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अनिश्चित माहौल के बावजूद IPO बाजार में भारत का दबदबा

Kavita2
11 Aug 2026 10:26 AM IST
अनिश्चित माहौल के बावजूद IPO बाजार में भारत का दबदबा
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नई दिल्ली। वैश्विक बाजार में जारी उतार-चढ़ाव और अनिश्चित मैक्रो-इकोनॉमिक माहौल के बावजूद भारत का आईपीओ बाजार वित्त वर्ष 2025-26 में मजबूती के साथ आगे बढ़ा। ग्रांट थॉर्नटन भारत की ‘IPO इन इंडिया’ रिपोर्ट के अनुसार, FY26 में मेनबोर्ड और SME सेगमेंट को मिलाकर कुल 366 कंपनियां शेयर बाजार में सूचीबद्ध हुईं। इन कंपनियों ने आईपीओ के जरिए करीब 1.9 लाख करोड़ रुपये की पूंजी जुटाई।

रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितताओं, बाजार में उतार-चढ़ाव और निवेशकों के बदलते रुझान के बावजूद भारतीय कंपनियों के लिए आईपीओ बाजार पूंजी जुटाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बना रहा। कंपनियों ने सार्वजनिक निर्गम के जरिए न केवल पूंजी जुटाई, बल्कि अपने कारोबार के विस्तार और भविष्य की योजनाओं के लिए निवेशकों से धन हासिल किया।

IPO वॉल्यूम में भारत प्रमुख बाजारों में शामिल

ग्रांट थॉर्नटन भारत की रिपोर्ट के मुताबिक, आईपीओ की संख्या यानी वॉल्यूम के लिहाज से भारत दुनिया के प्रमुख बाजारों में अपनी स्थिति बनाए रखने में सफल रहा। मार्च 2026 में वैश्विक IPO लिस्टिंग में भारत की हिस्सेदारी 14 प्रतिशत रही।

इस हिस्सेदारी के साथ भारत वैश्विक IPO बाजार में चीन के बाद दूसरे स्थान पर रहा। यह आंकड़ा बताता है कि भारतीय पूंजी बाजार में कंपनियों और निवेशकों दोनों की सक्रियता बनी हुई है।

वैश्विक स्तर पर कई बाजारों में आर्थिक और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के कारण कंपनियों के सार्वजनिक निर्गम की योजनाओं पर असर पड़ा। इसके बावजूद भारत में IPO गतिविधियों का मजबूत बने रहना घरेलू पूंजी बाजार की बढ़ती क्षमता को दर्शाता है।

366 कंपनियों ने बाजार में दस्तक दी

FY26 के दौरान मेनबोर्ड और SME दोनों सेगमेंट में कुल 366 कंपनियों ने IPO लॉन्च किए। इनमें बड़ी कंपनियों के साथ छोटे और मध्यम उद्यम भी शामिल रहे।

SME IPO बाजार ने भी कंपनियों को पूंजी जुटाने का एक वैकल्पिक मंच उपलब्ध कराया। छोटी और मध्यम कंपनियों के लिए सार्वजनिक बाजार तक पहुंच बनाना कारोबार के विस्तार, नई परियोजनाओं और वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है।

वहीं मेनबोर्ड IPO के जरिए बड़ी कंपनियों ने निवेशकों से बड़ी मात्रा में पूंजी जुटाई। दोनों सेगमेंट की सक्रियता ने कुल IPO संख्या और फंड जुटाने के आंकड़े को मजबूत बनाए रखा।

करीब 1.9 लाख करोड़ रुपये की पूंजी जुटाई

रिपोर्ट के मुताबिक, FY26 में IPO के माध्यम से कंपनियों ने करीब 1.9 लाख करोड़ रुपये जुटाए। यह राशि बताती है कि भारतीय कंपनियों के लिए सार्वजनिक बाजार पूंजी का एक महत्वपूर्ण स्रोत बन चुका है।

IPO के जरिए जुटाई गई रकम का इस्तेमाल कंपनियां कारोबार के विस्तार, कर्ज में कमी, नई परियोजनाओं, अधिग्रहण और सामान्य कॉरपोरेट जरूरतों के लिए कर सकती हैं। कुछ मामलों में मौजूदा शेयरधारकों को हिस्सेदारी बेचने के जरिए भी पूंजी बाजार में हिस्सेदारी का लेनदेन होता है।

कंपनियों के लिए IPO केवल धन जुटाने का माध्यम नहीं है, बल्कि इससे उन्हें सार्वजनिक बाजार में पहचान और निवेशकों के व्यापक आधार तक पहुंच भी मिलती है।

