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भारत के बंदरगाहों ने पकड़ी रफ्तार, माल परिवहन में सुधार का इंतजार

Ratna Netam
3 Nov 2026 2:04 PM IST
भारत के बंदरगाहों ने पकड़ी रफ्तार, माल परिवहन में सुधार का इंतजार
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नई दिल्ली। भारत के बंदरगाह क्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों के दौरान उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। सरकार की ओर से बुनियादी ढांचे के विकास, नई तकनीकों के इस्तेमाल और बंदरगाहों के आधुनिकीकरण पर लगातार जोर दिया जा रहा है। एक रिपोर्ट में देश की बंदरगाह कार्गो हैंडलिंग क्षमता में 22 प्रतिशत वृद्धि का दावा किया गया है। हालांकि, इस आंकड़े की सटीक समयावधि की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। दूसरी ओर, सरकारी आंकड़े बताते हैं कि देश की बंदरगाह क्षमता में लगातार विस्तार हुआ है, लेकिन माल परिवहन, सड़क और रेल कनेक्टिविटी तथा लॉजिस्टिक्स व्यवस्था से जुड़ी चुनौतियां अब भी बरकरार हैं।भारत के समुद्री व्यापार का देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान है। देश के कुल व्यापार का लगभग 95 प्रतिशत हिस्सा मात्रा के आधार पर समुद्री मार्गों से होता है। ऐसे में बंदरगाहों की क्षमता और उनकी कार्यकुशलता सीधे तौर पर आयात, निर्यात, औद्योगिक उत्पादन और आर्थिक विकास को प्रभावित करती है। सरकार ने समुद्री व्यापार को मजबूत बनाने के लिए कई महत्वाकांक्षी योजनाएं शुरू की हैं।
बंदरगाहों की क्षमता में लगातार हो रहा विस्तार
केंद्रीय बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, देश के प्रमुख बंदरगाहों की वार्षिक कार्गो हैंडलिंग क्षमता वर्ष 2014 में लगभग 87.3 करोड़ टन थी, जो 2026 में बढ़कर लगभग 172.6 करोड़ टन हो गई। इसी अवधि में प्रमुख बंदरगाहों पर वास्तविक माल ढुलाई भी 58.1 करोड़ टन से बढ़कर लगभग 91.5 करोड़ टन तक पहुंच गई।इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि भारत ने समुद्री बुनियादी ढांचे के विस्तार में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। नए कार्गो टर्मिनल, आधुनिक उपकरण और बंदरगाह संचालन में तकनीक के इस्तेमाल से माल की लोडिंग और अनलोडिंग प्रक्रिया में सुधार हुआ है।
लॉजिस्टिक्स व्यवस्था में बनी हुई हैं कई कमियां
बंदरगाहों की क्षमता बढ़ने के बावजूद देश की लॉजिस्टिक्स व्यवस्था में कई समस्याएं सामने आती रही हैं। प्रमुख चुनौतियों में बंदरगाहों से माल को औद्योगिक क्षेत्रों तक पहुंचाने में देरी, सड़क परिवहन पर अधिक निर्भरता, पर्याप्त रेल संपर्क का अभाव और कुछ स्थानों पर मालवाहक वाहनों की भीड़ शामिल हैं।विशेषज्ञों के मुताबिक, केवल बंदरगाहों पर बड़े जहाजों को संभालने की क्षमता बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। इसके साथ माल को बंदरगाहों से गोदामों, कारखानों और बाजारों तक तेजी से पहुंचाने की व्यवस्था भी मजबूत करनी होगी।यदि बंदरगाह पर माल उतारने की प्रक्रिया तेज हो, लेकिन उसे आगे ले जाने के लिए पर्याप्त रेलगाड़ियां या ट्रक उपलब्ध नहीं हों, तो पूरी आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हो सकती है। इससे व्यापारियों की लागत बढ़ती है और सामान की समय पर डिलीवरी में परेशानी होती है।
सड़क और रेल कनेक्टिविटी पर विशेष ध्यान जरूरी
भारत के कई प्रमुख बंदरगाह सड़क परिवहन पर काफी हद तक निर्भर हैं। बड़ी संख्या में कंटेनरों की ढुलाई ट्रकों के माध्यम से की जाती है। इससे प्रमुख सड़कों और बंदरगाहों के आसपास यातायात का दबाव बढ़ता है।जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह सहित कई प्रमुख समुद्री व्यापार केंद्रों में बंदरगाह के बाहर माल परिवहन की व्यवस्था को मजबूत करने की आवश्यकता सामने आई है। विशेष रूप से रेलवे नेटवर्क, अंतर्देशीय कंटेनर डिपो और आधुनिक लॉजिस्टिक्स केंद्रों का विस्तार महत्वपूर्ण माना जा रहा है।विशेषज्ञों का मानना है कि बंदरगाहों को समर्पित मालवाहक रेल गलियारों से जोड़ने और सड़क परिवहन के विकल्प विकसित करने से व्यापारिक गतिविधियों को गति मिल सकती है। इससे परिवहन लागत और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को भी कम किया जा सकेगा।
