
New Delhi नई दिल्ली : रेटिंग एजेंसी S&P ग्लोबल ने अपनी एक ताजा रिपोर्ट में कहा है कि अप्रैल और मई के दौरान वैश्विक LNG (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) आपूर्ति में करीब 17 प्रतिशत की गिरावट के बावजूद भारत ने अपनी विविध सोर्सिंग रणनीति के चलते बड़े सप्लाई झटकों से खुद को काफी हद तक बचा लिया। भारत, जो दुनिया का चौथा सबसे बड़ा LNG आयातक देश है, ने अलग-अलग देशों से गैस खरीदकर आपूर्ति व्यवस्था को स्थिर बनाए रखने में सफलता हासिल की है।
रिपोर्ट के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में आई बाधाओं के कारण पारंपरिक आपूर्ति स्रोतों से LNG की उपलब्धता प्रभावित हुई। इसके बावजूद भारत ने समय रहते अपनी खरीद रणनीति में बदलाव करते हुए अमेरिका, ओमान, नाइजीरिया और अंगोला जैसे देशों से LNG आयात बढ़ाया। इसी वजह से अप्रैल में भारत का LNG आयात पिछले साल की तुलना में केवल 5 प्रतिशत और मई में सिर्फ 2 प्रतिशत ही कम रहा, जो वैश्विक आपूर्ति गिरावट के मुकाबले काफी कम प्रभाव दर्शाता है।
S&P ग्लोबल एनर्जी के प्रिंसिपल रिसर्च एनालिस्ट जोहान उतामा ने कहा कि भारत की यह बहु-स्रोत (multi-source) LNG खरीद रणनीति भविष्य में आपूर्ति बाधाओं के प्रभाव को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। उन्होंने कहा कि इस तरह की रणनीति भारत की लंबी अवधि की ऊर्जा सुरक्षा और आयात नीति को भी प्रभावित कर सकती है।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि वर्ष 2025 में भारत के कुल LNG आयात में कतर और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की हिस्सेदारी लगभग 59 प्रतिशत थी। ये दोनों देश भारत के प्रमुख पारंपरिक आपूर्तिकर्ता रहे हैं, लेकिन हाल के समय में होर्मुज जलडमरूमध्य में आई बाधाओं और भू-राजनीतिक तनाव के कारण इन दोनों देशों से आपूर्ति प्रभावित हुई है।
मार्च से ही कतर और UAE से LNG सप्लाई में गिरावट दर्ज की गई है, जिससे भारत को वैकल्पिक स्रोतों की ओर तेजी से रुख करना पड़ा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव केवल अस्थायी प्रतिक्रिया नहीं है, बल्कि भारत की ऊर्जा नीति में एक संरचनात्मक बदलाव का संकेत भी हो सकता है।
भारत सरकार और ऊर्जा कंपनियों ने पिछले कुछ वर्षों में LNG आयात स्रोतों में विविधता लाने पर विशेष ध्यान दिया है। इसका उद्देश्य किसी एक क्षेत्र पर अत्यधिक निर्भरता को कम करना और वैश्विक आपूर्ति संकट के दौरान ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
विश्लेषकों के अनुसार, LNG बाजार में आने वाले समय में भी अस्थिरता बनी रह सकती है, ऐसे में भारत की यह रणनीति उसे वैश्विक ऊर्जा बाजार में अधिक मजबूत स्थिति में ला सकती है। हालांकि, लंबे समय तक विविध सोर्सिंग बनाए रखना लागत और लॉजिस्टिक्स के लिहाज से चुनौतीपूर्ण भी हो सकता है।
S&P ग्लोबल की रिपोर्ट यह संकेत देती है कि भारत ने वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच अपनी आपूर्ति श्रृंखला को लचीला बनाकर एक महत्वपूर्ण उदाहरण पेश किया है। इससे न केवल घरेलू मांग को संतुलित करने में मदद मिली है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत की स्थिति भी मजबूत हुई है।
कुल मिलाकर, भारत की LNG खरीद रणनीति ने वैश्विक आपूर्ति बाधाओं के प्रभाव को सीमित करने में अहम भूमिका निभाई है और आने वाले वर्षों में यह रणनीति देश की ऊर्जा सुरक्षा नीति का एक महत्वपूर्ण आधार बन सकती है।





