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भारत बनेगा मेमोरी चिप हब, मोबाइल और लैपटॉप होंगे सस्ते

Ratna Netam
14 Jun 2026 7:13 PM IST
भारत बनेगा मेमोरी चिप हब, मोबाइल और लैपटॉप होंगे सस्ते
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सरकार के बड़े निवेश संकेत

Business बिजनेस : AI, डेटा सेंटर और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग की तेजी से बढ़ती जरूरतों के बीच दुनिया भर में मेमोरी चिप्स की मांग में लगातार उछाल देखा जा रहा है। डिजिटल तकनीक के विस्तार और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते उपयोग ने सेमीकंडक्टर उद्योग को नई दिशा दी है। इसी को ध्यान में रखते हुए भारत भी अब मेमोरी चिप और सेमीकंडक्टर निर्माण के क्षेत्र में बड़े निवेश आकर्षित करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है।

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हाल ही में संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में भारत में मेमोरी चिप निर्माण से जुड़ी नई कंपनियां निवेश कर सकती हैं। इसके साथ ही देश में पहले से मौजूद सेमीकंडक्टर कंपनियां भी अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर विचार कर रही हैं। सरकार का मानना है कि भारत इस क्षेत्र में एक मजबूत ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बन सकता है।

जानकारी के अनुसार, दुनिया भर में AI आधारित तकनीकों के विस्तार के कारण डेटा स्टोरेज और प्रोसेसिंग की जरूरत कई गुना बढ़ गई है। ऐसे में DRAM, NAND फ्लैश और अन्य मेमोरी चिप्स की मांग में तेज वृद्धि हुई है। इसी कारण वैश्विक कंपनियां नए उत्पादन केंद्रों की तलाश में हैं और भारत उनके लिए एक आकर्षक विकल्प बनकर उभर रहा है।

भारत सरकार पहले से ही “मेक इन इंडिया” और “सेमीकॉन इंडिया” जैसी योजनाओं के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा दे रही है। इन योजनाओं का उद्देश्य देश में सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन यूनिट्स और चिप डिजाइनिंग इकोसिस्टम को मजबूत करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत इस दिशा में सफल होता है तो न केवल घरेलू मांग पूरी होगी, बल्कि निर्यात के नए अवसर भी पैदा होंगे।

इसके अलावा, वैश्विक सप्लाई चेन में आई अस्थिरता के बाद कंपनियां अब चीन के अलावा वैकल्पिक देशों की ओर देख रही हैं। इस स्थिति में भारत की स्थिर नीतियां, बड़ी जनसंख्या और बढ़ता टेक्नोलॉजी बेस इसे एक मजबूत दावेदार बनाते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले वर्षों में सेमीकंडक्टर और मेमोरी चिप उद्योग भारत की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इससे रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे और तकनीकी क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा।

इस तरह AI और डिजिटल क्रांति के इस दौर में भारत का मेमोरी चिप निर्माण की दिशा में कदम देश को वैश्विक टेक्नोलॉजी बाजार में एक नई पहचान दिला सकता है।

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