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अमेरिकी प्रतिबंधों की आशंका के बीच भारत में रूसी तेल खरीद घटाने पर मंथन

Kavita2
21 Sept 2026 5:41 PM IST
अमेरिकी प्रतिबंधों की आशंका के बीच भारत में रूसी तेल खरीद घटाने पर मंथन
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नई दिल्ली। अमेरिकी प्रतिबंध कानून को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के बीच भारतीय तेल रिफाइनर रूस से कच्चे तेल की खरीद में संभावित कटौती पर विचार कर रही हैं। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी कानून लागू होने और रूसी ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाए जाने की संभावना को देखते हुए भारतीय कंपनियां अपनी रणनीति की समीक्षा कर रही हैं।

मामले से जुड़े लोगों के अनुसार, बड़ी भारतीय रिफाइनरियों ने रूसी कच्चे तेल के विकल्प तलाशने शुरू कर दिए हैं। हालांकि, अभी तक रूस से तेल आयात पूरी तरह बंद करने या किसी बड़े बदलाव का अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।

रूस बना भारत का प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ता

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चे तेल का आयातक देश है। देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़ी मात्रा में कच्चा तेल विदेशों से खरीदा जाता है।

पिछले कुछ वर्षों में वैश्विक स्तर पर सप्लाई चेन में बाधाओं और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच भारत ने रूसी तेल की खरीद बढ़ाई है।

रूसी कच्चा तेल कई बार अन्य विकल्पों की तुलना में कम कीमत पर उपलब्ध रहा है, जिससे भारतीय रिफाइनरियों को लागत नियंत्रित करने में मदद मिली है।

प्रतिबंधों के असर को लेकर चिंता

अमेरिका की ओर से प्रस्तावित प्रतिबंधों के तहत रूसी ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त शुल्क या टैरिफ लगाए जाने की संभावना जताई जा रही है।

यदि ऐसे कदम लागू होते हैं तो भारतीय तेल कंपनियों के लिए रूसी तेल खरीदना महंगा हो सकता है। इसी संभावना को देखते हुए कंपनियां अपने आयात विकल्पों का मूल्यांकन कर रही हैं।

तेल कंपनियां यह देख रही हैं कि वैकल्पिक स्रोतों से कच्चा तेल खरीदने पर लागत और आपूर्ति व्यवस्था पर कितना प्रभाव पड़ेगा।

रिफाइनरियों ने शुरू की वैकल्पिक तैयारी

मामले की जानकारी रखने वाले लोगों के अनुसार, भारत की प्रमुख रिफाइनरियों ने मध्य-पूर्व, अफ्रीका और अन्य तेल उत्पादक क्षेत्रों से आपूर्ति विकल्पों पर विचार शुरू कर दिया है।

कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति, तेल की कीमतों और संभावित प्रतिबंधों को ध्यान में रखते हुए आगे की योजना बना रही हैं।

हालांकि, रूसी तेल अभी भी भारतीय ऊर्जा व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है और किसी भी बदलाव का फैसला आर्थिक और रणनीतिक पहलुओं को देखकर ही लिया जाएगा।

भारत के सामने ऊर्जा सुरक्षा की चुनौती

भारत की अर्थव्यवस्था के लिए कच्चे तेल की कीमतें बेहद महत्वपूर्ण हैं। पेट्रोल-डीजल की कीमतों से लेकर उद्योग और परिवहन क्षेत्र तक पर कच्चे तेल की लागत का असर पड़ता है।

ऐसे में सरकार और तेल कंपनियों के सामने यह चुनौती है कि ऊर्जा आपूर्ति लगातार बनी रहे और कीमतों पर ज्यादा दबाव न आए।

रूसी तेल की खरीद में बदलाव होने पर कंपनियों को नए आपूर्तिकर्ताओं के साथ समझौते करने पड़ सकते हैं।

वैश्विक तेल बाजार पर भी नजर

रूस दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादक देशों में शामिल है। इसलिए रूसी तेल से जुड़े किसी भी बड़े बदलाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।

भारत समेत कई देश अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए अलग-अलग स्रोतों पर निर्भरता बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं।

अभी स्थिति स्पष्ट नहीं

फिलहाल अमेरिकी प्रतिबंध कानून और उसके प्रभाव को लेकर अंतिम तस्वीर साफ नहीं है। भारतीय तेल कंपनियां संभावित परिस्थितियों का आकलन कर रही हैं।

जानकारों का कहना है कि आने वाले समय में अमेरिकी फैसलों और अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति के आधार पर भारतीय रिफाइनरियों की रणनीति तय होगी।

भारत के लिए चुनौती यह है कि वह ऊर्जा सुरक्षा बनाए रखते हुए किफायती कीमतों पर कच्चे तेल की उपलब्धता सुनिश्चित करे। ऐसे में रूस से तेल खरीद को लेकर आने वाले महीनों में होने वाले बदलावों पर सभी की नजर बनी रहेगी।

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