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Business व्यापार : नई दिल्ली में सोने और चांदी के बाजार में एक बार फिर तेज हलचल देखने को मिल रही है। जून का महीना इस बार सोने और चांदी के लिए कमजोर साबित हुआ, जहां 17 साल बाद पहली बार इनकी कीमतों में एक महीने के भीतर सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई। लगातार तीन हफ्तों तक गिरावट झेलने के बाद अब दोनों कीमती धातुओं में फिर से तेजी देखने को मिल रही है।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर शुक्रवार को सोने की कीमत बढ़कर 1,47,365 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गई, जबकि चांदी में जोरदार उछाल देखने को मिला और यह 2,38,876 रुपये प्रति किलोग्राम पर ट्रेड करती नजर आई। बाजार में अचानक आए इस बदलाव ने निवेशकों को एक बार फिर सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या यह तेजी आगे भी जारी रहेगी या यह सिर्फ एक अस्थायी उछाल है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस बदलाव के पीछे मुख्य कारण अमेरिका से आए ताजा आर्थिक आंकड़े और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श का हालिया बयान माना जा रहा है। वैश्विक बाजारों में डॉलर की चाल और ब्याज दरों को लेकर बनी अनिश्चितता का सीधा असर कीमती धातुओं पर देखने को मिल रहा है।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि जब भी वैश्विक अर्थव्यवस्था में अस्थिरता बढ़ती है, तो निवेशक सुरक्षित निवेश के रूप में सोने-चांदी की ओर रुख करते हैं। यही वजह है कि हाल के दिनों में इनकी कीमतों में तेजी देखी जा रही है।
वीकली शो ‘प्रॉफिट की मंडी’ में कमोडिटी एक्सपर्ट महेंद्र लुनिया ने इस पूरे ट्रेंड पर विस्तार से चर्चा की और निवेशकों के सवालों के जवाब दिए। उन्होंने बताया कि मौजूदा समय में बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है और निवेशकों को जल्दबाजी में कोई बड़ा फैसला नहीं लेना चाहिए।
निवेशकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अब सोना-चांदी में निवेश का सही समय आ गया है या फिर अभी इंतजार करना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार की दिशा फिलहाल पूरी तरह वैश्विक संकेतों पर निर्भर करेगी, खासकर अमेरिका की आर्थिक नीतियों और ब्याज दरों पर।
विश्लेषकों के अनुसार, अगर आने वाले समय में फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों में कटौती के संकेत मिलते हैं, तो सोने और चांदी में और तेजी देखने को मिल सकती है। वहीं, अगर डॉलर मजबूत होता है तो कीमतों पर दबाव भी बन सकता है।
फिलहाल बाजार में अस्थिरता का माहौल बना हुआ है, ऐसे में निवेशकों को संतुलित रणनीति अपनाने की सलाह दी जा रही है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि लॉन्ग टर्म निवेशक धीरे-धीरे खरीदारी कर सकते हैं, जबकि शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स को सावधानी बरतने की जरूरत है।
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