है।





