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IRDAI के नए कमीशन प्रस्ताव पर बीमा ब्रोकर्स में नाराजगी, कमीशन की सीमा घटाने के प्रस्ताव का विरोध, PMO तक पहुंचा मामला
jantaserishta.com
6 Oct 2026 5:26 PM IST

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नई दिल्ली: इंश्योरेंस रेगुलेटर IRDAI ने 23 सितंबर को जारी अपने परामर्श पत्र में भारत के इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन और कमीशन सिस्टम में कई बड़े बदलावों का प्रस्ताव रखा था। इसका उद्देश्य बीमा वितरण व्यवस्था को आसान और पारदर्शी बनाना, गलत तरीके से पॉलिसी बेचने यानी मिस-सेलिंग पर रोक लगाना और कमीशन से जुड़ी लागत कम करना है। प्रस्ताव के जरिए ग्राहकों के लिए बीमा प्रीमियम को सस्ता करने की दिशा में भी काम करने की बात कही गई है।
हालांकि, इन प्रस्तावों पर इंश्योरेंस ब्रोकर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया यानी IBAI ने आपत्ति जताई है। IBAI की अगुवाई नरेंद्र भरिंडवाल कर रहे हैं। संस्था ने प्रधानमंत्री कार्यालय को पत्र भेजकर प्रस्तावित बदलावों में हस्तक्षेप करने की मांग की है।
कमीशन की सीमा को लेकर IBAI की चिंता
IBAI का कहना है कि वह गलत बिक्री रोकने के IRDAI के प्रयासों का समर्थन करती है, लेकिन कमीशन की प्रस्तावित सीमाओं और खर्चों पर लगाई जाने वाली पाबंदियों को लेकर संस्था चिंतित है।
IRDAI ने अलग-अलग बीमा उत्पादों और वितरण चैनलों के लिए 30 से अधिक प्रकार की कमीशन की अधिकतम सीमाएं तय करने का प्रस्ताव रखा है। IBAI का तर्क है कि अलग-अलग वितरण चैनलों में मिलने वाले कमीशन में काफी अंतर होता है। ऐसे में एक समान सीमा लागू करने से बाजार की स्वाभाविक वृद्धि प्रभावित हो सकती है।
IBAI के अनुसार, खर्चों में प्रस्तावित कटौती का सीधा असर ब्रोकर्स, बीमा कर्मचारियों और बीमा कंपनियों पर पड़ सकता है। संस्था का कहना है कि इसके बावजूद इस बात की कोई निश्चित गारंटी नहीं है कि इसका फायदा ग्राहकों को कम प्रीमियम या बेहतर सुविधाओं के रूप में मिलेगा।
बीमा कंपनियों के खर्च में कटौती का प्रस्ताव
IRDAI के प्रस्ताव में बीमा कंपनियों के कुल खर्च की सीमा को करीब एक-तिहाई तक कम करने का प्रावधान बताया गया है। IBAI ने इस पर भी सवाल उठाए हैं।
संस्था ने अपने पत्र में जनरल इंश्योरेंस कंपनियों के परिचालन खर्च का आंकड़ा भी रखा है। इसके मुताबिक वित्त वर्ष 2022-23 में यह खर्च कुल प्रीमियम का 28.2 प्रतिशत था, जो वित्त वर्ष 2024-25 में घटकर 26.5 प्रतिशत रह गया। इसी अवधि में प्रीमियम में हर साल करीब 13 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
IBAI का कहना है कि ये आंकड़े बताते हैं कि 2023 में लागू किया गया ‘एक्सपेंसेस ऑफ मैनेजमेंट’ यानी EoM फ्रेमवर्क काम कर रहा है। संस्था के अनुसार कंपनियां अपने खर्चों को नियंत्रित कर रही हैं और ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए प्रतिस्पर्धा भी कर रही हैं।
‘इंश्योरेंस ब्रोकर’ नाम बदलने पर भी सवाल
IBAI ने IRDAI के एक अन्य प्रस्ताव पर भी आपत्ति जताई है। प्रस्ताव में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस्तेमाल होने वाले ‘इंश्योरेंस ब्रोकर’ शब्द को बदलकर ‘इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन इंटिटी’ करने की बात कही गई है।
IBAI का कहना है कि ग्राहकों का प्रतिनिधित्व करने वाले ब्रोकर्स और बीमा कंपनियों की ओर से उत्पाद बेचने वाले डिस्ट्रीब्यूटर्स की भूमिका अलग होती है। संस्था के मुताबिक प्रस्ताव में इन दोनों के बीच पर्याप्त अंतर नहीं किया गया है।
10 लाख से ज्यादा लोगों की आजीविका पर असर का दावा
IBAI ने अपने पत्र में रोजगार और आजीविका को लेकर भी गंभीर चिंता जताई है। संस्था का दावा है कि प्रस्तावित बदलाव लागू होने पर अगले पांच वर्षों में 10 लाख से अधिक लोगों की आजीविका प्रभावित हो सकती है।
भारत में इस समय 27.18 लाख पॉइंट-ऑफ-सेल यानी POS इंश्योरेंस कर्मचारी काम कर रहे हैं। IBAI के मुताबिक इनमें 54 प्रतिशत से अधिक, यानी करीब 14.81 लाख कर्मचारियों को बीमा ब्रोकर्स की ओर से व्यावसायिक और तकनीकी सहायता दी जाती है।
संस्था ने मोटर इंश्योरेंस सर्विस प्रोवाइडर्स यानी MISP नेटवर्क का भी जिक्र किया है। इस नेटवर्क में बीमा ब्रोकर्स की हिस्सेदारी करीब 62 प्रतिशत बताई गई है।
टियर-2, टियर-3 शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों पर असर की चिंता
IBAI के मुताबिक MISP नेटवर्क से जुड़े ज्यादातर लोग टियर-2, टियर-3 शहरों और ग्रामीण इलाकों में रहते हैं। इन लोगों की आजीविका मोटर व्हीकल इंश्योरेंस की रिटेल बिक्री और उससे जुड़ी सर्विसिंग पर निर्भर है।
IBAI का कहना है कि यदि ब्लैंकेट कमीशन कैप लागू किया जाता है और बीमा कंपनियों के खर्च में 33 प्रतिशत की कटौती होती है, तो इसका असर इस बड़े वितरण नेटवर्क पर पड़ सकता है।
संस्था ने प्रधानमंत्री कार्यालय से प्रस्तावित नियमों पर हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा है कि गलत बिक्री रोकने के उद्देश्य का समर्थन करते हुए ऐसे बदलाव किए जाने चाहिए, जिनसे ब्रोकर्स, कर्मचारियों, प्रतिस्पर्धा और बीमा क्षेत्र में निवेश पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
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