
थिम्पू: भारत और भूटान ने अपनी लंबे समय से चली आ रही विकास साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। दोनों देशों ने 332 करोड़ रुपये की लागत वाले 12 नए प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है। इसके साथ ही ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए 4,000 करोड़ रुपये के ‘लाइन ऑफ क्रेडिट’ समझौते पर भी हस्ताक्षर किए गए हैं।
ये फैसले विदेश सचिव विक्रम मिसरी की भूटान यात्रा के दौरान लिए गए। मिसरी शुक्रवार को समाप्त हुई अपनी दो दिवसीय यात्रा के दौरान भारत की ओर से समर्थित विकास परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा करने के लिए थिम्पू पहुंचे थे।
विकास परियोजनाओं पर हुई अहम चर्चा
विदेश सचिव विक्रम मिसरी की यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारत और भूटान के बीच चल रहे विकास सहयोग की समीक्षा करना था। यात्रा के दौरान दोनों देशों ने विभिन्न क्षेत्रों में साझेदारी को आगे बढ़ाने पर चर्चा की।
भारत लंबे समय से भूटान के विकास में एक प्रमुख साझेदार रहा है। सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, ऊर्जा, डिजिटल कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में भारत की ओर से कई परियोजनाओं का समर्थन किया जाता रहा है।
नई मंजूर की गई 12 परियोजनाएं भी दोनों देशों के बीच विकास सहयोग को और विस्तार देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही हैं।
ऊर्जा क्षेत्र के लिए बड़ा समझौता
यात्रा के दौरान भारत और भूटान के बीच ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए 4,000 करोड़ रुपये की ‘लाइन ऑफ क्रेडिट’ व्यवस्था पर हस्ताक्षर किए गए।
यह समझौता भूटान और एक्सपोर्ट-इंपोर्ट बैंक ऑफ इंडिया (EXIM Bank) के बीच हुआ। इसके तहत भूटान में ऊर्जा से जुड़े प्रोजेक्ट्स को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने का रास्ता खुलेगा।
भूटान के लिए जलविद्युत क्षेत्र आर्थिक विकास का एक महत्वपूर्ण आधार रहा है। भारत और भूटान के बीच ऊर्जा सहयोग कई दशकों से द्विपक्षीय संबंधों का प्रमुख हिस्सा रहा है।
भूटान के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात
विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने अपनी यात्रा के दौरान भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक से मुलाकात की।
इसके अलावा उन्होंने भूटान के प्रधानमंत्री दाशो शेरिंग तोबगे और विदेश एवं बाहरी व्यापार मंत्री ल्योनपो डी.एन. ढुंगेल के साथ भी बैठक की।
इन बैठकों में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों, विकास साझेदारी और भविष्य के सहयोग के क्षेत्रों पर चर्चा हुई।
भारत-भूटान संबंधों का महत्व
भारत और भूटान के संबंधों को क्षेत्र में सबसे मजबूत और भरोसेमंद साझेदारियों में से एक माना जाता है। दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंध हैं।
भारत भूटान का एक प्रमुख विकास साझेदार है और दोनों देश कई क्षेत्रों में मिलकर काम कर रहे हैं। भारत की सहायता से भूटान में कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं पूरी की गई हैं।
विकास परियोजनाओं के अलावा दोनों देशों के बीच व्यापार, ऊर्जा और संपर्क बढ़ाने को लेकर भी लगातार सहयोग किया जा रहा है।
नई परियोजनाओं से बढ़ेगा सहयोग
332 करोड़ रुपये के 12 नए प्रोजेक्ट्स की मंजूरी से भूटान में विकास गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद है। इन परियोजनाओं के जरिए स्थानीय स्तर पर बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने और लोगों तक बेहतर सेवाएं पहुंचाने में मदद मिलेगी।
भारत का लक्ष्य पड़ोसी देशों के साथ विकास साझेदारी को बढ़ावा देना रहा है। भूटान के साथ यह सहयोग इसी नीति का हिस्सा है।
भविष्य के लिए साझा लक्ष्य
भारत और भूटान दोनों देशों ने अपनी साझेदारी को आने वाले वर्षों में और मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई है। ऊर्जा, बुनियादी ढांचे और विकास परियोजनाओं में सहयोग बढ़ाना दोनों देशों की प्राथमिकताओं में शामिल है।
विदेश सचिव की यात्रा के दौरान हुए समझौते इस बात का संकेत हैं कि भारत और भूटान अपने संबंधों को नए क्षेत्रों तक विस्तार देने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
दोनों देशों के बीच मजबूत होती विकास साझेदारी न केवल आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देगी, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता और आपसी विश्वास को भी मजबूत करेगी।





