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5 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था की ओर भारत, IMF ने जताया भरोसा

Ratna Netam
4 Aug 2026 8:25 PM IST
5 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था की ओर भारत, IMF ने जताया भरोसा
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नई दिल्ली : भारत आने वाले कुछ वर्षों में वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के ताजा अनुमान के अनुसार, भारत वित्त वर्ष 2028-29 (FY29) तक करीब 5.1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन सकता है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए केंद्र सरकार कृषि, उद्योग, सेवा क्षेत्र, डिजिटल तकनीक, बुनियादी ढांचे और कौशल विकास जैसे कई प्रमुख क्षेत्रों पर एक साथ काम कर रही है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राज्यसभा में सरकार की विकास रणनीति का विस्तृत खाका पेश करते हुए कहा कि इन प्रयासों का उद्देश्य भारत को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ाना है।
वित्त मंत्री ने बताया कि IMF की अप्रैल 2026 की वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा कीमतों के आधार पर भारत की जीडीपी FY29 तक लगभग 5.1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है। उन्होंने कहा कि सरकार आर्थिक सुधारों, निवेश और उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर लगातार ध्यान दे रही है, जिससे यह लक्ष्य हासिल करना संभव हो सकेगा। उनका मानना है कि मजबूत घरेलू मांग और वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती आर्थिक भूमिका इस लक्ष्य को समर्थन देगी।
सरकार की रणनीति में कृषि और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को सबसे महत्वपूर्ण माना गया है। कृषि क्षेत्र में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, आधुनिक तकनीक का उपयोग, डिजिटल खेती, फसल विविधीकरण, बेहतर भंडारण व्यवस्था और किसानों को बाजार से जोड़ने जैसे कदम उठाए जा रहे हैं। वहीं विनिर्माण क्षेत्र को गति देने के लिए ‘मेक इन इंडिया’, प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना, पीएम गतिशक्ति, नेशनल लॉजिस्टिक्स पॉलिसी और नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम जैसी योजनाओं को लागू किया गया है। इन पहलों का उद्देश्य घरेलू उत्पादन बढ़ाना, विदेशी निवेश आकर्षित करना और रोजगार के नए अवसर पैदा करना है।
सरकार सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र को भी आर्थिक विकास का प्रमुख आधार मान रही है। इसी के तहत लोन गारंटी बढ़ाने, इमरजेंसी क्रेडिट गारंटी स्कीम, MSME की नई परिभाषा, TReDS प्लेटफॉर्म को मजबूत करने, आसान उद्यम पंजीकरण, सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) तक पहुंच बढ़ाने और पीएम विश्वकर्मा योजना जैसी कई पहल की गई हैं। इन कदमों से छोटे कारोबारियों को पूंजी और बाजार दोनों तक बेहतर पहुंच मिलने की उम्मीद है।
सेवा क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC), मेडिकल वैल्यू ट्रैवल, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और स्किल डेवलपमेंट पर विशेष जोर दिया जा रहा है। केंद्रीय बजट 2026-27 में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हॉस्पिटैलिटी, रीजनल मेडिकल हब, एलाइड हेल्थ प्रोफेशनल संस्थानों के विस्तार, AVGC (एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग एंड कॉमिक्स) कंटेंट क्रिएटर लैब और विश्वविद्यालय टाउनशिप जैसी नई योजनाओं की भी घोषणा की गई है।
बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए सरकार सार्वजनिक पूंजीगत व्यय में लगातार वृद्धि कर रही है। इसके साथ ही प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) नियमों में उदारीकरण, निर्यात बढ़ाने, लॉजिस्टिक्स सुधारने, कर व्यवस्था को सरल बनाने और महंगाई को नियंत्रित रखने पर भी जोर दिया जा रहा है। भारत विभिन्न देशों के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) और कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (CEPA) के दायरे का भी विस्तार कर रहा है, ताकि वैश्विक व्यापार में उसकी हिस्सेदारी और बढ़ सके।
वित्त मंत्री ने कहा कि आने वाले वर्षों में सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, बायोफार्मास्यूटिकल्स, रेयर अर्थ मिनरल्स, केमिकल्स, कैपिटल गुड्स, क्लीन एनर्जी और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्र भारत की आर्थिक वृद्धि के प्रमुख इंजन बनेंगे। इन क्षेत्रों के लिए कुशल मानव संसाधन तैयार करने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री स्किलिंग एंड एम्प्लॉयबिलिटी ट्रांसफॉर्मेशन थ्रू अपग्रेडेड आईटीआई (PM-SETU) योजना भी शुरू की गई है, ताकि युवाओं को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण मिल सके।
राज्यसभा में एक अन्य प्रश्न के उत्तर में वित्त मंत्री ने बैंकिंग क्षेत्र की स्थिति पर भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान SARFAESI अधिनियम, 2002 के तहत बैंकों ने 2.15 लाख से अधिक मामलों में कार्रवाई की, जिनमें एक लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि शामिल थी। इनमें से लगभग 32,466 करोड़ रुपये की सफल वसूली की गई।
सरकार का मानना है कि यदि कृषि, उद्योग, सेवा क्षेत्र, डिजिटल तकनीक, बुनियादी ढांचे और कौशल विकास पर मौजूदा गति से काम जारी रहा, तो भारत FY29 तक 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य हासिल कर सकता है। इससे न केवल वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की स्थिति मजबूत होगी, बल्कि ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को भी नई गति मिलेगी।
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