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MSCI EM Top-10 से बाहर हुई भारतीय कंपनियां, 26 साल में ऐसा पहली बार बड़ा झटका

Tulsi Rao
9 Jun 2026 2:37 PM IST
MSCI EM Top-10 से बाहर हुई भारतीय कंपनियां, 26 साल में ऐसा पहली बार बड़ा झटका
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आपके द्वारा साझा की गई खबर का सार यह है कि वैश्विक निवेशकों का ध्यान इस समय AI और सेमीकंडक्टर कंपनियों पर केंद्रित हो गया है, जिसके कारण भारतीय दिग्गज कंपनियां MSCI Emerging Markets (EM) Index के शीर्ष 10 शेयरों से बाहर हो गई हैं। यह स्थिति लगभग 26 वर्षों में पहली बार देखने को मिली है।
मुख्य कारण क्या हैं?
AI और चिप कंपनियों का जबरदस्त उछाल
ताइवान, दक्षिण कोरिया और चीन की कंपनियां AI इकोसिस्टम की बड़ी लाभार्थी बनी हैं।
विशेष रूप से Taiwan Semiconductor Manufacturing Company, Samsung Electronics और SK Hynix जैसी कंपनियों में भारी निवेश आया है, जिससे उनका मार्केट कैप और इंडेक्स वेट तेजी से बढ़ा।
भारतीय दिग्गज शेयरों का अपेक्षाकृत कमजोर प्रदर्शन
HDFC Bank और Reliance Industries मार्च 2026 में MSCI EM में क्रमशः 7वें और 8वें स्थान पर थे, लेकिन अब 11वें और 12वें स्थान पर पहुंच गए हैं।
दोनों का इंडेक्स वेटेज 0.8% से नीचे आ गया है।
भारत का कुल वेटेज भी घटा
MSCI EM Index में भारत का कुल वेटेज घटकर 10.87% रह गया है, जो लगभग छह वर्षों का निचला स्तर है।
तुलना में ताइवान का वेटेज लगभग 26.4%, दक्षिण कोरिया का 23.1% और चीन का 20.4% है।
क्या इसका मतलब भारतीय बाजार कमजोर हो गया?
जरूरी नहीं।
यह घटना मुख्य रूप से वैश्विक पूंजी के AI-केंद्रित सेक्टरों में असाधारण रूप से केंद्रित होने का परिणाम है। MSCI जैसे मार्केट-कैप आधारित इंडेक्स में जिन कंपनियों का बाजार मूल्य तेजी से बढ़ता है, उनका वेट अपने-आप बढ़ जाता है। इसलिए AI और चिप कंपनियों के उभार ने अन्य सेक्टरों की बड़ी कंपनियों को पीछे छोड़ दिया।
निवेशकों के लिए इसका क्या महत्व है?
MSCI EM को 700 अरब डॉलर से अधिक की वैश्विक पैसिव फंड संपत्तियां ट्रैक करती हैं। इसलिए किसी देश या कंपनी का वेटेज कम होने पर विदेशी निवेश प्रवाह पर कुछ असर पड़ सकता है।
हालांकि भारत अभी भी EM इंडेक्स के सबसे बड़े घटकों में से एक है और भारतीय कंपनियों की संख्या इंडेक्स में काफी बड़ी बनी हुई है।
निष्कर्ष: यह खबर भारत की अर्थव्यवस्था के कमजोर होने से अधिक, AI और सेमीकंडक्टर थीम के कारण वैश्विक बाजारों में पैदा हुई असाधारण पूंजी एकाग्रता (capital concentration) को दर्शाती है। फिलहाल AI-संबंधित कंपनियां निवेशकों का सबसे बड़ा आकर्षण बनी हुई हैं, जबकि भारतीय बैंकिंग, ऊर्जा और पारंपरिक क्षेत्रों की बड़ी कंपनियां अपेक्षाकृत धीमी रफ्तार से बढ़ रही हैं।
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