
नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार के साथ-साथ भारत के लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) आयात पर भी दिखाई देने लगा है। बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बीच भारत को अपने पारंपरिक आपूर्तिकर्ताओं के अलावा वैकल्पिक स्रोतों से LNG की खरीद बढ़ानी पड़ी है। इसी बदलाव के चलते अगस्त में अमेरिका भारत के लिए LNG का सबसे बड़ा सप्लायर बनकर उभरा।
कमोडिटी एनालिटिक्स फर्म Kpler के आंकड़ों के मुताबिक, भारत ने अगस्त में अमेरिका से 858,500 टन LNG आयात किया। यह मात्रा जुलाई के मुकाबले 18.6 प्रतिशत अधिक है। अगस्त में भारत के कुल LNG आयात में अमेरिकी आपूर्ति की हिस्सेदारी करीब 35 प्रतिशत रही।
यह बदलाव ऐसे समय में हुआ जब कतर, जो लंबे समय तक भारत का प्रमुख LNG आपूर्तिकर्ता रहा है, अगस्त में भारत को एक भी कार्गो नहीं भेज सका। इससे भारतीय आयातकों को LNG की जरूरत पूरी करने के लिए दूसरे स्रोतों पर अधिक निर्भर होना पड़ा।
अमेरिका बना सबसे बड़ा सप्लायर
भारत के LNG आयात के पैटर्न में अगस्त के दौरान अमेरिका की भूमिका तेजी से बढ़ी। 858,500 टन LNG के साथ अमेरिका भारत का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बन गया। जुलाई की तुलना में आयात में 18.6 प्रतिशत की वृद्धि यह बताती है कि भारतीय खरीदारों ने वैकल्पिक स्रोत के तौर पर अमेरिकी LNG पर अपनी निर्भरता बढ़ाई।
अमेरिका से आने वाली LNG की बढ़ी मात्रा ने भारत की ऊर्जा आपूर्ति में एक महत्वपूर्ण बदलाव को रेखांकित किया है। इससे पहले भारत के LNG आयात में कतर की भूमिका काफी महत्वपूर्ण रही है। लेकिन अगस्त में कतर से कोई कार्गो नहीं आने के कारण आपूर्ति का संतुलन बदल गया।
विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक LNG बाजार में किसी एक क्षेत्र या आपूर्तिकर्ता पर निर्भरता कम करने की कोशिश ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकती है। भारत जैसे बड़े ऊर्जा उपभोक्ता के लिए आपूर्ति के कई स्रोत उपलब्ध होना बाजार में अचानक आने वाले व्यवधानों से निपटने में मदद कर सकता है।
कतर से अगस्त में नहीं आया कार्गो
कतर लंबे समय से भारत के लिए LNG का प्रमुख स्रोत रहा है। दोनों देशों के बीच LNG व्यापार का लंबा इतिहास है और भारतीय गैस कंपनियां कतर से बड़ी मात्रा में LNG खरीदती रही हैं। लेकिन अगस्त में कतर से भारत के लिए कोई कार्गो नहीं आया।
कतर से आपूर्ति रुकने और अमेरिका से आयात बढ़ने के बीच भारत के LNG आयात का स्वरूप बदल गया। यह बदलाव केवल व्यावसायिक कारणों से नहीं, बल्कि वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों से भी जुड़ा हुआ है।
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव ने ऊर्जा आपूर्ति मार्गों और वैश्विक बाजार में अनिश्चितता बढ़ाई है। ऐसे माहौल में LNG खरीदारों के लिए सुरक्षित और भरोसेमंद स्रोतों से आपूर्ति सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण बदलाव
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। प्राकृतिक गैस देश के बिजली उत्पादन, उर्वरक, उद्योग और शहरों में पाइप्ड गैस जैसी कई जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण ईंधन है। ऐसे में LNG की निर्बाध आपूर्ति बनाए रखना देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए अहम है।
अमेरिका से LNG आयात बढ़ने का एक अर्थ यह भी है कि भारतीय कंपनियां वैश्विक बाजार में उपलब्ध दूसरे विकल्पों का इस्तेमाल कर रही हैं। यदि किसी एक स्रोत से आपूर्ति प्रभावित होती है तो अन्य देशों से कार्गो मंगाकर जरूरत पूरी करने की कोशिश की जा सकती है।
हालांकि, वैश्विक LNG बाजार में कीमतों और परिवहन लागत का भी बड़ा महत्व है। किसी नए स्रोत से LNG खरीदने का फैसला केवल उपलब्धता पर निर्भर नहीं करता, बल्कि कीमत, शिपिंग लागत, अनुबंध और बाजार की परिस्थितियां भी महत्वपूर्ण होती हैं।
LNG बाजार पर भू-राजनीतिक तनाव का असर
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का असर ऊर्जा बाजारों पर व्यापक रूप से पड़ सकता है। पश्चिम एशिया वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का महत्वपूर्ण क्षेत्र है और वहां किसी भी तरह का तनाव परिवहन मार्गों तथा आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित कर सकता है।
LNG व्यापार में समुद्री परिवहन की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में क्षेत्रीय तनाव बढ़ने पर शिपिंग जोखिम, बीमा लागत और परिवहन समय में बदलाव संभव है। इसका असर आयातकों की खरीद रणनीति पर पड़ सकता है।
भारत के मामले में अगस्त के आंकड़े बताते हैं कि आयातकों ने पहले से उपलब्ध विकल्पों का इस्तेमाल किया और अमेरिकी LNG की खरीद बढ़ाई।
आयात स्रोतों में विविधता पर जोर
भारत लंबे समय से ऊर्जा सुरक्षा के लिए आयात स्रोतों में विविधता लाने की कोशिश करता रहा है। LNG के क्षेत्र में भी विभिन्न देशों से आपूर्ति हासिल करना इसी रणनीति का हिस्सा है।
अमेरिका, कतर और अन्य LNG उत्पादक देशों से मिलने वाली आपूर्ति भारत को वैश्विक बाजार में अधिक विकल्प देती है। हालांकि किसी एक महीने के आंकड़े से दीर्घकालिक रुझान तय नहीं किया जा सकता, लेकिन अगस्त में अमेरिकी LNG की बढ़ी हिस्सेदारी बाजार की बदलती परिस्थितियों का संकेत जरूर देती है।
आगे भी नजर रहेगी वैश्विक बाजार पर
अगस्त में अमेरिका से भारत का LNG आयात 858,500 टन तक पहुंचना और कुल आयात में करीब 35 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल करना महत्वपूर्ण बदलाव है। दूसरी ओर, कतर से एक भी कार्गो नहीं आने से दोनों प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं की स्थिति में बड़ा अंतर दिखाई दिया।
आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कतर से आपूर्ति सामान्य होती है या नहीं और अमेरिका से LNG आयात का मौजूदा स्तर कितना कायम रहता है। साथ ही अमेरिका-ईरान तनाव और वैश्विक ऊर्जा बाजार की परिस्थितियां भी भारतीय कंपनियों की खरीद रणनीति को प्रभावित कर सकती हैं।
फिलहाल अगस्त के आंकड़े यह स्पष्ट संकेत दे रहे हैं कि भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत अपने LNG आयात के लिए वैकल्पिक स्रोतों पर तेजी से निर्भरता बढ़ा रहा है। अमेरिका का सबसे बड़ा सप्लायर बनना और कतर से आपूर्ति का पूरी तरह रुक जाना भारत के LNG आयात बाजार में आए इस महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाता है।