वैश्विक अनिश्चितता के बीच मजबूत प्रदर्शन

FY26 के दौरान वैश्विक अर्थव्यवस्था कई चुनौतियों से प्रभावित रही। ब्याज दरों, महंगाई, भू-राजनीतिक घटनाक्रम और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उतार-चढ़ाव का असर दुनियाभर के शेयर बाजारों पर पड़ा।

ऐसे माहौल में IPO के लिए निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता महत्वपूर्ण हो जाती है। इसके बावजूद भारत में बड़ी संख्या में कंपनियों का IPO बाजार में उतरना इस बात का संकेत है कि घरेलू बाजार में पूंजी जुटाने को लेकर कंपनियों का भरोसा कायम रहा।

भारत की अपेक्षाकृत मजबूत घरेलू आर्थिक गतिविधियों और निवेशकों की सक्रिय भागीदारी ने भी IPO बाजार को समर्थन दिया।

घरेलू निवेशकों की भूमिका अहम

भारतीय IPO बाजार की मजबूती में घरेलू निवेशकों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही है। खुदरा निवेशकों के अलावा म्यूचुअल फंड, संस्थागत निवेशकों और अन्य घरेलू निवेशकों की भागीदारी ने सार्वजनिक निर्गमों को समर्थन दिया।

पिछले कुछ वर्षों में शेयर बाजार में खुदरा निवेशकों की भागीदारी बढ़ी है। डिजिटल निवेश प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन ट्रेडिंग की आसान उपलब्धता ने भी नए निवेशकों के लिए बाजार तक पहुंच आसान की है।

IPO में बढ़ती दिलचस्पी ने कंपनियों को भी सार्वजनिक बाजार के जरिए पूंजी जुटाने के लिए प्रोत्साहित किया है।

SME सेगमेंट ने भी बढ़ाया दायरा

भारत के IPO बाजार में SME सेगमेंट का महत्व लगातार बढ़ रहा है। छोटे और मध्यम कारोबारों के लिए SME प्लेटफॉर्म सार्वजनिक पूंजी जुटाने का विकल्प उपलब्ध कराता है।

ऐसी कंपनियां IPO के जरिए विस्तार योजनाओं को वित्तपोषित करने और अपने कारोबार की दृश्यता बढ़ाने की कोशिश करती हैं। निवेशकों के लिए भी यह सेगमेंट अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर रही छोटी कंपनियों में निवेश का अवसर प्रदान करता है, हालांकि इसमें जोखिम का स्तर भी अलग हो सकता है।

FY26 में मेनबोर्ड के साथ SME IPO की सक्रियता ने कुल 366 IPO के आंकड़े तक पहुंचने में योगदान दिया।

भारत की वैश्विक स्थिति मजबूत

मार्च 2026 में वैश्विक IPO लिस्टिंग में भारत की 14 प्रतिशत हिस्सेदारी रहना देश के पूंजी बाजार की बढ़ती वैश्विक अहमियत को दर्शाता है। चीन के बाद दूसरे स्थान पर रहना यह संकेत देता है कि कंपनियां भारत के बाजार को पूंजी जुटाने के लिए आकर्षक विकल्प मान रही हैं।

वैश्विक निवेशकों के लिए भी भारत का बड़ा और विविध घरेलू बाजार आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजारों की स्थिति और वैश्विक जोखिम आगे भी IPO गतिविधियों को प्रभावित कर सकते हैं।

आगे भी जारी रह सकती है IPO गतिविधि

ग्रांट थॉर्नटन भारत की रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि FY26 में भारत का IPO बाजार व्यापक आर्थिक चुनौतियों के बावजूद मजबूत रहा। 366 IPO और करीब 1.9 लाख करोड़ रुपये की पूंजी जुटाना भारतीय कंपनियों के सार्वजनिक बाजार पर बढ़ते भरोसे को दर्शाता है।

आने वाले समय में ब्याज दरों, वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, बाजार मूल्यांकन और निवेशकों की जोखिम क्षमता जैसे कारक IPO बाजार की दिशा तय करेंगे। इसके बावजूद भारत का बड़ा घरेलू निवेशक आधार, कंपनियों की पूंजी जरूरत और शेयर बाजार में बढ़ती भागीदारी IPO गतिविधियों को समर्थन दे सकती है।

मार्च 2026 में वैश्विक IPO लिस्टिंग में 14 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ चीन के बाद दूसरे स्थान पर रहना भी भारत के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे संकेत मिलता है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भी भारतीय पूंजी बाजार कंपनियों के लिए फंड जुटाने का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

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