सागरमाला परियोजना से बढ़ रही सुविधाएं
केंद्र सरकार की सागरमाला परियोजना बंदरगाह आधारित विकास को बढ़ावा देने की प्रमुख पहल है। इसका उद्देश्य बंदरगाहों का आधुनिकीकरण, सड़क और रेल संपर्क में सुधार, तटीय क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार तथा समुद्री व्यापार की लागत कम करना है।सरकारी जानकारी के अनुसार, इस कार्यक्रम के तहत बंदरगाह कनेक्टिविटी और संबंधित बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए अनेक परियोजनाओं पर काम किया गया है।इसके अलावा सरकार अंतर्देशीय जलमार्गों को भी माल परिवहन के महत्वपूर्ण विकल्प के रूप में विकसित कर रही है। नदियों और तटीय मार्गों के जरिए माल ढुलाई बढ़ने से सड़क और रेलवे पर दबाव कम होने की संभावना है।
डिजिटल तकनीक से बेहतर होगा बंदरगाह संचालन
देश के बंदरगाहों को आधुनिक बनाने के लिए डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल भी बढ़ाया जा रहा है। कार्गो ट्रैकिंग, इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज, स्वचालित उपकरण और डिजिटल सूचना प्रणाली के माध्यम से बंदरगाह संचालन को अधिक पारदर्शी और तेज बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।इन तकनीकों के इस्तेमाल से माल की स्थिति की जानकारी आसानी से उपलब्ध हो सकती है। साथ ही दस्तावेजों की जांच, सीमा शुल्क संबंधी प्रक्रियाओं और माल की निकासी में लगने वाला समय कम किया जा सकता है।हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल सुविधाओं का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा, जब बंदरगाहों, परिवहन कंपनियों, रेलवे और अन्य संबंधित एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा।
वैश्विक व्यापार में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने की चुनौती
भारत दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। ऐसे में समुद्री व्यापार की कार्यकुशलता बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।चीन, सिंगापुर और अन्य प्रमुख समुद्री व्यापार केंद्रों की तुलना में भारत को कुछ क्षेत्रों में अभी और सुधार करने की आवश्यकता है। विशेष रूप से बड़े जहाजों की आवाजाही, आधुनिक कंटेनर टर्मिनल और बंदरगाहों से माल की तेज निकासी पर ध्यान देना जरूरी माना जा रहा है।विश्व बैंक के लॉजिस्टिक्स प्रदर्शन सूचकांक 2023 में भारत 139 देशों में 38वें स्थान पर रहा था। यह प्रदर्शन लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में हुए सुधारों को दर्शाता है, लेकिन वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए निरंतर निवेश और नीतिगत सुधार आवश्यक हैं।
आने वाले वर्षों में निवेश बढ़ाने की जरूरत
समुद्री व्यापार के विस्तार के साथ भारत में बंदरगाहों पर माल की आवाजाही और बढ़ने की संभावना है। इसे देखते हुए सरकार को बंदरगाहों के विस्तार के साथ रेल नेटवर्क, राजमार्ग, गोदाम, लॉजिस्टिक्स पार्क और आधुनिक कंटेनर सुविधाओं में निवेश बढ़ाना होगा।विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को वैश्विक विनिर्माण और निर्यात केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए एक मजबूत और एकीकृत लॉजिस्टिक्स नेटवर्क जरूरी है।कुल मिलाकर, बंदरगाहों की बढ़ती कार्गो हैंडलिंग क्षमता भारत के समुद्री क्षेत्र की महत्वपूर्ण उपलब्धि है। हालांकि, इसका पूरा आर्थिक लाभ हासिल करने के लिए माल परिवहन से जुड़ी बाधाओं को दूर करना आवश्यक होगा। बेहतर कनेक्टिविटी, आधुनिक तकनीक और समयबद्ध परियोजनाओं के जरिए भारत अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है।
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