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Chennai चेन्नई: भारत का सर्विसेज़ एक्सपोर्ट तेजी से बढ़ते हुए चालू वित्त वर्ष में 500 बिलियन डॉलर तक पहुंचने की संभावना है। सर्विसेज़ एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के डायरेक्टर जनरल Abhay Sinha के अनुसार, यह क्षेत्र FY26 में 418 बिलियन डॉलर से बढ़कर नए स्तर पर पहुंचेगा और जल्द ही मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट को पीछे छोड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में यह सेक्टर और मजबूत होकर 2030 तक 1 ट्रिलियन डॉलर के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है। यह अनुमान भारत की वैश्विक सेवा बाजार में बढ़ती हिस्सेदारी और लगातार बढ़ती मांग को दर्शाता है।
अभय सिन्हा के मुताबिक, सर्विसेज़ सेक्टर अपने दम पर मजबूत ग्रोथ दिखा रहा है और देश के कुल व्यापार घाटे (ट्रेड डेफिसिट) को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। खासकर गुड्स एक्सपोर्ट में होने वाले घाटे को संतुलित करने में यह क्षेत्र मददगार साबित हो रहा है।
आईटी सेवाएं, बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज, कंसल्टिंग और डिजिटल सेवाओं की बढ़ती वैश्विक मांग ने भारत के सर्विस एक्सपोर्ट को गति दी है। कोविड के बाद डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन ने इस सेक्टर को और तेज़ी से आगे बढ़ाया है।
काउंसिल का मानना है कि वैश्विक स्तर पर सर्विसेज़ का बाजार तेजी से विस्तार कर रहा है और भारत के पास इस अवसर को भुनाने की मजबूत क्षमता है। कुशल मानव संसाधन और लागत प्रतिस्पर्धा भारत को इस क्षेत्र में लाभ पहुंचा रही है।
हालांकि, उद्योग प्रतिनिधियों का कहना है कि इस विकास को और तेज करने के लिए सरकार से सहयोग जरूरी है। इसमें टैक्स और ड्यूटी में छूट जैसी नीतिगत मदद शामिल है, जिससे भारतीय कंपनियां वैश्विक बाजार में और प्रतिस्पर्धी बन सकें।
अभय सिन्हा ने सुझाव दिया कि यदि निर्यातकों को बेहतर नीतिगत समर्थन मिलता है, तो भारत वैश्विक सेवा व्यापार में अपनी हिस्सेदारी और तेजी से बढ़ा सकता है। इससे रोजगार सृजन और विदेशी मुद्रा अर्जन दोनों में वृद्धि होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि सर्विसेज़ एक्सपोर्ट का यह बढ़ता रुझान भारत की अर्थव्यवस्था को स्थिरता प्रदान कर रहा है। यह सेक्टर कम लागत में अधिक मूल्य सृजन करने में सक्षम है, जो इसे विशेष रूप से महत्वपूर्ण बनाता है।
सरकार पहले से ही निर्यात को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चला रही है, लेकिन उद्योग जगत का कहना है कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा को देखते हुए और सुधारों की आवश्यकता है।
फिलहाल, भारत का सर्विसेज़ एक्सपोर्ट मजबूत विकास पथ पर है और आने वाले वर्षों में यह देश की अर्थव्यवस्था का एक प्रमुख स्तंभ बनने की ओर अग्रसर है।
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