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महंगाई का झटका आलू भिंडी के दाम में राहत

Ratna Netam
12 Aug 2026 7:38 PM IST
महंगाई का झटका आलू भिंडी के दाम में राहत
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नई दिल्ली : देश में खुदरा महंगाई ने जुलाई 2026 में एक बार फिर मामूली बढ़त दर्ज की है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी CPI पर आधारित खुदरा महंगाई दर जुलाई में सालाना आधार पर बढ़कर 4.45 प्रतिशत हो गई। इससे पहले जून में यह 4.38 प्रतिशत थी। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय की ओर से बुधवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, खाने-पीने की कुछ वस्तुओं की कीमतों में तेजी का असर महंगाई के आंकड़ों पर दिखाई दिया है। खासतौर पर अदरक, लहसुन और प्याज की कीमतों में सालाना आधार पर बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में ग्रामीण क्षेत्रों में खुदरा महंगाई शहरी क्षेत्रों के मुकाबले अधिक रही। ग्रामीण इलाकों में महंगाई दर 4.84 प्रतिशत दर्ज की गई, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 3.96 प्रतिशत रही। इससे पता चलता है कि ग्रामीण उपभोक्ताओं पर वस्तुओं और सेवाओं की बढ़ती कीमतों का दबाव अपेक्षाकृत ज्यादा रहा।
खाने-पीने की वस्तुओं के मोर्चे पर भी महंगाई का दबाव दिखाई दिया। जुलाई में खाद्य महंगाई दर 5.52 प्रतिशत रही। ग्रामीण इलाकों में खाद्य महंगाई 5.79 प्रतिशत दर्ज की गई, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 5.05 प्रतिशत रही। खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बदलाव सीधे तौर पर आम परिवारों के घरेलू बजट को प्रभावित करता है, इसलिए खाद्य महंगाई में बढ़ोतरी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
हालांकि सभी खाद्य वस्तुएं महंगी नहीं हुई हैं। कई सब्जियों की कीमतों में सालाना आधार पर गिरावट भी दर्ज की गई। जुलाई में आलू की कीमतों में 16.56 प्रतिशत की कमी आई। भिंडी की कीमत 5.52 प्रतिशत, मटर की 5.27 प्रतिशत और टमाटर की कीमत सालाना आधार पर 4.59 प्रतिशत कम रही। इसके अलावा जीप और मोटर कार की कीमतों में भी 6.72 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
दूसरी तरफ कुछ वस्तुओं की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखने को मिला। जुलाई में चांदी की ज्वेलरी की महंगाई दर सालाना आधार पर 109.84 प्रतिशत दर्ज की गई। यानी इस श्रेणी में कीमतें एक साल में दोगुने से भी ज्यादा बढ़ गईं। अदरक की महंगाई दर 83.62 प्रतिशत रही, जबकि लहसुन में 35.36 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। सोना, हीरा और प्लेटिनम ज्वेलरी की महंगाई दर 32.98 प्रतिशत रही। प्याज की कीमतों में भी सालाना आधार पर 22.54 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
अलग-अलग श्रेणियों पर नजर डालें तो जुलाई में फूड एंड बेवरेज श्रेणी की महंगाई दर 5.24 प्रतिशत रही। पान, तंबाकू और नशीले पदार्थों से संबंधित श्रेणी में महंगाई 4.79 प्रतिशत दर्ज की गई। कपड़ा एवं जूता श्रेणी में यह आंकड़ा 3.38 प्रतिशत रहा। स्वास्थ्य सेवाओं की महंगाई दर 1.34 प्रतिशत, परिवहन की 4.43 प्रतिशत और शैक्षणिक सेवाओं की महंगाई दर 3.64 प्रतिशत दर्ज की गई।
राज्यों के आंकड़ों में भी महंगाई का असर अलग-अलग दिखाई दिया। जुलाई में सर्वाधिक खुदरा महंगाई वाले प्रमुख राज्यों में तेलंगाना पहले स्थान पर रहा, जहां महंगाई दर 6.32 प्रतिशत दर्ज की गई। इसके बाद आंध्र प्रदेश में 5.72 प्रतिशत, तमिलनाडु में 5.44 प्रतिशत, मध्य प्रदेश में 4.91 प्रतिशत और कर्नाटक में 4.89 प्रतिशत खुदरा महंगाई रही। इससे स्पष्ट है कि राष्ट्रीय औसत की तुलना में कई राज्यों में उपभोक्ताओं को अधिक महंगाई का सामना करना पड़ा।
महंगाई के आंकड़े भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण हैं। रिजर्व बैंक का मध्यम अवधि का खुदरा महंगाई लक्ष्य 4 प्रतिशत है, जिसमें दो प्रतिशत ऊपर या नीचे की सहनशीलता सीमा निर्धारित है। जुलाई की 4.45 प्रतिशत महंगाई दर लक्ष्य के मध्य बिंदु से ऊपर जरूर है, लेकिन छह प्रतिशत की ऊपरी सहनशीलता सीमा के भीतर बनी हुई है।
इस महीने की शुरुआत में भारतीय रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए खुदरा महंगाई दर करीब 5 प्रतिशत रहने का अनुमान दिया था। आरबीआई गवर्नर Sanjay Malhotra ने मौद्रिक नीति समिति के फैसलों की घोषणा के दौरान वैश्विक अस्थिरता के कारण अल्प अवधि में महंगाई बढ़ने की आशंका भी जताई थी।
जुलाई के आंकड़े बताते हैं कि महंगाई के मोर्चे पर स्थिति मिली-जुली बनी हुई है। एक तरफ आलू, टमाटर, मटर और भिंडी जैसी वस्तुओं की कीमतों में गिरावट ने उपभोक्ताओं को कुछ राहत दी है, वहीं प्याज, अदरक, लहसुन और कीमती धातुओं की कीमतों में तेज वृद्धि ने दबाव बढ़ाया है। आने वाले महीनों में खाद्य वस्तुओं की कीमतों की दिशा खुदरा महंगाई के पूरे आंकड़े पर महत्वपूर्ण असर डाल सकती है।
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