
Business बिजनेस: भारत सरकार इंडक्शन कुकटॉप में इस्तेमाल होने वाले सिरेमिक ग्लास के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने के लिए एक रणनीतिक कदम पर काम कर रही है। मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार, इस पहल के तहत देश ऑस्ट्रेलियाई स्पोड्यूमीन (एक लिथियम युक्त खनिज) की स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय प्रयास कर रहा है, ताकि इस सेक्टर की सप्लाई चेन को मजबूत किया जा सके।
सरकारी सूत्रों के हवाले से आई इस रिपोर्ट में बताया गया है कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य चीन पर निर्भरता को कम करना है। वर्तमान में इंडक्शन कुकटॉप और उससे जुड़े उपकरणों के लिए आवश्यक कई महत्वपूर्ण कंपोनेंट्स की सप्लाई चेन पर चीन का दबदबा बना हुआ है, जिससे भारत की घरेलू उत्पादन क्षमता प्रभावित होती है।
सूत्रों के अनुसार, भारत इस दिशा में न केवल कच्चे माल की आपूर्ति सुनिश्चित करने पर काम कर रहा है, बल्कि घरेलू स्तर पर सिरेमिक ग्लास उत्पादन को भी बढ़ावा देने की रणनीति पर विचार कर रहा है। इसका मकसद देश में मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत करना और आयात पर निर्भरता को कम करना है।
यह कदम ऐसे समय में उठाया जा रहा है जब पिछले तीन महीनों के दौरान देश में इंडक्शन और इन्फ्रारेड कुकटॉप की मांग में तेज बढ़ोतरी देखी गई है। बाजार में इस उत्पाद की मांग बढ़ने से घरेलू उत्पादन और सप्लाई चेन पर दबाव भी बढ़ा है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि इस मांग में वृद्धि की प्रमुख वजह वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव हैं। विशेष रूप से ईरान से जुड़े हालिया टकराव और अमेरिका-इजरायल के बीच तनावपूर्ण स्थिति के कारण एलपीजी (LPG) सप्लाई पर असर पड़ा है, जिससे उपभोक्ता वैकल्पिक ऊर्जा उपकरणों की ओर रुख कर रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, एलपीजी आपूर्ति में बाधा और कीमतों में अस्थिरता के कारण उपभोक्ता इलेक्ट्रिक कुकटॉप, खासकर इंडक्शन और इन्फ्रारेड मॉडल्स की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। इससे इस सेक्टर की मांग में अचानक उछाल देखा गया है।
भारत सरकार का मानना है कि यदि घरेलू उत्पादन को बढ़ावा दिया जाए और कच्चे माल की आपूर्ति सुरक्षित की जाए, तो न केवल लागत कम होगी बल्कि देश की ऊर्जा उपकरण निर्माण क्षमता भी मजबूत होगी। इसके साथ ही रोजगार सृजन और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा।
सिरेमिक ग्लास, जो इंडक्शन कुकटॉप का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है, उसकी गुणवत्ता और टिकाऊपन पूरी तरह से कच्चे माल और उत्पादन तकनीक पर निर्भर करता है। इस कारण सरकार अब स्पोड्यूमीन जैसे खनिजों की स्थिर सप्लाई पर विशेष ध्यान दे रही है, जो लिथियम आधारित उत्पादों के निर्माण में अहम भूमिका निभाता है।
रिपोर्ट के अनुसार, चीन वर्तमान में इस सेक्टर के कई महत्वपूर्ण कच्चे माल और कंपोनेंट्स की सप्लाई में प्रमुख भूमिका निभाता है। ऐसे में भारत की यह पहल सप्लाई चेन को विविध बनाने और रणनीतिक निर्भरता को कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह योजना सफल होती है, तो भारत न केवल घरेलू मांग को पूरा करने में सक्षम होगा, बल्कि वैश्विक बाजार में भी प्रतिस्पर्धा बढ़ा सकेगा।
फिलहाल इस योजना पर विभिन्न स्तरों पर चर्चा जारी है और आने वाले समय में इससे जुड़े नीतिगत फैसलों की घोषणा की जा सकती है। सरकार का फोकस इस बात पर है कि सप्लाई चेन को मजबूत करते हुए स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा दिया जाए और आयात पर निर्भरता को धीरे-धीरे कम किया जाए।





